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पृथ्वी के सबसे पास से गुजरा बस के आकार का उल्कापिंड, लेकिन वैज्ञानिकों को नहीं चला पता

कैच ब्यूरो | Updated on: 20 November 2020, 0:03 IST

एक उल्कापिंड जिसका आकार लंदन की किसी बस के बराबर था, वो दीपावली से एक दिन पहले यानि 13 नवंबर खो धरती के बेहद पास से गुजरा था. खगोलविदों ने खुलासा किया है कि वैज्ञानिकों के इसके धरती के इतने पास आने का पता करीब 15 घंटे बाद चल पाया.

डेली मेल की रिपोर्ट के अनुसार, यह उल्कापिंड जिसका नाम '2020 VT4' रखा गया है, वो धरती से करीब 240 मील (386 किमी) की दूरी से गुजरा था. बता दें, इसी के साथ ही '2020 VT4' नामक उल्कापिंड पृथ्वी के सबसे निकट से गुजरने वाला उल्कापिंड बन गया है.

पृथ्वी से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की दूरी करीब 408 किलोमीटर है और यह उल्कापिंड 386 किमी की दूरी से गुजरा है. अगर इस दौरान यह किसी सैटेलाइट से टकरा जाता तो इससे भारी तबाही मच सकती थी.

 

खगोलविदों की मानें तो अगर यह उल्कापिंड पृथ्वी से टकराता तो उसके वातावरण में ही पूरी तरह से नष्ट हो जाता. इससे पृथ्वी पर रहने वालों के लिए कोई खतरा नहीं होता. वहीं दक्षिण प्रशांत में आकाश में आतिशबाजी जैसा दिखाई देता.


बता दें, वैज्ञानिक उन उल्कापिंडों पर नजर बनाए रखते हैं जिनकी लंबाई करीब 82 फिट यानि 25 मीटर होती है. इससे छोटे आकार के उल्कापिंड पृथ्वी पर किसी तरह का कोई नुकसान नहीं पहुंचाते हैं. उदाहरण के लिए वैज्ञानिकों का मानना है कि जिस उल्कापिंड के टकराने के बाद धरती से डायासोर का अंत हुआ था उसका व्यास करीब 7.5 मील (12.1 किलोमीटर) था.

बता दें, इस साल ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है जब कोई उल्कापिंड धरती के इतने पास से गुजरा हो और वैज्ञानिकों को उसका पता बाद में चला हो. इससे पहले अगस्त में कुछ ऐसा ही हुआ था जब 2020 QG नामक उल्कापिंड धरती से 1830 मील की दूरी से गुजरा था.

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First published: 20 November 2020, 0:00 IST
 
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