Home » साइंस-टेक » Beware: If you are using smartphone in the dark at bed, two women go blind
 

रात में बेड पर स्मार्टफोन के इस्तेममाल से हो जाएं सावधान, दो महिलाएं हुई अंधी

कैच ब्यूरो | Updated on: 26 June 2016, 7:22 IST

अगर आपको भी रात के अंधेरे में बेड पर लेटकर स्मार्टफोन इस्तेमाल करने की आदत है तो सावधान हो जाएं. ऐसा करने से आपके आंखों की रोशनी जा सकती है. 

न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में छपी रिपोर्ट की मानें तो 22 और 40 वर्ष की दो औरतों को रात के अंधेरे में बेड पर लेटकर स्मार्टफोन इस्तेमाल करने की आदत थी. जिसके बाद वो अस्थायी रूप से अंधेपन का शिकार हो गईं. चिकित्सकों द्वारा इस बीमारी को 'ट्रांजिएंट स्मार्टफोन ब्लाइंडनेस' बताया गया है.

पढ़ेंः सुरक्षा को लेकर बेहद सतर्क रहते हैं फेसबुक सीईओ मार्क जुकरबर्ग

रिपोर्ट के मुताबिक यह दो महिलाएं कई माह तक एक निर्धारित अंतराल में अस्थायी रूप 15 मिनट तक अंधेपन का शिकार होने की शिकायत करती थीं. 

चिकित्सकों ने इसके बाद इन दोनों महिलाओं की एमआरआई स्कैन, हार्ट टेस्ट समेत तमाम शारीरिक जांच किए. हालांकि चिकित्सकों ने जांच में पाई रिपोर्टों में कोई खामी नहीं पाई और उन्हें कोई बड़ी समस्या नहीं दिखी.

जानिए मौत के बाद भी कैसे जिंदा रह सकते हैं आप

लेकिन एक नेत्र विशेषज्ञ के अस्पताल में पहुंचने के कुछ ही मिनटों में यह रहस्य सुलझ गया. लंदन स्थित मूरफील्ड आई हॉस्पिटल के डॉ. गॉर्डन प्लांट कहते हैं, "मैंने दोनों से सिर्फ इतना पूछा, 'जब यह हुआ (अंधापन) आप ठीक उस वक्त क्या कर रही थीं?'"

उन्होंने समझाया कि दोनों महिलाएं अंधेरे में अपने बेड पर एक करवट में लेटकर एक आंख से अपने स्मार्टफोन पर कुछ न कुछ काम करती थीं, जबकि उनकी दूसरी आंख तकिये में दबी रहती थी.

चांद से मुखड़े पर कैसे ग्रहण लगा सकता है ज्यादा मीठा भोजन

वो कहते हैं, "इसलिए आपकी एक आंख जो फोन को देखती थी, ने खुद को रोशनी के मुताबिक जबकि दूसरी जो बंद रहती थी ने ने खुद को अंधेरे के हिसाब से ढाल लिया."

इसके बाद जब वे अपना फोन रखती थी इसलिए वे फोन को देखने वाली आंख से नहीं देख पाती थीं. ऐसा इसलिए होता था क्योंकि दूसरी आंख जिसने खुद को अंधेरे के हिसाब से ढाल रखा है, के हिसाब से ढलने के लिए दूसरी आंख को कुछ मिनट का वक्त लगता है.

पढ़ेंः अमेरिका में कैंसर पीड़ित मरीज का पहली बार हुआ पेनिस ट्रांसप्लांट

उन्होंने यह भी कहा कि यह अस्थायी अंधापन नुकसानदायक नहीं था और इससे आसानी से बचा भी जा सकता है अगर लोग अपने स्मार्टफोन को दोनों आंखों से देखें.

अमेरिकन एकेडमी ऑफ ऑप्थैल्मोलॉजी के प्रवक्ता डॉ. राहुल खुराना इसे काफी आकर्षक अवधारणा बताते हैं लेकिन कहते हैं यह दोनों मामले यह पुष्टि करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं कि अंधेरे में एक आंख से स्मार्टफोन इस्तेमाल करने से दिक्कत होती है. उन्हें यह भी संदेह है कि तमाम स्मार्टफोन यूजर्स शायद ही इस अवधारणा से रूबरू हों.

First published: 26 June 2016, 7:22 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी