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सावधानः बच्चों, बेडरूम, तकिये से दूर रखें स्मार्टफोन

कैच ब्यूरो | Updated on: 22 October 2016, 13:42 IST

स्मार्टफोन आज हर आदमी की जिंदगी का जरूरी हिस्सा बन चुके हैं और न चाहते हुए भी लोग इस पर आश्रित हो चुके हैं. लेकिन न केवल फोन फटने और आग लगने की घटनाओं से आपको सचेत हो जाना चाहिए बल्कि हमेशा सावधानी बरतनी चाहिए कि आपका फोन बच्चों से, बेडरूम से और जरूरत न हो तो आपकी पहुंच से दूर रहे.

वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि स्मार्टफोन-टैबलेट जैसी कंज्यूमर डिवाइसों की बैटरियां 100 से ज्यादा जहरीली गैसें पैदा करती हैं जो स्वास्थ्य के लिए काफी खतरनाक है. चीन स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ एनबीसी डिफेंस और सिंघुआ यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के मुताबिक तमाम लोग उनकी रिचार्जेबल डिवाइसों में होने वाली ओवरहीटिंग (ज्यादा गर्म), इन्हें खराब करने या फिर खराब (अयोग्य) चार्जर का इस्तेमाल करने से होने वाले खतरों के बारे में नहीं जानते होंगे. 

शोधकर्ताओं के इस दल ने इन रिचार्जेबल डिवाइसों में लगीं लीथियम-आयन बैटरियों से निकलने वाली 100 से ज्यादा जहरीली गैसों की पहचान की. इनमें कार्बन मोनो ऑक्साइड भी शामिल है जो त्वचा, आंखों और नाक के अंदर काफी जलन पैदा करने के साथ आसपास के माहौल को नुकसान पहुंचाती है.

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इंस्टीट्यूट ऑफ एनबीसी डिफेंस के प्रोफेसर और शोध के प्रमुख लेखक जी सुन ने कहा, "आजकल दुनिया भर की तमाम सरकारों द्वारा लीथियम आयन बैटरियों के इस्तेमाल को काफी बढ़ावा दिया जा रहा है. लाखों परिवारों में लीथियम ऑयन बैटरी का इस्तेमाल किया जाता है. इसलिए यह बहुत जरूरी हो जाता है कि आम जनता ऊर्जा के इस स्रोत के पीछे के जोखिम को समझे."

बता दें कि पिछले कुछ वक्त में बैटरियों के फटने की घटनाओं के कारण निर्माताओं को लाखों डिवाइसें वापस मंगानी पड़ीं. इनमें ताजा घटना सैमसंग गैलेक्सी नोट 7 की है, जिसका अब कंपनी ने निर्माण-बिक्री बंद करने के साथ दुनियाभर से इन्हें रिकॉल कर लिया है. जबकि इससे पहले 2006 में डेल ने 40 लाख लैपटॉप रिकॉल किए थे. 

लेकिन इन डिवाइसों से निकलने वाली जहरीली गैसों और इनके स्रोतों के जोखिम को लोग उतनी गंभीरता से नहीं ले रहे. इसके साथ ही जानकारी का भी अभाव है.

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जी सुन और उनके सहयोगियो ने कई ऐसे कारणों (वजह) की पहचान की जिसके चलते इन डिवाइसों से निकलने वाली जहरीली गैसें और ज्यादा कंस्ट्रेटेड (सांद्र या ज्यादा ताकतवर) हो सकती हैं. उदाहरण के तौर पर 50 फीसदी चार्ज बैटरी की तुलना में पूरी तरह चार्ज बैटरी ज्यादा जहरीली गैसें छोड़ेगी. बैटरियों में भरे केमिकल्स और ऊर्जा छोड़ने की उनकी क्षमता भी इस कंस्ट्रेशन और जहरीली गैसों के प्रकार को प्रभावित करती है.

नैनो एनर्जी जर्नल में प्रकाशित शोध में जी सुन ने लिखते हैं, "कार या हवाई जहाज जैसी छोटी व बंद जगहों पर विशेषरूप से कार्बन डाई ऑक्साइड जैसे जहरीले तत्वों के काफी कम वक्त के लिए भी लीक होने पर गंभीर नुकसान पहुंचाने की भारी क्षमता होती है." 

शोध में करीब 20 हजार लीथियम ऑयन बैटरियां इस हद तक गर्म हुईं पाई गई कि वे फट जाएं, जिनसे अधिकांश डिवाइसें फटकर भारी मात्रा में जहरीली गैसें छोड़ देतीं. 

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अब शोधकर्ताओं की योजना है कि वे इन डिटेक्शन टेक्निक (पता लगाने की तकनीक) को विकसित करें जिससे लिथियम आयन बैटरियों की सुरक्षा बेहतर हो सके और इनका इस्तेमाल सुरक्षित भविष्य के लिए इलेक्ट्रिक व्हीकल बनाने में किया जा सके.

First published: 22 October 2016, 13:42 IST
 
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