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Chandrayaan 2: लैंडर विक्रम की लोकेशन के बारे में इसरो प्रमुख के सिवन का बड़ा खुलासा

कैच ब्यूरो | Updated on: 4 December 2019, 10:08 IST

Chandrayaan 2: नासा से पहले इसरो ने चंद्रमा की सतह पर दुर्घटनाग्रस्त हुए लैंडर विक्रम की लोकेशन खोज निकाली थी. इस बात का खुलासा इसरो प्रमुख के सिवन ने किया. दरअसल, नासा ने ये दावा किया था कि उसके एलआरओ (LRO) ने चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम के मलबे को चंद्रमा की सतह पर ढूंढ लिया. इसके बाद इसरो प्रमुख सिवन ने कहा कि, नासा से पहले चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर ने ही लैंडर विक्रम की लोकेशन पता कर ली थी. सिवन ने कहा कि हमने अपनी वेबसाइट पर इसकी जानकारी पहले ही दे दी थी. आप जाकर जांच कर सकते हैं.

बता दें कि इसरो ने अपनी वेबसाइट पर 10 सितंबर को एक जानकारी अपडेट की थी. जिसमें लिखा है कि चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम की खोज कर ली गई है, लेकिन उससे अभी तक संपर्क स्थापित नहीं हो सका है. संचार स्थापित करने के लिए सभी संभावित प्रयास किए जा रहे हैं.

नासा ने मंगलवार सुबह अपने लूनर रेकॉन्सेन्स ऑर्बिटर (LRO) से ली गई एक तस्वीर जारी की थी. जिसमें विक्रम लैंडर से प्रभावित स्थान दिखाई दे रहा है. नासा ने एक बयान जारी करते हुए कहा चंद्रमा की सतह पर विक्रम लैंडर मिल गया है. इस तस्वीर में नीले और हरे डॉट्स के जरिए विक्रम लैंडर के मलबे वाला क्षेत्र दिखाया गया है.

नासा ने अपने बयान में कहा कि उसने 26 सितंबर को क्रैश साइट की एक तस्वीर जारी की थी और लोगों को विक्रम लैंडर के संकेतों की खोज करने के लिए बुलाया था. चेन्नई के कंप्यूटर प्रोग्रामर और मैकेनिकल इंजीनियर शनमुग सुब्रमण्यम ने मलबे की सकारात्मक पहचान के साथ एलआरओ परियोजना से संपर्क किया.

जिसके बाद एलओआरसी की टीम ने पहले और बाद की छवियों की तुलना करके लैंडर साइट की पहचान की पुष्टि की. शनमुगा ने क्रैश साइट के उत्तर-पश्चिम में लगभग 750 मीटर की दूरी पर स्थित मलबे की पहचान की. यह पहले मोजेक (1.3 मीटर पिक्सल, 84 डिग्री घटना कोण) की स्पष्ट तस्वीर थी. नंवबर मोजेक में इंपैक्ट क्रिएटर, रे और व्यापक मलबा क्षेत्र को अच्छी तरह से दिख रहा है. मलबे के तीन सबसे बड़े टुकड़े 2x2 पिक्सल के हैं.

6-7 सितंबर की मध्य रात चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम को चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करनी थी, लेकिन सॉफ्ट लैंडिंग के कुछ पल पहले ही इसरो का विक्रम से संपर्क टूट गया. उसके बाद इसरो ने लैंडर विक्रम से संपर्क साधने की तमाम कोशिशें की, लेकिन कामयाबी नहीं मिली. उसके बाद भी इसरो ने हार नहीं मानी और 15 दिन तक संपर्क करने की कोशिश की. क्योंकि जहां लैंडर विक्रम को उतरना था उस स्थान पर लैंडिंग के बाद से 15 दिन तक दिन था यानी सूर्य की रोशनी थी.

इसी दौरान लैंडिर विक्रम और उसमें लगा रोवर प्रज्ञान कई चंद्रमा की सतह पर कई परीक्षण करता. उसके बाद ये काम करना बंद कर देता, लेकिन ऐसा नहीं हो सका. हालांकि चंद्रयान का ऑर्बिटर अभी भी काम कर रहा है और इसके इसरो से लगातार संपर्क बना हुआ है. ये अगले कई सालों तक ठीक से काम करता रहेगा.

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First published: 4 December 2019, 10:08 IST
 
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