Home » साइंस-टेक » China launched a mission to the moon to collect rock samples. first time a country will have done so in more than 40 years
 

चंद्रमा के रहस्यों को जानने के लिए चीन ने भेजा अंतरिक्ष यान, चट्टान लेकर लौटेगा वापस

कैच ब्यूरो | Updated on: 24 November 2020, 12:11 IST

दशकों से भूवैज्ञानिकों ने चंद्रमा के रहस्यों को जानने के लिए चंद्रमा की चट्टान (lunar rock) के छोटे टुकड़ों का अध्ययन किया है. चट्टानों से पता चला है कि चंद्रमा कितना पुराना है. वैज्ञानिकों ने अन्य ग्रहों की उम्र का अनुमान लगाने में मदद की और हमारे सौर ग्रह एक समय कितने अशांत थे, इस बात की जानकारी दी. लेकिन किसी ने भी 40 से अधिक वर्षों तक चांद की चट्टानों को इकट्ठा नहीं किया है.

सोमवार दोपहर 3:31 बजे चीन ने चंद्रमा की ओर एक अंतरिक्ष यान लॉन्च किया. चीन के इतिहास में पहली बार नमूने एकत्र करने के लिए चांग’-5 (Chang'e-5) नामक मिशन का उद्देश्य चंद्रमां की सतह पर एक रोबोट को उतारना है. यह अंतरिक्ष यान फिर नमूनों के साथ पृथ्वी पर लौटेगा. चंद्रमा पर अध्ययन करने का चीन का यह छठा मिशन है.


चांग’-5 अंतरिक्ष यान का उद्देश्य पहले से अस्पष्टीकृत क्षेत्र से चंद्रमा की चट्टान और धूल के 4 पाउंड एकत्र करना है. एक ज्वालामुखीय मैदान जिसे मॉन्स रुमर कहा जाता है. यह सामग्री चंद्रमा की पिछली ज्वालामुखी गतिविधि के बारे में नई जानकारी प्रदान कर सकती है. चीन का यह मिशन अगर सफल होता है तो वह अमेरिका और सोवियत संघ के बाद मून -रॉक के नमूनों को पृथ्वी पर लाने वाला तीसरा राष्ट्र बन जायेगा.

चांग-5 हैनान द्वीप (Hainan Island) पर चीन के वेनचांग सैटेलाइट लॉन्च सेंटर से भेजा गया और इसके एक सप्ताह के भीतर चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश करने की उम्मीद है, हालांकि चीन सरकार ने इसका कोई समय नहीं बताया है. इसमें एक ऑर्बिटर और एक डिसेंडर है. ऑर्बिटर जैसा कि इसके नाम से पता चलता है इसे ऑर्बिट में बने रहने के लिए डिज़ाइन किया गया है. डिसेंडर - जो एक लैंडर से युक्त होता है - को चंद्रमा के मॉन्स रूमर मैदान के पास उतरने के लिए प्रोग्राम किया जाता है.

जमीन में 6 फीट से अधिक की ऊंचाई तक ड्रिल करने के लिए रोबोट को स्लेट किया गया है. नमूने एकत्र करने के बाद लैंडर को उन्हें डिसेंडर वाहन में स्थानांतरित करना चाहिए. अमेरिका और सोवियत संघ द्वारा एकत्र किए गए पिछले चंद्रमा-रॉक नमूनों ने वैज्ञानिकों को यह निष्कर्ष निकालने के लिए प्रेरित किया है कि ज्वालामुखी लगभग 3 अरब साल पहले चंद्र सतह पर सक्रिय थे.

चट्टानें मंगल जैसे अन्य ग्रहों पर क्षेत्रों की आयु निर्धारित करने में वैज्ञानिकों की मदद कर सकती हैं. शोधकर्ताओं ने चंद्रमा-रॉक नमूनों की उम्र का विश्लेषण करके इसकी जांच की, फिर उन नमूनों को चंद्रमा के क्षेत्रों पर गिना जो उन नमूनों से आए थे. अभी तक वैज्ञानिक केवल चंद्र क्षेत्रों से चंद्रमा-रॉक के नमूनों का अध्ययन करने में सक्षम रहे हैं जो 3 अरब वर्ष या अधिक पुराने हैं.

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First published: 24 November 2020, 12:00 IST
 
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