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Coronavirus : अब मरीजों का डॉक्टर कर रहे ऑनलाइन इलाज, जानिए वीडियो कॉल और चैट की फीस

कैच ब्यूरो | Updated on: 29 May 2020, 15:14 IST

Coronavirus : भारत में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों को संभालने के लिए लगभग सभी अस्पताल संघर्ष कर रहे हैं, ऐसे में अन्य बीमारियों वाले मरीजों का डॉक्टरों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है. एक रिपोर्ट की माने तो भारत में अधिकांश डॉक्टर मरीजों का ऑनलाइन इलाज कर रहे हैं. क्लीनिकों में भीड़ और संक्रमण के जोखिम के कारण कई डॉक्टर नियमित टेलीफोन कॉल के अलावा वीडियो कॉल और व्हाट्सएप चैट की ओर रुख कर रहे हैं, ताकि डाइबिटीज या किडनी की समस्या जैसी बीमारियों से पीड़ित रोगियों का इलाज किया जा सके.

रिपोर्ट के अनुसार  नई दिल्ली के पास गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में आंतरिक चिकित्सा निदेशक सुशीला कटारिया ने कहा, "क्योंकि लॉकडाउन है और मरीज नहीं आ सकते लेकिन बीमारी इंतजार नहीं करेगी." कटारिया ने कहा कि उन्होंने लगभग 80 फीसदी रोगियों का इलाज ऑनलाइन करना शुरू कर दिया है, केवल शारीरिक जांच केवल जरूरी मामलों तक सीमित है.

मार्च के अंत से सख्त लॉकडाउन में से एक के बावजूद भारत में वायरस के संक्रमण की संख्या 165,000 और 4,706 मौतें हो चुकी हैं. मरीजों की बढ़ती संख्या के कारण कई अस्पताल इलाज में लगे हैं. अस्पताल पहले से ही बेड और डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे हैं. गैर-वायरस रोगियों और पुरानी बीमारी वाले मरीजों को मुश्किलों का सामना कर रहे हैं.


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आपातकालीन वीडियो कॉल सबसे महंगी 

सामान्य समय में भी इसकी स्वास्थ्य प्रणाली चरमरा जाने के साथ भारत ने इंटरनेट परामर्श के लिए टेलीमेडिसिन दिशानिर्देश जारी किए है. महामारी से पहले भी लोग अपॉइंटमेंट बुक करने और एडवांस भुगतान और ऑनलाइन बुकिंग कर सकते थे, अब यह प्रक्रिया को औपचारिक रूप देने में मदद कर रही है.

डॉक्टर देवेंद्र तनेजा ने कहा कि एक आपातकालीन वीडियो कॉल की लागत सबसे अधिक है, जबकि एडवांस में कॉल सस्ती है. एक फोन कॉल के माध्यम से भी शुल्क अभी कम है, जबकि व्हाट्सएप चैट से इलाज सस्ता है. तनेजा के 69 वर्षीय मरीज प्रदीप कुमार मल्होत्रा की हाल ही में स्पाइनल कॉर्ड की सर्जरी हुई थी.

मल्होत्रा ने कहा "वास्तव में एक डॉक्टर को दिखाने से डर लगता है. लगता है हम अस्पताल जाकर संक्रमित हो सकते हैं. यह एक बड़ी समस्या है." फिर भी डॉक्टरों को खराब नेटवर्क कनेक्शन के साथ संघर्ष करना चाहिए और रोगी विश्वास बनाने के तरीके खोजने चाहिए.

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First published: 29 May 2020, 15:07 IST
 
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