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coronavirus : जिस भारतीय दवा की दुनियाभर में है चर्चा, उसे चीन ने बताया बेअसर

कैच ब्यूरो | Updated on: 16 April 2020, 16:16 IST

कोरोनावायरस (COVID-19) से संक्रमित लोगों का इलाज करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प सहित कई लोगों ने मलेरिया रोधी दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन (HCQ) के उपयोग का समर्थन किया है. लेकिन एक चीनी अध्ययन में कहा गया है कि कोरोना वायरस (COVID-19) के इलाज में एंटी-मलेरियल दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन  प्रभावी नहीं हो सकती है.

हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन का उपयोग मलेरिया को रोकने और इलाज के लिए किया जाता है. इसका उपयोग रोगियों में डिस्कॉइड या सिस्टमिक ल्यूपस एरिथेमेटोससके उपचार के लिए किया जाता है. मलेरिया रोधी दवा की पहचान अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने कोरोना वायरस के संभावित उपचार के रूप में की है.


मीडिया रिपोर्ट के अनुसार चीन के शोधकर्ताओं ने 150 अस्पतालों में भर्ती मरीजों पर इसका इस्तेमाल किया. चीनी शोध टीम ने पाया कि हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन ने रोगियों पर स्टैंडर्ड केयर की तुलना में कम असर किया. 

कनाडाई मेडिकल एसोसिएशन जर्नल में इस महीने की शुरुआत में प्रकाशित एक अन्य शोध में कहा गया कि क्लोरोक्वीन, हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन और एजिथ्रोमाइसिन का इस्तेमाल COVID -19 के इलाज के लिए किया जा रहा है, जबकि इसके इस्तेमाल के बाद प्रभावशीलता के कम सबूत हैं.

कहा गया है कि डॉक्टरोंऔर रोगियों सावधान रहने की जरूरत है.  जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के हालिया आंकड़ों के अनुसार, COVID-19 ने अब तक 2 मिलियन से अधिक लोगों को संक्रमित किया है और दुनिया में 137,000 से अधिक लोगों की मौत हुई है.

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First published: 16 April 2020, 16:10 IST
 
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