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हवा से भी फैल रहा है कोरोना वायरस, 32 देशों के 239 वैज्ञानिकों ने WHO को लिखा पत्र

कैच ब्यूरो | Updated on: 6 July 2020, 12:18 IST

Coronavirus :  32 देशों के 239 वैज्ञानिकों ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को लिखे एक खुले पत्र में दावा किया है कि कोविड-19 (कोरोना वायरस) हवा से फैल रहा है. इससे पहले भी कई बार दावा किया जा चुका है कि संक्रमित व्यक्ति के नाक या मुंह से निकलने वाली बूंदों के माध्यम से वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में ट्रांसमिट हो सकता है. कहा गया था कि जब संक्रमित व्यक्ति खांसता, छींकता या बोलता है, तब इसके फैलने के आसार रहते हैं. डब्ल्यूएचओ ने अब तक इस बात पर जोर दिया है कि केवल चिकित्सा प्रक्रियाओं के मामले में वायरस वायु के माध्यम से फैल सकता है जो एरोसोल का उत्पादन करते हैं. WHO ने वायरस से बचने के लिए बार-बार हाथ धोने और मास्क पहनने का सुझाव दिया है.

एक रिपोर्ट के अनुसार डब्ल्यूएचओ के अधिकारी डॉ. बेनेडेटा एलेग्रांज़ी ने कहा कि कोरोना वायरस के हवाई होने का प्रमाण अभी पूरी तरह साबित नहीं हुआ है. अप्रैल में वायु गुणवत्ता और एरोसोल पर 36 विशेषज्ञों के एक समूह ने डब्ल्यूएचओ से आग्रह किया था कि वह वायरस के हवाई ट्रांसमिशन पर बढ़ते सबूतों पर विचार करें. संयुक्त राज्य अमेरिका में वर्जीनिया टेक यूनिवर्सिटी में वायरस के प्रसारण में विशेषज्ञ डॉ. लिन्सी मार ने कहा कि वैज्ञानिक समुदाय 1946 से जानते हैं कि खांसी और बात करने से एरोसोल उत्पन्न होता है.


उन्होंने कहा कि हालांकि वैज्ञानिक प्रयोगशाला में एरोसोल से वायरस को विकसित करने में असमर्थ रहे हैं, लेकिन अब तक लिए गए अधिकांश नमूने अच्छे वायु प्रवाह वाले अस्पताल के कमरों से हैं. डॉ. मार ने यह भी कहा कि डब्ल्यूएचओ एयरबोर्न ट्रांसमिशन की एक पुरानी परिभाषा पर भरोसा कर रहा है. अमेरिका जैसे कुछ देशों में मामलों में बड़े पैमाने पर वृद्धि के बाद कोरोना वायरस के हवाई प्रसारण के बारे में चिंताएं बढ़ गई हैं, जहां प्रतिदिन 50,000 नए मामले सामने आ रहे हैं. सोमवार की सुबह तक, कोरोना वायरस ने विश्वभर में 1,14,19,638 लोगों को संक्रमित और 533,781 लोगों की जान ले ली.

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हालही में भारतीय शोधकर्ताओं ने दावा किया था कि कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए छह फुट से अधिक की दूरी बेहद आवश्यक है. शोधकर्ताओं का कहना था कि किसी भी संक्रमित व्यक्ति के मुंह से या सांस के जरिये निकली बूंदे 13 फुट तक की दूरी तय कर सकती हैं. उनका कहना है कि यह बात साफ है कि कोरोना वायरस का प्रसार संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने से फैलता है. टीम ने वायुगतिकी और श्वसन बूंदों के वाष्पीकरण विशेषताओं का उपयोग करके एक कोविड-19 महामारी के शुरुआती चरणों के लिए एक गणितीय मॉडल विकसित किया है.

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First published: 6 July 2020, 12:12 IST
 
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