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Coronavirus: 'वर्क फ्रॉम होम' करवाना भारत में अधिकतर कंपनियों के लिए अभी भी सपना है

कैच ब्यूरो | Updated on: 16 March 2020, 15:15 IST

कोरोना वायरस (coronavirus) के डर से दुनिया की तमाम कंपनियां अपने कर्मचारियों को घर से काम करने की सलाह दे रही हैं वहीं भारत को लेकर कहा गया है कि भारत में कई कंपनियों के लिए यह दूर का सपना हो सकता है. प्रमुख आईटी सर्विस प्रबंधन कंपनी गार्टनर की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में 54 प्रतिशत कंपनियों के पास घर पर काम करने के लिए कर्मचारियों के लिए पर्याप्त तकनीक और संसाधन नहीं हैं.

कहा गया है कि Google, माइक्रोसॉफ्ट जैसे आईटी कर्मचारियों के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और अन्य सॉफ्टवेयर की मदद से घर से काम करना आसान है लेकिन अधिकांश गैर-आईटी कंपनियों के पास कोई अन्य विकल्प नहीं है. पुराने डेस्कटॉप-लैपटॉप, खराब नेटवर्क कनेक्टिविटी और यूपीएस बैकअप के कारण इन कंपनियों के लिए वर्क फ्रॉम होम करना आसान नहीं है.  दो-तिहाई से अधिक कर्मचारियों के पास Google Hangouts, Skype, Zoom, Cisco WebEx, GoToMeeting, Microsoft Teams, Group Chat, का इस्तेमाल करने के लिए डिवाइस नहीं हैं.

 

समाचार एजेंसी आईएएनएस के अनुसार गैर-आईटी कंपनियों और छोटे और मध्यम उद्यमों (SMBs) के वर्कर भारत में यह नहीं जानते हैं कि इन उपकरण का इस्तेमाल कैसे करते हैं. BPO और KPO कंपनियां घर से काम नहीं कर सकती हैं. घर से छोटी कंपनियों के लिए ग्रुप की मीटिंग और कम्युनिकेशन भी संभव नहीं हैं.

रिपोर्ट के अनुसार क्लाउडकनेक्ट, संचार, टेलीमेडिसिन के कार्यकारी प्रमुख गोकुल टंडन के अनुसार, दूरसंचार के ढांचे में सुधार करने की आवश्यकता है. यह एक सबक है, हर कर्मचारी को किसी अन्य वैश्विक आपदा के लिए आधुनिक डिजिटल स्किल के साथ प्रशिक्षित किया जाना चाहिए.

कंपनियों के सामने 'घर से काम करने' के मॉडल के बारे में एक और बाधा सॉफ्टवेयर की लागत है. कुछ बहुत महंगे हैं जबकि कई अन्य केवल कार्यालय में उपयोग किए जा सकते हैं और लैपटॉप पर नहीं. आमतौर पर ब्रॉडबैंड कनेक्शन की तुलना में कार्यालय इंटरनेट बहुत तेज़ होता है जिसका उपयोग कर्मचारी घर से लॉग इन करने के लिए नहीं कर सकते हैं.

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First published: 16 March 2020, 15:09 IST
 
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