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Covid-19 की वैक्सीन ट्रायल के लिए तैयार, वैज्ञानिकों का दावा- 80 प्रतिशत सफलता के चांस

कैच ब्यूरो | Updated on: 23 April 2020, 9:06 IST

कोरोना वायरस (coronavirus) के खिलाफ वैक्सीन तैयार करने पर दुनियाभर में शोध हो रहे हैं. खबरों के मुताबिक कई जगह इन प्रयासों में सफलता मिलती दिखाई दे रही है. जर्मनी में मनुष्यों पर इसके क्लीनिकल ट्रायल को मंजूरी दी गई है जबकि ब्रिटेन में भी इसके सफल होने की उम्मीद जताई जा रही है. दुनियाभर में ऐसे लगभग 150 वैक्सीन डेवलपमेंट प्रोजेक्ट चलाये जा रहे हैं लेकिन जर्मनी और ब्रिटेन में किये क्लिनिकल ट्रायल उन उन पांच परीक्षणों में शामिल हैं, जो इंसानों पर किये जा रहे हैं.

ब्रिटेन में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी एक परीक्षण चिंपांजी में पाए जाने वाले वायरस के आधार पर संभावित वैक्सीन की पहली खुराक के रूप में तैयार है. बुधवार को जर्मन नियामक संस्था PEI ने फर्म Biontech और अमेरिकी कंपनी फाइजर द्वारा विकसित एक वैक्सीन के मानव परीक्षण को हरी झंडी दे दी है. इसी तरह यूनिवर्सिटी के जेनर इंस्टीट्यूट द्वारा संचालित ऑक्सफोर्ड ट्रायल में पहले चरण में 18 से 55 वर्ष की आयु के 510 वोलेंटियर शामिल होंगे. इस शोध के निदेशक प्रोफेसर सारा गिल्बर्ट ने अनुमान लगाया कि इसके सफल होने की लगभग 80 प्रतिशत संभावना है.


संस्थान का लक्ष्य सितंबर तक वैक्सीन की एक लाख खुराक तैयार करना है, ताकि अप्रूवल के बाद इसे जल्दी से जल्दी वितरित किया जा सके. ऑक्सफोर्ड का परीक्षण ब्रिटेन में एक राष्ट्रव्यापी प्रयास का हिस्सा है, जिसमें सरकार का टास्क फाॅर्स शामिल है. जर्मनी में PEI का कहना है कि Biontech के परीक्षण का मकसद जल्द से जल्द वैक्सीन उपलब्ध करवाना है. पहले चरण में यह 18 और 55 साल आयु के 200 स्वस्थ वोलेंटियर को दिया जायेगा. जबकि दूसरे चरण में उन वोलेंटियर को शामिल किया जा सकता है, जिनमें ज्यादा खतरा है.

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बुधवार को Biontech के सीईओ उगुर साहिन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि परीक्षण अप्रैल के अंत में शुरू होंगे. उन्होंने कहा कि फर्म जून के अंत या जुलाई की शुरुआत तक पहला डेटा एकत्र करेगी. Biontech ने यह भी कहा कि वह फाइजर के साथ मिलकर अमेरिका में भी इसका परीक्षण करेंगे. वर्तमान में COVID-19 लिए कोई वैक्सीन या दवा नहीं है. दुनियाभर में अबतक 170,000 से अधिक की मौत हो चुकी है. विशेषज्ञों का अनुमान है कि एक नया टीका विकसित करने में कम से कम 12 से 18 महीने का समय लगेगा.

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पिछले हफ्ते संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा था कि दुनिया को को सामान्य स्थिति में लाने का एकमात्र तरीका टीका है. बीजिंग ने 16 मार्च को सैन्य-समर्थित एकेडमी ऑफ मिलिट्री मेडिकल साइंसेज और हांगकांग-सूचीबद्ध बायोटेक फर्म कैनिनो बायो द्वारा विकसित एक टीके के लिए पहले परीक्षण को मंजूरी दी है. एक अन्य अमेरिकी लैब, सैन डिएगो स्थित इनोवियो फार्मास्यूटिकल्स ने 6 अप्रैल को पहले चरण का मानव परीक्षण शुरू किया.

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First published: 23 April 2020, 9:04 IST
 
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