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क्या सीटी स्कैन से वाकई कैंसर होता है?

कैच ब्यूरो | Updated on: 30 June 2016, 8:33 IST

चिकित्सीय जांच के लिए कंप्यूटराइज्ड टोमोग्राफी (सीटी) स्कैन का इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है. ब्रिटेन में ही प्रतिवर्ष करीब 30 लाख सीटी स्कैन किए जाते हैं. अमेरिका की तुलना में ब्रिटेन में प्रतिव्यक्ति सीटी स्कैन की दर पांच गुना ज्यादा है. हालांकि सीटी स्कैन कराने वालों में कैंसर होने के जोखिम को लेकर भी चिंताएं बढ़ती जा रही हैं.

बता दें कि पारंपरिक एक्स-रे की तुलना में सीटी स्कैन की रिपोर्ट डॉक्टरों को मरीज के शरीर के अंदर होने वाली गतिविधियों की ज्यादा स्पष्ट रिपोर्ट देती है. लेकिन इसके साथ ही यह आयनाइजिंग रेडिएशन की भी ज्यादा मात्रा पैदा करता है. इस रेडिएशन के कारण ऊतक नष्ट हो जाते हैं और कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है. जितना ज्यादा रेडिएशन होगा जोखिम भी उतना ही ज्यादा होगा.

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बार-बार सीटी स्कैन होने पर यह जोखिम बढ़ता जाता है और वयस्कों की तुलना में बच्चों में कैंसर का खतरा ज्यादा मंडराता है. क्योंकि सीटी स्कैन को शरीर के एक ही हिस्से की कई तस्वीरें लेनी होती हैं इसलिए यह पारंपरिक एक्स-रे की तुलना में ज्यादा रेडिएशन छोड़ता है. 

उदाहरण के तौर पर एब्डॉमिनल एरिया में सीटी स्कैन होने पर रेडिएशन की मात्रा 50 गुना ज्यादा होती है. लेकिन इसतनी बढ़ी संख्या में होने के बावजूद यह काफी मामूली संख्या ही है.

ऐसा अनुमान है कि किसी व्यक्ति में एब्डॉमिनल स्कैन के जरिये होने वाला आयनाइजिंग रेडिएशन एक वर्ष में पर्यावरण के जरिये होने वाले रेडिएशन की तुलना में मात्र छह गुना ज्यादा होता है.

संबंध की खोज

ब्रिटेन में हुई एक बड़ी शोध में शोधकर्ताओं ने पाया कि सीटी स्कैन के जरिये कम रेडिएशन पाने वाले बच्चों की तुलना में ज्यादा रेडिएशन पाने वालों में ल्यूकेमिया और मस्तिष्क ट्यूमर विकसित होने का जोखिम तीन गुना ज्यादा बढ़ जाता है. इन बच्चों को जितनी ज्यादा रेडिएशन की मात्रा दी जाएगी, इनमें इन कैंसरों के बढ़ने की संभावना उतनी ज्यादा बढ़ जाएगी.

इस शोध के दौरान पता चला कि 17 सालों में 1 लाख 80 हजार बच्चों का तमाम वजहों से सीटी स्कैन किया गया. इनमें से 200 बच्चों में इस दौरान कैंसर पाया गया. 

शोधकर्ताओं के मुताबिक इन 200 में से 170 में कैंसर के बढ़ने की वजह केवल सीटी स्कैन के दौरान होने वाला ऊंचा रेडिएशन था. नतीजतन प्रति एक हजार में एक बच्चे को सीटी स्कैन के जरिये कैंसर होने का जोखिम पाया गया.

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लेकिन इसके साथ ऐसी ही अन्य शोध विधियों में कुछ समस्याएं भी हैं. करीब 30 हजार बच्चों को इस डाटा एनालिसिस में इसलिए शामिल नहीं किया गया क्योंकि उनके मेडिकल रिकॉर्ड्स अधूरे थे और इन्हें हटा देना इसके नतीजों को प्रभावित कर सकता था. 

और अगर शोधकर्ताओं ने ऐसा करने की कोशिश भी की होती तो हम विपरीत परिणामों को हटा नहीं सकते, वह यह हैं कि इनसे उलट कुछ बच्चों के ज्यादा सीटी स्कैन किए गए क्योंकि उनमें पहले से ही ज्यादा शारीरिक समस्याएं मौजूद थी.

अमेरिकी शोध

ऊपर दिए गए ब्रिटेन के आंकड़ों की ही तरह अमेरिकी शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला कि अमेरिका के कुल कैंसर रोगियों में से दो फीसदी की वजह सीटी स्कैन से होने वाला रेडिएशन है. 

यह नतीजे ऊपर दिए गए विवरण या चेतावनी के बराबर ही हैं. इसके साथ ही अमेरिकी सेंट्रलाइज्ड डाटाबेस में हेल्थ रिकॉर्ड्स की नामौजूदगी ने अनुमानित जोखिम के और ज्यादा होने की संभावना जताई.

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अगर अनुमान सही है और ब्रिटेन में सीटी स्कैन का इस्तेमाल अमेरिकी स्तर की तुलना का पांचवा हिस्सा है. तो ब्रिटेन में होने वाले कैंसर, अमेरिका की तुलना में 0.4 फीसदी हैं. 

हालांकि पाठकों को यह आंकड़े काफी कम लग सकते हैं. लेकिन मौजूदा दर को देखते हुए भविष्य में इनकी संख्या में ईजाफा होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.

असमान है इनकी तुलना

ज्यादातर विशेषज्ञों का मानना है कि सीटी स्कैन से जुड़े जोखिमों को इनसे होने वाले फायदे की तुलना में ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर बताया जाता है. हालांकि ऐसा कहना दलदली जमीन पर पैर टिकाने जैसा होगा. 

ऐसे विचारों का सबसे बड़ा तार्किक दोष दो असमान चीजों के बीच तुलना करना है. इस मामले में सीटी स्कैन कराने वाले अन्यथा स्वस्थ लोगों को होने वाले मेडिकल फायदे की तुलना कैंसर से पीड़ित मरीजों में इसका खतरा बढ़ने से करना अनुचित है.

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यानी जिस मरीज को पहल से कैंसर है उसे सीटी स्कैन से होने वाले नुकसान की तुलना उस आदमी से नहीं की जा सकती जिसे ऐसे कोई बीमारी नहीं है और वो किसी सामान्य बीमारी के लिए सीटी स्कैन कराता है.

(यह लेख मूलतः द कंवर्सेशन में प्रकाशित हुआ है. इसके लेखक यूनिवर्सिटी ऑफ हड्डर्सफील्ड के प्रोफेसर बॉब हैमैन हैं)

First published: 30 June 2016, 8:33 IST
 
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