Home » साइंस-टेक » Don't worry, Common Users will not be affected with 13 digit mobile numbers from July 1, Here's the reason, BSNL, DoT, ZTE, Nokia
 

घबराइए मत, 1 जुलाई से आपके मोबाइल नंबर नहीं होंगे 13 डिजिट के

अमित कुमार बाजपेयी | Updated on: 21 February 2018, 16:28 IST

शायद आपने भी यह समाचार देखा-सुना होगा कि आगामी 1 जुलाई से देश के मोबाइल नंबर 10 की जगह 11 डिजिट (अंकों) के हो जाएंगे. यानी यूजर्स को 13 अंक याद रखने होंगे. लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं है. सोशल मीडिया पर बिना सत्यापन और सही जानकारी दिए इस खबर को जमकर चलाया गया. चलिए जानते हैं क्या है सच्चाई.

दूरसंचार विभाग ने (DoT) या डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्यूनिकेशंस ने सभी टेलीकॉम ऑपरेटर्स को निर्देश जारी किए हैं कि वे अपने सभी मौजूदा मशीन-टू-मशीन (M2M) कस्टमर्स के लिए अक्टूबर 2018 से आगे 13 डिजिट के मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल करना शुरू कर दें.

इसके आगे विभाग ने कहा है कि 13 अंकों का M2M मोबाइल नंबर 1 जुलाई 2018 से लागू कर दिया जाएगा. सभी टेलीकॉम ऑपरेटर्स द्वारा इस निर्देश को लागू करने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2018 रखी गई है.

इस खबर में पूरी सच्चाई है लेकिन इसके साथ ही यह भी सच है कि इससे देश के मोबाइल यूजर्स पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. सोशल मीडिया पर वायरल हुई खबरें कि भारत सरकार के नए आदेश से मोबाइल फोन यूजर्स को 13 अंकों का नंबर याद रखना पड़ेगा, सरासर गलत हैं.

दूरसंचार विभाग ने इस बाबत केवल मौजूदा 10 डिजिट वाले M2M नंबर्स को ही 1 अक्टूबर 2018 से 13 अंकों में बदलने के लिए कहा है. यहां यह जानना जरूरी है कि M2M यानी मशीन-टू-मशीन नंबर्स केवल मशीनों से संबंधित हैं, इंसानों से नहीं, यानी वे मशीनें जो इंटरनेट से जुड़ी रहती हैं.

टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) कहता है कि मशीन-टू-मशीन (M2M) कम्यूनिकेशन, डाटा कम्यूनिकेशन का एक माध्यम है जिसमें एक या एक से ज्यादा संस्थाएं (entities) शामिल होती हैं, जिन्हें कम्यूनिकेशन के प्रक्रिया के दौरान आवश्यक रूप से मानव हस्तक्षेप या संपर्क की जरूरत नहीं होती. M2M को 3GPP में मशीन टाइप कम्यूनिकेशन के नाम से भी जाना जाता है.

इस बीच BSNL के सीएमडी अनुपम श्रीवास्तव ने स्पष्टीकरण जारी करते हुए बताया, "लोगों के मोबाइल नंबर स्कीम में कोई बदलाव नहीं है. यह केवल M2M के लिए है, केवल तब के लिए जब एक मशीन को दूसरी मशीन से कम्यूनिकेशन की जरूरत होती है."

मशीन-टू-मशीन (M2M) को मशीनों और डिवाइसों (जैसे विमान, जहाज, कनेक्टेड कार या साइकिल आदि) के बीच संपर्क के रूप में परिभाषित किया जा सकता है जो एक-दूसरे से जुड़ी होने के साथ ही इंटरनेट से भी जुड़ी होती हैं. इस तरह की डिवाइसों को इंटरनेट से जोड़ने के लिए M2M SIM Card की जरूरत होती है.

M2M का इस्तेमाल ज्यादातर ऐसे स्थानों पर किया जाता है जहां दूर-दराज के स्थानों से डाटा कलेक्शन की जरूरत होती है. M2M का इस्तेमाल ट्रांसपोर्ट, पॉवर, यूटिलिटीज, लॉजिस्टिक्स, हेल्थ और शिपिंग जैसे सेक्टर्स में होता है और इन सेक्टर्स में देश के आर्थिक विकास को तेज करने की बहुत ताकत है. दूरसंचार विभाग का यह कदम सुरक्षा को कड़ी करने करने के उद्देश्य से उठाया गया है.

गौतलब है कि फिलहाल भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) ने ZTE और Nokia जैसे हार्डवेयर वेंडर्स को निर्देश भेजे हैं, जिनमें 10 की बजाए 13 अंकों के M2M मोबाइल नंबर्स के इस्तेमाल के लिए कहा गया है. इस कंपनियों से आगामी 1 जुलाई 2018 से ऐसे इंफ्रास्ट्रक्चर को तैयार करने के लिए कहा गया है, जो 13 अंकों के M2M नंबर्स इस्तेमाल कर सकें.

बीते 8 जनवरी को हुई एक बैठक में दूरसंचार विभाग ने यह निर्णय लिया था कि भारत में M2M SIM Cards को 13 डिजिट के किए जाने की जरूरत है.

टेलीकॉम-मोबाइल एनालिस्ट संजय बाफना के मुताबिक भारत में M2M कम्यूनिकेशन के लिए 10 की जगह 13 अंकों के मोबाइल नंबर की जरूरत का ग्राहकों के मोबाइल नंबर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा.

First published: 21 February 2018, 14:48 IST
 
अमित कुमार बाजपेयी @amit_bajpai2000

पत्रकारिता में एक दशक से ज्यादा का अनुभव. ऑनलाइन और ऑफलाइन कारोबार, गैज़ेट वर्ल्ड, डिजिटल टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल, एजुकेशन पर पैनी नज़र रखते हैं. ग्रेटर नोएडा में हुई फार्मूला वन रेसिंग को लगातार दो साल कवर किया. एक्सपो मार्ट की शुरुआत से लेकर वहां होने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों-संगोष्ठियों की रिपोर्टिंग.

पिछली कहानी
अगली कहानी