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खोजा गया कीमोथेरेपी का विकल्प, इस गोली से ब्रैस्ट कैंसर के इलाज में मिलेगी सबसे बड़ी सफलता

कैच ब्यूरो | Updated on: 13 June 2019, 12:09 IST

ब्रेस्ट कैंसर दुनियाभर में हर साल कई महिलाओं की जान ले लेता है लेकिन वैज्ञानिक लगातार इससे लड़ने और इसे मात देने के लिए खोज में लगे हुए हैं. अब इस मामले में एक बड़ी सफलता मिली है. एक ऐसी दवा बनाने में सफलता करीब दिखाई दे रही है, जिसके इस्तेमाल के बाद कीमोथेरेपी की जरूरत नहीं पड़ेगी. यानी जल्द अगर यह दवा आखिरी परीक्षण में भी सफल रही तो कैंसर के ज्यादातर मरीज कीमोथेरेपी के साइड इफेक्ट से बच जायेंगे. इस दवा की ताकत यह है कि यह शरीर में सिर्फ कैंसर प्रभावित कोशिकाओं पर हमला करेगी. कीमोथेरेपी में अक्सर दवाएं प्रभावित सेल्स के अलावा व्यक्ति के स्वस्थ सेल्स को भी नुकसान पहुंचा देती हैं.

माना जा रहा है कि इस दवा में कीमोथेरेपी और इसके विघटनकारी दुष्प्रभावों से बचने की क्षमता है, साथ ही यह भविष्य में कैंसर की देखभाल में कारगर साबित होगी. यह अब तक कैंसर के इलाज में सबसे बड़ी सफलता हो सकती है. पिछले कई समय से यह ऐंटिबॉडी ड्रग कॉन्जुगेट (ADCs) विकसित की जा रही हैं. अब लेट-स्टेज परीक्षण में एक एडीसी की सफलता ने नया उत्साह पैदा कर दिया है. माना जा रहा है कि DS-8201 नामक ट्रीटमेंट स्तन कैंसर का सबसे बेहतरीन इलाज है.

ब्लूमबर्ग के अनुसार ADCs को लेकर उत्साह कुछ ऐसा है कि मार्च में ब्रिटिश दवा निर्माता कंपनी AstraZeneca पीएलसी ने जापान की दाईची सैंक्यो कंपनी के साथ संयुक्त रूप से DS-8201 को विकसित करने के लिए 6.9 बिलियन डॉलर का भुगतान करने पर सहमति व्यक्त की. यह एक दशक की सबसे बड़ी डील मानी जा रही है. DS-8201 को सितंबर के अंत तक अमेरिकी अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा. ब्लूमबर्ग इंटेलिजेंस के एक विश्लेषक कैरोलिन स्टीवर्ट ने कहा, "डीएस -8201 सबसे बड़ी कैंसर बायोलॉजिक दवाओं में से एक बन सकती है. एडीसी पर ध्यान केंद्रित करने वाली कई कंपनियां हैं, विशेष रूप से जापान की दाइची ने इसमें एक अनूठी विशेषज्ञता विकसित की है.

विश्लेषकों का कहना है कि DS-8201 उन रोगियों की संख्या को तीन गुना कर सकता है जो स्तन कैंसर के लिए शक्तिशाली उपचार से गुजरते हैं. इसमें सबसे ज्यादा महिलाओं में वह ट्यूमर है जो हर साल 5 लाख से अधिक की जान ले लेता है. इस दवा के विकसित होने पर सामान्य कोशिकाओं को प्रभावित किए बिना कैंसर कोशिकाओं को लक्षित कर कीमोथेरेपी से बचा जा सकेगा.

यह है जादुई गोली

DS-8201 की पूरी क्षमता की पुष्टि करने कके लिए अभी कुछ साल और लग सकते हैं क्योंकि रोगियों की एक विस्तृत श्रृंखला में दवा की प्रभावकारिता को मान्य करने में डेटा की आवश्यकता होगी. लगभग 56 फार्मास्युटिकल कम्पनियां एडीसी का विकास कर रही हैं, जिनमें इम्यूनोगेन इंक और सिएटल जेनेटिक्स इंक शामिल हैं. बोरिस पीकर सहित कोवेन विश्लेषकों ने एक अप्रैल के नोट में लिखा, "एडीसी को कीमो रिप्लेसमेंट के रूप में तैनात किया जा रहा है."

ग्रैंड व्यू रिसर्च की एक रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक ADC बाजार का मूल्य 2017 में 1.57 बिलियन डॉलर था और 2025 से लगभग 10 बिलियन डॉलर तक हर साल 26% बढ़ने का अनुमान है. एडीसी के पीछे की अवधारणा को 1900 में जर्मन नोबेल पुरस्कार विजेता पॉल एर्लिच द्वारा कल्पना की गई थी, जिन्होंने "मैजिक बुलेट" के विचार का गठन किया था. इसमें आसपास की अन्य कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाए बिना एक रोगग्रस्त कोशिका पर हमला किया जा सकता है.

ADCs का वास्तविक उपयोग 2000 में शुरू हुआ था, लेकिन इस क्षेत्र में दिलचस्पी बहुत कम हो गई क्योंकि कई उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाया. दाइची सैंक्यो की दवा ADCs को दूसरे स्तर पर ले जाती है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, प्रत्येक वर्ष लगभग 2.1 मिलियन महिलाओं को स्तन कैंसर का पता चलता है. कुछ 18% मामलों को HER2 नामक प्रोटीन द्वारा संचालित किया जाता है, और उनका पहला इलाज कीमोथेरेपी है.

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First published: 13 June 2019, 12:05 IST
 
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