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दुबई में बना दुनिया का पहला 3D प्रिंटेड ऑफिस

कैच ब्यूरो | Updated on: 25 May 2016, 19:12 IST
(रॉयटर्स)

दुनिया का पहला थ्री-डी प्रिंटेड ऑफिस दुबई में खोला गया है. दुनिया के पहले 3D प्रिंटेड ऑफिस को 'ऑफिस ऑफ द फ्यूचर' नाम दिया गया है. यूएई के उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन राशिद ने इस बिल्डिंग का उद्घाटन किया.

इस आर्क-शेप्ड एक मंजिला ऑफिस को 2700 वर्ग फीट एरिया में बनाया गया है, जिसमें 140,000 अमेरिकी डॉलर की लागत आई है. इस बिल्डिंग को बनाने में कंक्रीट, प्लास्टिक फाइबर और ग्लास फाइबर का इस्तेमाल किया गया है.

17 दिन में तैयार बिल्डिंग

इस ऑफिस का आंतरिक और बाहरी डिजाइन विकसित होने के बाद पूरे मॉडल को बनाने में महज 17 दिन लगे. उसके बाद सिर्फ दो दिन के भीतर ऑफिस को खड़ा कर दिया गया.

ऑफिस को थ्री डी तकनीक से बनाने में सामान्य तरीके के मुकाबले लागत में 50 से 80 प्रतिशत तक की कमी आई. इस तकनीक से लागत के साथ-साथ समय की बचत भी हुई.

यह बिल्डिंग अमीरात टावर्स के कैम्पस में बनाई गई. फिलहाल इसमें दुबई फ्यूचर फाउंडेशन का ऑफिस बनाया गया है. अगले साल इसे दुबई म्यूजियम ऑफ द फ्यूचर में बदल दिया जाएगा.

इस बिल्डिंग के ढांचे का डिजाइन यूएई और ब्रिटेन में  तैयार किया गया, जबकि इसकी मजबूती को चीन और अमेरिका में परखा गया. इस बिल्डिंग को बनाने में 20 फीट ऊंचे, 120 फीट लंबे और 40 फीट चौड़े थ्रीडी प्रिंटर का इस्तेमाल किया गया.

25 प्रतिशत बिल्डिंग बनाने की योजना

यूनाइडेट अरब अमीरात के मंत्री मोहम्मद अली गारगावी के मुताबिक, ' यह दुनिया की पहली थ्री-डी प्रिंटेड बिल्डिंग है, और सिर्फ बिल्डिंग नहीं, पूरी तरीके से काम करने वाला ऑफिस है. हमें विश्वास है कि यह सिर्फ शुरुआत है. दुनिया बदलेगी'.

उन्होंने कहा कि दुबई की योजना 2030 तक अमीरात में 25 प्रतिशत बिल्डिंग थ्री-डी प्रिंटेड तकनीक से बनाने की है. जानकारों का मानना है कि इस तकनीक की मदद से बिल्डिंग बनाने का वक्त 50 से 70 फीसदी तक कम किया जा सकता है, वहीं, निर्माण की लागत को 50 से 80 प्रतिशत तक घटाया जा सकता है.

क्या है 3D तकनीक?

थ्री-डी प्रिंटिंग एक ऐसी तकनीक है जिसका इस्तेमाल तीन डायमेंशनल ऑब्जेक्ट तैयार करने में किया जाता है. इस तकनीक के जरिए किसी भी आकार की ठोस चीज जैसे सुई, खिलौने, हथियार, जूते, हेल्मेट, साइकिल फ्रेम को प्रिंट किया जा सकता है.

थ्री-डी प्रिंटर में प्रिंट किए जाने वाली चीज को तैयार करने के लिए प्रिंटिग मटीरियल को एक के ऊपर एक लेयर के तौर पर रखा जाता है, जिसे कम्प्यूटर के जरिए ऑपरेट किया जाता है. इस प्रक्रिया को तब तक किया जाता है, जब तक प्रोडक्ट थ्री-डायमेंशनल आकार में न बदल जाए.

इस तकनीक के जरिए कोई चीज तैयार करने से पहले उसका डिजिटल या वर्चुअल मॉडल तैयार किया जाता है. डिजिटल मॉडल या वर्चुअल मॉडल सीएडी(कंप्यूटर एडेड डिजाइन) सॉफ्टवेयर की मदद से तैयार किया जाता है.

एक बार वर्चुअल मॉडल तैयार हो जाने के बाद थ्री-डी प्रिंटर के जरिए छपाई शुरू की जाती है. प्रिंटर के इंकजेट हेड्स के जरिए प्रिंटिंग मटीरियल को एक पाउडर बेड पर स्प्रे किया जाता है. कई बार अलग-अलग हिस्सों में प्रिंट करके उसे असेंबल भी किया जाता है.

First published: 25 May 2016, 19:12 IST
 
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