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सिर्फ एक ऐप आपके एंड्रॉयड स्मार्टफोन को बना देगा 'स्पाई टूल'

कैच ब्यूरो | Updated on: 23 December 2017, 17:45 IST

अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के पूर्व एजेंट एडवर्ड स्नोडेन फिलहाल अपने निष्कासन का वक्त रूस में बिता रहे हैं. स्नोडेन ने अब एक ऐसा ऐप रिलीज किया है जो आपके एंड्रॉयड स्मार्टफोन को एक स्पाई टूल या एक सर्विलांस सिस्टम बना देगा. इस ऐप का नाम 'हैवेनः कीप वॉच' रखा गया है और यह फिलहाल बीटा वर्जन में है.

इस एंड्रॉयड एप्लीकेशन का मकसद आपके निजता में हनन के बगैर व्यक्तिगत स्थान और सपंत्ति को सुरक्षा प्रदान करने के तरीके देना है. यह ऐप अनिवार्य रूप से आपके स्मार्टफोन के सभी सेंसर्स (कैमरा, एक्सिलोमीटर, माइक्रोफोन आदि) को स्वीकृति प्रदान करता है, ताकि जैसे ही कोई आपके निजी दायरे में घुसपैठ करता है, आपको पता चल जाए या आप नजर रख पाएं. यह निजी दायरा कुछ भी हो सकता है, यानी आपका बेड रूम, होटल रूम, आपकी अलमारी, कार, दफ्तर, मेज की ड्रॉर आदि.

यह ऐप 'एविल मेड' जैसे हमलों से बचाने के लिए डिजाइन किया गया है, जो उन कंप्यूटर्स को निशाना बनाता है जिनपर कोई काम नहीं कर रहा होता. इसमें होटल का कमरा, दफ्तर या फिर आपका बेडरूम भी हो सकता है. हो सकता है कि यह 'एविल मेड' आपके कंप्यूटर को स्पाईवेयर से संक्रमित कर दे, आपकी फाइलों को खंगाले या फिर ऐसा ही कुछ और करे.

यह ऐप जाहिरी तौर पर खोजी पत्रकारों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं समेत ऐसे ही लोगों को एक नए तरह की ताकत देता है, ताकि वे अपनी निजता बरकरार रखते हुए सुरक्षित रह सकें.

इस ऐप के जरिये कैमरों का इस्तेमाल गतिविधि को भांपने, तस्वीरों-वीडियो को रिकॉर्ड करने में किया जा सकता है. इस सभी चीजों को सीधे उस डिवाइस पर भेज दिया जाता है, जिसमें आप इन्हें सहेजना चाहते हैं. माइक का इस्तेमाल अचानक आने वाली आवाजों को भांपने के लिए क्या जा सकता है और इसके चलते ही ऐप जैसे ही कोई आवाज भांपता है तो उस आवाज के स्रोत का पता लगाने के लिए तुरंत कैमरा चालू कर देता है ताकि उसकी रिकॉर्डिंग की जा सके.

एंबिएंट लाइट सेंसर के साथ भी यही लागू होता है जो रोशनी खुलने-बंद होने या फिर फोन के पास से गुजरती फ्लैशलाइट के स्रोत को भी रिकॉर्ड करने के लिए तुरंत कैमरा शुरू कर देता है. यहां तक की एक्सिलोमीटर के उद्देश्य को भी बदला जा सकता है कि यह वाइब्रेशन सेंसर के तौर पर काम करे और जैसे ही थोड़ा सा कंपन हो, यह ऊपर लिखा काम शुरू कर दे. वास्तव में किसी भी चीज को ट्रिगर (कैमरा-माइक को शुरू करने का संकेत देने वाला माध्यम) के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है.

यहां तक की कुछ फोनों में पाए जाने वाले एयर प्रेशर सेंसर को भी ट्रिगर बनाया जा सकता है. फोन की पॉवर ऑन या ऑफ किए जाने पर भी यह ट्रिगर बनाया जा सकता है.

नेस्ट कैम जैसे रेगुलर सिक्योरिटी कैमरा से अलग ऐसा लगता है कि हैवेन सीधे आपकी चुनी गई डिवाइस से संपर्क साधता है. यह सिग्नल (एक सुरक्षित मैसेजिंग सेवा) और टॉर (इंटरनेट का एक सुरक्षित माध्यम) का इस्तेमाल आपकी चुनी गई डिवाइस पर सिक्योर डाटा भेजने के लिए करता है. अगर आप चाहें तो व्हॉट्सऐप और गूगल ड्राइव पर भी इसे स्टोर कर सकते हैं.

इस ऐप के जरिये डिवाइस उन सभी इवेंट्स (किए गए इस्तेमाल की सूचना) के लॉग भी जुटाता है. यह पूरा प्रोजेक्ट गिटहब पर उपलब्ध है और यह ओपन-सोर्स है. कोई भी इन कोड का परीक्षण कर सकता है और अपनी पसंद के हिसाब से मॉडिफाई कर सकता है.

यह ऐप द गार्डियन प्रोजेक्ट और फ्रीडम ऑफ द प्रेस फाउंडेशन के गठजोड़ का नतीजा है. द गार्डियन प्रोजेक्ट का मकसद सुरक्षित ऐप्स, सेवाएं और डिवाइसों का निर्माण करना है ताकि सुरक्षित कम्यूनिकेशन किया जा सके. वहीं, फ्रीडम ऑफ द प्रेस फाउंडेशन के अध्यक्ष एडवर्ड स्नोडेन हैं और यह 'विरोधात्मक पत्रकारिता' का बचाव और सुरक्षा कर रहे हैं.

शुरुआती रिपोर्ट्स बताती हैं कि यह ऐप बहुत अजीब सी रिपोर्टिंग के साथ बेहद संवेदनशील है और जैसे ही फोन को चलते हुए पंखे के बीच एक पीसी के ऊपर रख दिया जाता है यह सैकड़ों अलर्ट्स शुरू कर देता है. स्पष्ट रूप से इसके कई कारण है कि यह ऐप अभी तक क्यों बीटा वर्जन में ही है.

यह ऐप फिलहाल गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है और इसे डाउनलोड-इंस्टॉल किया जा सकता है.

First published: 23 December 2017, 17:45 IST
 
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