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इरेक्टाइल डिसफंक्शनः बहुत जल्द मिल सकती है वियाग्रा से छुट्टी

असद अली | Updated on: 10 February 2017, 1:51 IST

इरेक्टाइल डिसफंक्शन (ईडी) से जूझ रहे पुरुषों के लिए नई खुशखबरी है. वैज्ञानिकों की मानें तो एक नई तकनीकी से ईडी से परेशान पुरुषों को इससे हमेशा के लिए छुटकारा मिल सकता है.

वैज्ञानिकों के अनुसार एक्स्ट्रा-कारपोरल शॉक वेव थिरैपी(ईएसडब्ल्यूटी) से ईडी से पीड़ित पुरुषों को वियाग्रा लेने की जरूरत खत्म हो सकती है.

इसराइल के वैज्ञानिकों ने एक्स्ट्रा-कारपोरल शॉक वेव थिरैपी(ईएसडब्ल्यूटी) से जुड़े अपने ताजा शोध का परिणाम न्यू साइंटिस्ट जर्नल में प्रकाशित कराया है.

शोध से जुड़े इलैन ग्रुएनवाल्ड के अनुसार इस तकनीकी से पुरुषों के लिंग में नई रक्त कोशिकाओं का निर्माण किया जा सकता है. जिससे लिंग में रक्त संचार बढ़ जाता है. इस प्रक्रिया में चूंकि नई रक्त कोशिकाओं का ही निर्माण होता है इसलिए ये ईडी के लिए वियाग्रा से ज्यादा बेहतर इलाज है.

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यूरोपियन सोसाइटी फॉर सेक्सुअल मेडिसीन की फरवरी में स्पेन के मैड्रिड में हुई बैठक में ईएसडब्ल्यूटी से जुड़े कई प्रयोगों के अध्ययन प्रस्तुत किए गए. जिनके अनुसार ईएसडब्ल्यूटी ईडी या नपुंसकता के इलाज का स्थायी इलाज हो सकता है.

इससे पहले तक ईडी से जूझ रहे पुरुषों के लिए एक मात्र समाधान वियाग्रा ही थी. अमेरिकी कंपनी फाइज़र वियाग्रा बनाती है. वियाग्रा वैसे तो कारगर है लेकिन इसके साइट-इफेक्ट की भी शिकायतें आती रही हैं. 

वियाग्रा के साइड-इफेक्ट की शिकायतें आती रही हैं लेकिन नई तकनीकी से इरेक्टाइल डिसफंक्शन से मिल सकता है स्थायी छुटकारा

वियाग्रा लेने से चक्कर आने, सिर दर्द, पीठ में दर्द, नाक जाम और नजर का धुंधले होने जैसे दुष्प्रभाव हो सकते हैं. वियाग्रा से जुड़ी इन आशंकाओं के चलते ही इसके विकल्प की तलाश की जाती रही है.

इसराइली वैज्ञानिकों ने साल 2013 में ईएसडब्ल्यूटी के प्रयोग के लिए 20 ऐसे मर्दों को चुना जो कम से कम तीन साल से ईडी से पीड़ित थे. इन सभी पुरुषों को छह महीने तक ईएसडब्ल्यूटी कराने के बाद लाभ हुआ और स्वाभाविक रूप से सेक्स करने में सक्षम हो गए.

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साल 2014 में डेनमार्क के वैज्ञानिकों ने भी ईएसडब्ल्यूटी से जुड़ा सफल प्रयोग किया. जिसके बाद प्रयोग में शामिल 28 प्रतिशत पुरुष बगैर किसी दवा के स्वाभाविक रूप से सेक्स करने में सक्षम हो गए.

सवाल ये है कि ईएसडब्ल्यूटी आम लोगों के लिए कब से उपलब्ध होगा?

अमेरिका की जॉन हॉपकिंस युनिवर्सिटी के प्रोफेसर ट्रिनिटी विवालैक के अनुसार इसमें अभी वक्त लगेगा. प्रोफेसर ट्रिनिटी कहते हैं कि जब तक इसका मानकीकरण नही हो जाता मैं इसे अपने मरीजों को नहीं दूंगा. वहीं कुछ फ्रांसीसी वैज्ञानिक इस ईएसडब्ल्यूटी का चूहों पर प्रयोग कर रहे हैं.

इस तकनीकी के आम लोगों के लिए उपलब्ध होने में देरी की बात सुनकर आप निराश हो रहें हों तो याद रखें, सब्र का फल मीठा होता है.

First published: 21 February 2016, 10:15 IST
 
असद अली

संवाददाता, कैच न्यूज़

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