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आईआईटी के 5 इनोवेशन जिनसे बदलेगी आम जिंदगी

विशाख उन्नीकृष्णन | Updated on: 25 April 2016, 12:23 IST

देश के तकनीकी संस्थानों में कितनी प्रतिभाएं छिपी हुईं हैं और इनके इस्तेमाल से हम सभी की जिंदगी में क्या फायदे हो सकते हैं इसका नजारा शनिवार 23 अप्रैल को देखने को मिला. जब इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) दिल्ली ने अपने ओपेन हाउस का 12वां संस्करण आयोजित किया. 

इस दौरान संस्थान के छात्रों द्वारा उनकी रचनात्मकता और तकनीकी समझ को प्रस्तुत करतीं तमाम डिवाइसें प्रस्तुत की गईं. संस्थान के छात्रों द्वारा इस मौके पर 500 शोधपत्रों के साथ ही 80 से ज्यादा डेमो प्रोजेक्ट प्रदर्शित किए गए. जिनमें से कैच को सबसे ज्यादा आकर्षित करने वाले पांच प्रोजेक्ट्स को हम आपसे रूबरू कराने जा रहे हैं.

1. मास्किटो ट्रैप

यह एक सिलेंडर ग्लास बॉटम के ऊपर फिट कोनिकल ग्लास टॉप है. जिसे चलाने के लिए बिजली की जरूरत नहीं होती. यह केवल केले के छिलके से काम करता है. क्योंकि मच्छर ऑक्टेनॉल की ओर आकर्षित होते हैं और केलों में यह भारी मात्रा में पाया जाता है, इसलिए केले के छिलकों के इस्तेमाल से मच्छर इसकी ओर आकर्षित होते हैं और इसके जाल में फंस जाते हैं. 

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अगर आपके पास केले के छिलके नहीं हैं तो भी परेशान होने की जरूरत नहीं आप चीनी और यीस्ट के मिश्रण का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. इस मिश्रण से बनने वाली कार्बन डाई ऑक्साइड इंसानी सांस से निकलने वाली CO2 का आभास दिलाती है. अपने सहपाठी अभिरूप सतीश के साथ मिलकर इसे बनाने वाले प्रथम वर्ष के छात्र सागर दास ने कहा कि यह डिवाइस कैंपस में छात्रों के बीच पहले ही काफी मशहूर हो चुकी है.

2. पैडल पंप

रूरल टेक्नोलॉजी एक्शन ग्रुप के प्रो. वीके विजय और प्रो. राजेंद्र प्रसाद द्वारा यह मैकेनिकल साइकिल या पैडल पंप बनाया गया है. इसकी खासियत है कि यह सामान्य पंप की तुलना में बेहद कम मेहनत से दोगुनी रफ्तार से पानी निकालता है. इस पंप से जुड़े पैडलों को साइकिल की तरह चलाने पर यह काम करने लगता है. 

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हैंड पंप से अलग यह आसानी से ज्यादा पानी निकालने के लिए दो प्रॉपेलिंग पंपों का इस्तेमाल करता है. ग्रुप के सदस्य देविंदर पाल सिंह ने बताया कि वे इसे सोलर पावर से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं ताकि शारीरिक श्रम की भी जरूरत न पड़े. 

3. पेपरलेस अटेंडेंस सिस्टम

आईआईटी में फोर्थ ईयर के छात्र धनंजय गोयल और अनमोल गुप्ता ने एक अनोखा अटेंडेंट सिस्टम (हाजिरी सिस्टम) डिजाइन किया है, जिसमें न तो फिंगरप्रिंट की जरूरत पड़ती है और न ही कार्ड रीडर्स या पंचिंग कार्ड की. यह एक ऐप है जो कर्मचारी के मोबाइल में इंस्टॉल होने पर जैसे ही वो कार्यालय में पहुंचता है उसको भांप लेता है. 

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काफी कम ऊर्जा वाले ब्लूटूथ का इस्तेमाल करने वाला यह ऐप स्वतः ही कर्मचारी के आने-जाने के समय को नोट करने के साथ ही एक वक्त में 1000 लोगों की हाजिरी लगा सकता है. गोयल के मुताबिक व्यावसायिक रूप से उपलब्ध होने के बाद इसकी कीमत 1,500 रुपये से ज्यादा नहीं होगी. 

4. बस बडी

संबंधित स्टेशन पर पहुंचते ही बस या मेट्रो ट्रेन में फिट एक छोटी सी चिप स्मार्टफोन में इंस्टॉल ऐप को अलर्ट कर देगी. इसके जरिये नेत्रहीनों को अपनी बस-ट्रेन पकड़ना आसान हो जाएगा. 

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जब मेट्रो ट्रेन या बस स्मार्टफोन यूजर के पास पहुंचेगी तो यह आवाज भी करेगा ताकि यूजर जान जाए. इस ऐप के डेवलपमेंट से जुड़े साकेत मेहता कहते हैं कि यह ऐप किसी भी ट्रैवल ऐप की तुलना में काफी कम बैटरी की खपत करता है.

5. बायोगैस फ्यूल फॉर कार

आईआईटी के शोधकर्ताओं के एक समूह ने एक ऐसी तकनीकी का पेटेंट कराया है जो बायोगैस से मीथेन निकालने के साथ ही हाइड्रोजन सल्फाइड और कार्बन डाई ऑक्साइड जैसी अशुद्धियों को मिटा देती है. 

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इस शुद्ध मीथेन को सीएनजी सिलेंडर की ही तरह कारों में फिट सिलेंडर में भर दिया जाता है. कारों को इंजन में बिना किसी तरह के बदलाव किए ही इन फ्यूल के लिए स्विच किया जा सकता है. अच्छी बात यह है कि यह फ्यूल सीएनजी और पेट्रोल की तुलना में काफी कम हानिकारक उत्सर्जन करता है. इस डिजाइन टीम के सदस्य वंदित विजय के मुताबिक बायोगैस से चलने वाले वाहनों के लिए हमें पहले ही सड़क परिवहन मंत्रालय से अनुमति मिल चुकी है.

First published: 25 April 2016, 12:23 IST
 
विशाख उन्नीकृष्णन @sparksofvishdom

A graduate of the Asian College of Journalism, Vishakh tracks stories on public policy, environment and culture. Previously at Mint, he enjoys bringing in a touch of humour to the darkest of times and hardest of stories. One word self-description: Quipster

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