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गंगोत्री नेशनल पार्क में मिली उड़ने वाली गिलहरी, 70 साल पहले घोषित हो चुकी है विलुप्त

कैच ब्यूरो | Updated on: 17 August 2020, 12:12 IST

उत्तराखंड के उत्तरकाशी में गंगोत्री नेशनल पार्क में एक दुर्लभ गिलहरी (Woolly flying squirrel) पायी गई है. माना जा रहा है कि इस गिलहरी की प्रजाति आज से 70 साल पहले विलुप्त हो गई थी. इस गिलहटी की खास पहचान यह है कि यह अपने पंजे के फर को पैराशूट के रूप में इस्तेमाल कर सकती है. यह उड़ने वाली दुर्लभ गिलहरी है. राज्य के वन अनुसंधान केंद्र के सर्वेक्षण ने उसे 13 फॉरेस्ट डिवीजनों में 18 जगहों पर देखा है. इस वूली गिलहरी को 70 साल पहले IUCN रेड लिस्ट में विलुप्त माना गया था. देहरादून वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट के साइटिंस्ट ने भागीरथ घाटी में इसके होने की बात कही है और इसके कई दुर्लभ फोटो भी मिले हैं.

 

एक रिपोर्ट के अनुसार यह गिलहरी ओक, देवदार और शीशम के पेड़ों पर अपने घोंसले बनाती हैं. ये गिलहरियां भूरे रंग की होती हैं. कोटद्वार के लैंसडोन में 3 से 50 सेंटीमीटर लंबी उड़न गिलहरी भी देखी गई थी. इस गिलहरी के गले पर धारी मौजूद होती है. इन इलाकों में पहले ये गिलहरियां बड़ी संख्या में पायी जाती थी लेकिन कटते जंगल और ग्लोबल वार्मिंग के चलते इनकी संख्या कम होने लगी है. अब इसे वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट के शेड्यूल-2 में दर्ज किया गया है.


गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान भारत में उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में एक राष्ट्रीय उद्यान है, जो लगभग 2,390 किमी 2 (920 वर्ग मील) को कवर करता है.यहां शंकुधारी वन, अल्पाइन घास के मैदान और ग्लेशियर हैं. वनस्पति में यहां चिरपाइन देवदार, देवदार, स्प्रूस, ओक और रोडोडेंड्रोन शामिल हैं. गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान में हिम तेंदुए भी पाए जाते हैं. आज तक पार्क में 15 स्तनपायी प्रजातियों और 150 पक्षियों की प्रजातियों का पता चला है. गोमुख ग्लेशियर गंगा नदी का उद्गम स्थल पार्क के अंदर स्थित है. गंगोत्री, जिसके बाद पार्क का नामकरण किया गया है, हिंदुओं के पवित्र मंदिरों में से एक है.

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First published: 17 August 2020, 11:57 IST
 
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