Home » साइंस-टेक » Google removed over 700,000 bad apps & 100,000 developers from Play Store in 2017
 

देख लें कि कहीं Google ने आपके पसंदीदा ऐप को Play Store से हटा तो नहीं दिया?

कैच ब्यूरो | Updated on: 31 January 2018, 17:35 IST

दुनिया की दिग्गज तकनीकी कंपनी Google ने मंगलवार को घोषणा की कि उसने अपने प्लेटफॉर्म पर मौजूद लाखों बेकार (बुरे) ऐप्स और उनके डेवलपर्स को हटा दिया. कंपनी ने यह कदम बुरे ऐप्स के खिलाफ की गई कार्रवाई केे तहत बीते साल यानी 2017 में उठाया.

Google ने दावा किया कि उसने मशीन लर्निंग का इस्तेमाल बुरे ऐप्स को पहचानने के लिए किया, जिसके लिए कंपनी ने मिलते-जुलते, एक जैसे, भद्दे कंटेंट और मैलवेयर आदि वाले 7 लाख से ज्यादा ऐप्स और एक लाख से ज्यादा डेवलपर्स को हटा दिया. 2016 की तुलना में कंपनी ने 70 फीसदी ज्यादा ऐप्स पर कार्रवाई की.

एंड्रॉयड डेवलपर्स ब्लॉग में किए गए दावे के मुताबिक, "वास्तव में, किसी यूजर द्वारा इंस्टॉल किए जाने से पहले ही अपमानजनक सामग्री वाले 99 फीसदी ऐप्स की पहचान कर इन्हें रिटेक्ट कर दिया गया."

 

आपको बता दें कि अपने एंड्रॉयड डेवलपर्स ब्लॉग में Google ने Impersonation या 'copy cats' को Goole Play Store में सबसे आम खतरनाक ऐप्स माना है. सीधे शब्दों में कहें तो किसी ऐप द्वारा मशहूर ऐप की नकल मार कर उससे बिल्कुल मिलता-जुलता दूसरा ऐप बनाना, खतरे का निशान है. केवल 2017 में ही कंपनी ने बड़े शीर्षकों वाले ऐप्स की नकल करते ढाई लाख से ज्यादा ऐप्स को हटा दिया था.

इसके अलावा Google इस पब्लिक प्लेटफॉर्म को आम जनता के लिए सुरक्षित बनाए रखने के लिए किसी भी तरह की अनुचित सामग्री को भी डालने की अनुमति नहीं देता. कंपनी के मुताबिक अनुचित सामग्री का मतलब पोर्नोग्राफी, अत्यधिक हिंसा, आपराधिक गतिविधियां और ईर्ष्या से है.

Google का दावा है कि इसके अत्याधुनिक मशीन लर्निंग मॉडल्स, ऐप सबमिशंस पर नजर बनाए रखते हैं और गलत सामग्री पाए जाने पर उन्हें तुरंत अनुचित का तमगा थमा देते हैं. इसके बाद टीम के समीक्षकों की भूमिका शुरू होती है.

 

इसके साथ ही Google की प्राथमिकता में मैलवेयर (Malware) वाले ऐप्स को लाल झंडी दिखाकर प्ले स्टोर से दूर रखने का है. किसी भी ऐप में संभावित हानिकारक एप्लीकेशंस (पीएचए) की मौजूदगी का मतलब है कि वो डिवाइस को नुकसान पहुंचा सकती है. इस तरह के ऐप्स फिशिंग, फ्रॉड, ट्रोजंस आदि से भरे होते हैं, जो यूजर के डाटा-डिवाइस दोनों के लिए ही खतरा हैं.

इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए Google ने अपने I/O 2017 के दौरान Google Play Protect प्रोग्राम लॉन्च किया था जो मैलवेयर स्कैनिंग फीचर से लैस हैै.

First published: 31 January 2018, 17:35 IST
 
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