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सरकार चाहती है कि लून प्रोजेक्ट के लिए टेलीकॉम ऑपरेटर चुने गूगल

कैच ब्यूरो | Updated on: 29 February 2016, 16:22 IST

केंद्र सरकार ने दिग्गज आईटी कंपनी गूगल से कहा है कि वो देश में अपने महात्वाकांक्षी लून प्रोजेक्ट के लिए किसी टेलीकॉम ऑपरेटर का चयन करे. 

पीटीआई को दी जानकारी में एक आधिकारिक सूत्र ने कहा, "गूगल लून प्रोजेक्ट का परीक्षण एक महंगे और कम स्पेक्ट्रम बैंड में करना चाहता है. कंपनी से कहा गया है कि वो अपनी आवश्यकताओं पर खरी उतरने वाले किसी टेलीकॉम ऑपरेटर के साथ पार्टनरशिप करके लून प्रोजेक्ट के लिए सरकार तक पहुंचे."

अधिकारी ने यह भी कहा कि अगर गूगल इसका परीक्षण बीएसएनएल के साथ करना चाहता है तो यह इसके साथ जुड़कर स्पेक्ट्रम में साझेदारी कर सकता है. उन्होंने यह भी कहा, "इससे गूगल द्वारा सुरक्षा के साथ स्पेक्ट्रम बैंड की मांग कुछ हद तक सुलझनी चाहिए." इस संबंध में सरकार द्वारा गूगल को भेजी गई ईमेल का अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है.

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टेलीकॉम मंत्रालय ने आईटी सचिव के अंतर्गत एक समिति गठित कर बीएसएनएल से इस परीक्षण में जरूरी सहायता देने के लिए कहा है. इस संबंध में अक्तूबर-नवंबर में बैठक भी की गई थी. हालांकि इस परियोजना को तब झटका लगा था जब गूगल ने इसका परीक्षण 700-800 मेगाहर्ट्ज पर करने के लिए कहा. क्योंकि बीएसएनएल के पास 2500 मेगाहर्ट्ज बैंड का स्पेक्ट्रम है.

सबसे महंगा स्पेक्ट्रम बैंड

दरअसल टेलीकॉम सेवाओं के लिए सबसे ज्यादा प्रभावी और महंगा बैंड 700 मेगाहर्ट्ज है और यह अभी तक किसी सर्विस प्रोवाइड को नहीं दिया गया है. ट्राई ने सुझाव दिया था कि आने वाली नीलामी में इस स्पेट्रम की बोली 11,485 करोड़ रुपये प्रति मेगाहर्ट्ज लगाई जाए और बोली लगाने वाली कंपनी को न्यूनतम पांच मेगाहर्ट्ज खरीदने की बाध्यता हो.

गूगल लून प्रोजेक्ट

इस परियोजना के अंतर्गत गूगल पृथ्वी की सतह के 20 किलोमीटर ऊपर विशालकाय गुब्बारे छोड़कर इंटरनेट सेवाएं प्रदान करेगा. गूगल इस तकनीकी का न्यूजीलैंड, कैलीफोर्निया और ब्राजील में पहले ही परीक्षण कर चुका है. 

गूगल के मुताबिक एक गुब्बारा जमीन पर 40 किलोमीटर क्षेत्रफल में 4जी या एलटीई जैसी सेवा प्रदान कर सकता है. इस गुब्बारे को ऊर्जा देने के लिए गूगल सोलर पैनल और हवा संवेदी तकनीकी का इस्तेमाल कर रहा है.

First published: 29 February 2016, 16:22 IST
 
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