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अब ट्रैफिक सिग्नल की रेड लाइट पर नहीं लगाने पड़ेंगे ब्रेक

कैच ब्यूरो | Updated on: 22 October 2016, 17:47 IST
(विकी)

अक्सर सभी के साथ होता है कि जैसे ही ड्राइव करते वक्त चौराहे के पास पहुंचते हैं, लाल बत्ती हो जाती है और चालक को झुंझलाते हुए रुकना पड़ता है. लेकिन आने वाले वक्त में कार के डैशबोर्ड पर लगा हुआ गैजेट्स इस परेशानी से निजात दिला देगा और आपको चौराहों की लाल बत्ती पर ब्रेक मारकर इसके हरे होने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा.

ग्रीन लाइन ऑप्टिमल स्पीड एडवायजरी नाम के इस सिस्टम का फिलहाल ब्रिटेन में ऑटोड्राइव ट्रायल चल रहा है. यह तकनीक आगे रास्ते पर लगी लाल बत्तियों के चालू और बंद होने के समय के हिसाब से गुणा-भाग करके ड्राइवर को बताती है कि कितनी स्पीड से कार चलाएं कि जब तक चौराहे पर पहुंचे तो हरी बत्ती मिले.

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इसके साथ ही इस सिस्टम से लैस कारों के ड्राइवर को यह भी जानकारी मिल जाती है कि कितनी देर तक लाल बत्ती रहेगी और अगर मजबूरन रुकना पड़ जाए तो कितना वक्त लग सकता है.

उम्मीद जताई जा रही है कि फिलहाल फोर्ड कंपनी द्वारा ट्रायल की जा रही इस तकनीक के इस्तेमाल से कार चालकों के एक वर्ष में दो दिन की बचत हो जाएगी क्योंकि एक साल में कार चालक लाल बत्ती पर इंतजार करते हुए करीब दो दिन खपा देते हैं.

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फोर्ड के प्रवक्ता ने बताया, "300 से लेकर 500 मीटर की दूरी से ही कार का यह सिस्टम ट्रैफिक लाइट से कम्यूनिकेशन सिग्नल लेकर इसका स्टेटस बता देगा."

उदाहरण के तौर पर अगर एक ड्राइवर 50 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से अपनी कार चला रहा है तो यह सिस्टम ड्राइवर को बता देगा कि अगर इसी रफ्तार से कार चलती रही तो आगे लाल बत्ती पर रुकना पड़ेगा और इतना वक्त लगेगा.

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लेकिन इसके साथ ही यह सिस्टम ड्राइवर को यह भी सलाह देगा कि अगर कार की रफ्तार 30 से 35 किलोमीटर प्रतिघंटा कर दी जाए तो ट्रैफिक लाइट पर पहुंचने तक वो ग्रीन हो जाएगी और बिना रुके चौराहा पार हो सकेगा.

इसके साथ ही जरूरत पड़ने पर सिस्टम यह भी सलाह देता है कि आगे लाल बत्ती होने वाली है तो थोड़ी रफ्तार बढ़ाने से उसे पार किया जा सकता है. इस सिस्टम का सीधा सा मतलब हो गया कि अगर ड्राइवर ने इसकी बात मानी तो वे अपनी यात्रा बिना लाल बत्ती पर रुके पूरी कर सकेंगे.

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इसके कई फायदे होंगे. एक तो गाड़ी के इंजन की लाइफ बढ़ेगी. ड्राइवर का तनाव कम होगा. चौराहों पर प्रदूषण कम होगा. कार का माइलेज बढ़ेगा. गाड़ी चलाने के खर्च में कमी आएगी. रोड रेज की घटनाओं में कमी आएगी. वाहन चालक नियंत्रित रफ्तार में वाहन चलाएंगे. चौराहों पर ट्रैफिक पुलिस को ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी. 

इतना ही नहीं कंपनी इस तकनीकी पर भी काम कर रही है कि वो कारों को भी आपस में कनेक्ट कर दे ताकि अगर किसी अंधे मोड़ पर किसी कार ने अचानक ब्रेक लगा दिए हैं तो पीछे आने वाली कारों को 500 मीटर पहले ही पता चल जाए कि आगे कुछ रुकावट हो गई है. 

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इस दौरान पीछे तेजी से आने वाला ड्राइवर दूरी और वक्त रहते ही रफ्तार पर नियंत्रण कर ले. फोर्ड अपनी कनेक्टेड और ऑटोनॉमस टेक्नोलॉजी को जगुआर लैंड रोवर और टाटा के साथ मिलकर बना रही है. 

First published: 22 October 2016, 17:47 IST
 
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