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कोरोना वायरस के मरीजों की जान बचाता है इस दुर्लभ केकड़े का खून, एक लीटर की कीमत है लाखों रुपये

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 July 2020, 19:32 IST

चीन के वुहान शहर से फैले कोरोना वायरस से अभी तक पूरे विश्व में 1 करोड़ 23 लाख से अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं जबकि 5 लाख 55 हजार से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. इस वायरस की अभी तक कोई वैक्सीन नहीं बनी है. हालांकि, लगातार वैज्ञानिक इसमें लगे हुए हैं. कोरोना वायरस की वैक्सीन के लिए चूहों और बंदरों पर टेस्ट हो रहे है. कुछ वैक्सीन का ट्रायल इंसानों पर भी हो रहा है. लेकिन सफलता किसी के हाथ नहीं लगी है. वहीं अब खबर है कि कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में एक खास तरह के केकड़ों का इस्तेमाल किया जाएगा. हॉर्स शू क्रैब नामक केकड़ों की इन प्रजाति का इस्तेमाल पहले से ही मेडिकल साइंस में होता आ रहा है.

हॉर्स शू क्रैब के खून का इस्तेमाल फार्म कंपनियां काफी पहले से करती आई हैं. इसके खून का इस्तेमाल करके यह जाना जाता है कि क्या अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाले मेडिकल उपकरण बैक्टीरिया-फ्री हैं या नहीं.


हॉर्स शू क्रैब की रचना हेलमेट के जैसी होती है और यह समुद्री की रेतीली खोहों में रहता है. हॉर्स शू क्रैब के बारे में माना जाता है कि वो धरती पर सबसे पुराने जीवों में से एक हैं. साल 2019 में एक स्टडी में सामने आया कि यह केकड़े 30 करोड़ सालों से भी ज्यादा समय से पृथ्वी पर हैं और इसी कारण इसको लिविंग फॉसिल्स की श्रेणी में रखा जाता है.

हॉर्स शू क्रैब का खून दूधिया नीला होता है. दरअसल, हॉर्स शू क्रैब में तांबे के साथ hemocyanin नामक केमिकल होता है जो हीमोग्लोबिन की तरह काम करता है और इसी कारण इसका खून लाल नहीं होता. हॉर्स शू क्रैब के खून में एक खास तत्व पाया जाता है, जिसे लिमुलुस अमेबोसाइट लाईसेट कहते हैं और ये आसानी से एंडोटॉक्सिन को पहचान लेता है.

मेडिकल रिसर्चर फ्रेड बैंग ने 1956 में हॉर्स शू केकड़ों में एक खासियत का पता लगाया था. अपनी रिसर्च के दौरान उन्होंने पाया कि जब इस केकड़े का खून एंडोटॉक्सिन के संपर्क में आता है तो अमीबोसाइट्स नाम वाले सेल्स में थक्का जाम जाता है और वे ठोस रूप ले लेते हैं.

किसी बैक्टीरिया के खत्म होने पर उसके शरीर से एंडोटॉक्सिन नामक पदार्थ निकलता है. एंडोटॉक्सिन काफी खतरनाक होते हैं और असप्ताल में सर्जरी के दौरान इनकी काफी छोटी मात्रा भी किसी किसी उपकरण पर रह जाए तो यह मरीज के शरीर में संक्रमण कर सकती है जिसके कारण उसकी मौत हो सकती है.

एंडोटॉक्सिन वो पदार्थ है जो किसी बैक्टीरिया के खत्म होने पर उसके शरीर से रिलीज होता है. सारे ही एंडोटॉक्सिन इतने खतरनाक होते हैं कि अगर अस्पताल में सर्जरी के किसी उपकरण या इंजेक्शन पर भी इसकी सूक्ष्म मात्रा भी रह जाए तो मरीज की जान जा सकती है. इस केकड़े का खून इसी एंडोटॉक्सिन को पहचान लेता है.

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First published: 10 July 2020, 19:12 IST
 
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