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भारतीय वैज्ञानिकों ने बनाई डेंगू की पहली दवाई, दुनिया भर के लोगों को मिलेगी निजात

कैच ब्यूरो | Updated on: 17 April 2018, 19:33 IST

दुनिया में पहली बार भारतीय वैज्ञानिकों ने डेंगू के इलाज के लिए दवाई विकसित कर ली है. दवा की डोज सात दिनों के लिए तय किया गया है और दिन में दो बार एक-एक टैबलेट लेनी होगी. ऐसा बताया जा रहा है कि ये दवा बहुत सस्ती होगी. हर साल डेंगू के प्रकोप से देश के कई हिस्सों में हजारों लोग प्रभावित होतें है और सही इलाज नहीं मिल पाने की वजह से कई लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है.

शुरुआत में डेंगू के दौरान सामान्‍य बुखार लगता है लेक‍िन सही इलाज नहीं मिल पाने के कारण मरीजों में प्लैटलैट्स की कमी हो जाती है और मरीजों की मौत भी हो जाती है. वर्तमान समय तक पूरी दुनिया में कहीं भी डेंगू का सटीक इलाज संभव नहीं है, क्योंकि अभी तक इसकी दवाई विकसित नहीं हो पायी थी.

अब भारतीय वैज्ञानिकों ने एक आयुर्वेदिक दवाई विकसित की है. अच्छी बात ये है कि इस दवा की मरीजों पर की गई पायलट स्टडी भी सफल रही है. बताया जा रहा है कि यह दवा 100 फीसदी आयुर्वेदिक है और इसे 7 तरह के औषधीय पौधों से तैयार किया गया है. इस दवा को साल 2019 तक डेंगू के मरीज़ों के लिए बाजार में उतारा जाएगा.

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खबरों के मुताबिक, दवा को बाजार में उतारने से पहले ग्लोबल स्टैंडर्ड के अंतर्गत बड़े स्तर पर क्लीनिकल ट्रॉयल किए जा रहे हैं. सबसे पहले इस दवा का चूहों और खरगोशों पर टेस्ट किया गया था, जिसके बाद पायलट स्टडी के तौर पर गुड़गांव के मेदांता अस्पताल, कर्नाटक के बेलगाम और कोलार मेडिकल कॉलेज में भर्ती डेंगू के 30-30 मरीजों को यह दवा दी गई.

परीक्षण में सामने आया कि दवा देने के बाद मरीज के ब्लड में प्लेटलेट्स की मात्रा जरुरत के अनुसार बढ़ती गई और सबसे अच्छी बात रही कि किसी भी मरीज पर किसी तरह का कोई साइड इफेक्ट्स देखने को नहीं मिला.  

इस बारे में सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन आयुर्वेदिक साइंस (CCRAS) के महानिदेशक प्रोफेसर वैद्य के एस धीमान ने कहा, ”दुनिया में पहली बार डेंगू बीमारी की  इलाज के लिए दवा विकसित की गई है. दवा तैयार करने में सीसीआरएएस के एक दर्जन से अधिक वैद्यों को 2 साल से ज्यादा का समय लगा है.

सबसे बड़ी बात है पायलट स्टडी में इस दवा के कोई साइड इफेक्ट्स सामने नहीं आए हैं. अगले साल सितंबर तक क्लीनिकल ट्रायल पूरे हो जाएंगे, इसके बाद तय प्रोसिजर के तहत उस कंपनी को टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की जाएगी, जो दवा को तैयार कर बाजार में लाने के लिए तैयार होगी.”

First published: 17 April 2018, 19:33 IST
 
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