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दुनिया का नया खेलः ड्रोन रेसिंग लीग ने जुटाए 6 करोड़ 60 लाख रुपये

साहिल भल्ला | Updated on: 10 February 2017, 1:47 IST

दुनिया का एक नया खेल सामने आ चुका है और वो भी ऐसा जिसे देखने के लिए दर्शकों को जमीन पर बैठने की जरूरत नहीं.

न ही इसका रोमांच उठाने के लिए उन्हें जमीन के नीचे जाना होगा. बल्कि दर्शक अपने घरों में बैठकर स्क्रीन पर ही इसका लुत्फ उठा सकते हैं.

जब हम दर्शकों वाले खेल की बात करते हैं तो फास्ट फूड, ड्रिंक्स, बैनर-पोस्टर और चिल्लाने वाली भारी भीड़ जैसे किसी आयोजन का दृश्य अनायास ही सामने आ जाता है. 

लेकिन हम जिस खेल की बात कर रहे हैं उसमें ऐसा कुछ भी नहीं. ड्रोन रेसिंग बहुत सामान्य है. एक निर्धारित ट्रैक के दूसरे छोर पर कई बाधाओं को पार कर सबसे पहले पहुंचने वाला जीतता है. 

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सामान्य का मतलब आसान नहीं

चलिए हम आपको बताते हैं यह खेल कैसे खेला जाता है. हर ड्रोन के आगे की ओर एक कैमरा लगा होता है जो इसके पायलट के पास लाइव वीडियो का प्रसारण करता रहता है. विशेषरूप से डिजाइनर चश्मों के जरिये इसके पायलट ड्रोन के कैमरे से दिखने वाले दृश्यों को देखकर इसे चलाते हैं. 

इसे फर्स्ट पर्सन व्यू (एफपीवी) रेसिंग कहते हैं. एफपीवी चश्मों के साथ इस ड्रोन की पूरी किट तकरीबन 66 हजार रुपये की आती है. 

यह ड्रोन 70 मील प्रतिघंटा (करीब 112 किलोमीटर प्रतिघंटा) की रफ्तार से भागते हैं. हॉलीवुड फिल्म स्टार वार्स- द फैंडम मीनेस में पॉड रेसिंग की इससे तुलना की जा सकती है. 

टेक वेबसाइट वायर्ड के लेखक टिम मोयनिहन इन रेसिंग ड्रोन्स की तकनीक के बारे में विस्तार से जानकारी देते हैं. 

पहले जानते हैं इसकी पृष्ठभूमि के बारे में

कई लोगों को लगता है कि ड्रोन का इस्तेमाल सबसे पहले खुफिया उपकरण के रूप में शुरू हुआ था. बाद में इसे गेम के लिए प्रयोग किया जाने लगा. लेकिन वास्तविकता में इसकी कहानी हमारी सोच से कहीं ज्यादा पुरानी है. 

इतना जरूर हुआ है कि ड्रोन के निर्माण में इस्तेमाल किए जाने वाले तकनीकी समानों की कीमतों में तेजी से गिरावट के कारण इसे पसंद करने वाले उत्साही और शौकीन लोग अब आसानी से इसे खरीद सकते हैं. 

यह केवल वक्त का तकाजा है जिसने ड्रोन के शौकिया यूजर्स को इसे खेल के रूप में इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया.

इनका इस्तेमाल दुनिया के किसी एक हिस्से में नहीं, बल्कि कई महाद्वीपों में हो रहा है. मेलबर्न में यह भूमिगत इमारतों में उड़ान भर रहे हैं तो ब्रिटेन के जंगलों, पेरिस के खाली पड़े पार्किंग लॉट्स और अमेरिका के तमाम स्थानों पर इन्हें आसमान पर उड़ान भरते देखा जा सकता है.

इस साल जुलाई में इसे पहली बार औपचारिक रूप से एक खेल के रूप में शामिल किया गया. अमेरिका स्थित सैक्रामेंटो में कैलीफोर्निया स्टेट फेयर में पहली नेशनल ड्रोन रेसिंग चैंपियनशिप की पहली विशाल प्रतियोगिता आयोजित की गई.

किसे पसंद हैं ड्रोन रेसिंग

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वे लोग जिन्हें वीडियो गेम पसंद हैं और जो विमान जैसा कुछ उड़ाने के बारे में बेहद जुनूनी है, ड्रोन रेसिंग के दीवाने माने जाते हैं. 

ऐसा इसलिए है क्योंकि ड्रोन रेसिंग में वीडियो गेम और फ्लाइंग का एक बेहतरीन तालमेल दिखता है. शायद यही वजह है कि इसके चाहने वाले तेजी से बढ़ रहे हैं.

ब्राइटन से आए एक रेसर डॉम रॉबिन्सन ने अर्सटेक्नीशिया को बताया, "जब मैं यह चश्मा पहन लेता हूं तो मैं पूरी तरह इसमें डूब जाता हूं. जहां कुछ क्षणों के लिए मैं किसी और चीज के बारे में सोच भी नहीं सकता."

एक अन्य रेसर मैट डेनहैम ने बताया, "यह आप को एक नए आयाम में ले जाता है. यह एक ऐसा अनुभव होता है जैसे आप सबकुछ एक चिड़िया की नजर से देख रहे हों."

निवेश की राह भी दिखी

इसमें कोई दो राय नहीं कि यह खेल अभी नवजात या प्रारंभिक स्थित में है. और शायद यह इतना नया है कि कुछ लोगों को अभी इसे एक खेल के नाम से पुकारना भी तार्किक न लगे.

लेकिन किसी नए खेल की स्थापना के लिए सबसे ज्यादा जरूरी बात यानी ड्रोन रेसिंग के दीवाने उत्साही खिलाड़ी पहले से ही भारी तादाद में मौजूद हैं. 

अब इसके बेहतर ढंग से आयोजित करने से पहले जरूरत पैसे की पड़ती है, लेकिन इसकी भी चिंता की जरूरत नहीं क्योंकि अगस्त में ही इसकी व्यवस्था हो गई थी. द ड्रोन रेसिंग लीग प्रतियोगिता को बड़े स्तर पर सामने लाने की कोशिश में जुटे एक संगठन ने घोषणा की थी कि उसे मियामी डॉल्फिन्स के मालिक स्टीफन एम रॉस से 6 करोड़ 60  लाख रुपये का निवेश मिला था.

75 वर्षीय अरबपति रॉस पहलेे से  ही फुटबॉल में निवेश कर चुके हैं और अब ड्रोन रेसिंग लीग के 34 वर्षीय सीईओ निकोलस हॉर्बैकज्वेस्की के साथ जुड़कर इस शौकिया खेल के भविष्य की योजना बना रहे हैं.

निकोलस अभी इस बारे में ज्यादा जानकारी देने के लिए तैयार नहीं हैं. लेकिन वे मीडिया खबरों को स्वीकार करते हैं जिनमें बताया गया है कि ड्रोन रेस वीडियो गेम प्रतियोगिताओं की तरह ही होंगी लेकिन वीडियो गेम प्रतियोगिता की तुलना मे यह बहुत विशालकाय स्टेडियम (एरेना) में होंगी. 

अभी कई चुनौतियों से है निपटना

पहले बड़े आयोजन को अगले वर्ष की शुरुआत में करने की योजना है और इसके लिए नियम तैयार किए जा रहे हैं. जैसे, शौकीन किसी भी तरह के ड्रोन उड़ाते हैं. लेकिन लीग में शामिल होने वाली सभी ड्रोन को एक समान स्पेशिफिकेशन से बनाना होगा जिससे एक समान स्तर पर हवाई क्षेत्र में यह उड़ सकें. जो खेल के नियमों के मुताबिक सही भी लगता है. 

हालांकि जो नियमों को बना रहे हैं उनके बीच अभी भी कई मुद्दों को हल करने की जरूरत है. ड्रोन रेसिंग को असली दर्शकों वाला ज्यादा प्रभावशाली खेल कैसे बनाया जाए इस पर भी विचार करने की जरूरत है. जैसे स्टेडियम में बैठे दर्शकों को कैसे पता चलेगा कि वे किस ड्रोन के लिए चीयर कर रहे हैं, वो अपने ड्रोन को कैसे पहचान पाएंगे.

इसके सामने तकनीकी चुनौतियां भी हैं. जैसे कैलीफोर्निया स्टेट फेयर में आठ के अलावा बाकी सभी ड्रोन सिग्नलों की कमी के कारण उड़ान ही नहीं भर सके. क्योंकि एफपीवी के लिए विकसित मौजूदा तकनीक अभी सीमित है. 

एक अन्य चुनौती यह है कि जंबोट्रॉन्स (सोनी द्वारा विकसित तकनीकी जंबोविजन-जिसमें किसी खेल या कार्यक्रम के दौरान बारीक चीजों को एक बड़ी स्क्रीन के जरिये प्रदर्शित किया जाता है) को ड्रोन से मिलने वाली फीड कम गुणवत्ता (लो रिजोल्यूशन) की थी.

खिलाड़ियों को यह भी ध्यान रखना होगा कि ड्रोन से एचडी वीडियो स्ट्रीमिंग मिलने पर यह उनके लिए परेशानी न बनें. यानी मौजूदा रिजोल्यूशन वाला लाइव वीडियो उन्हें बिना क्षणिक विलंब के लगातार मिलता रहता है. लेकिन इसकी गुणवत्ता यानी रिजोल्यूशन बढ़ाने पर इसकी लाइव स्ट्रीमिंग में दिक्कत यानी फ्रेम का अटकना, रुकना हो सकता है, जिसे दूर करना होगा. 

ड्रोन रेसिंग को लेकर इसके प्रतिभागियों में तो बहुत दिलचस्पी है लेकिन दर्शकों में कम. जैसे कैलीफोर्निया स्टेट फेयर आयोजन में, केवल 60 लोगों ने इसे व्यक्तिगत रूप से देखा. जबकि जब इसकी लाइव स्ट्रीमिंग की गई तो 126 देशों में एक हजार से भी ज्यादा लोग हर वक्त इसे देखते मिले. 

हाल ही में, 7 नवंबर को द इंटरनेशनल ड्रोन रेसिंग एसोसिएशन ने अपनी पहली चैंपियनशिप लॉस एंजिल्स क्षेत्र में द कैलीफोर्निया कप के नाम से आयोजित की. सैकड़ों दर्शकों ने एक खाली इमारत के अंदर लगे जाल के पीछे से खड़े होकर यह प्रतियोगिता देखी. 

अब आगे क्या छिपा है

न केवल ड्रोन रेसिंग बल्कि सामान्य रूप से ड्रोन के लिए भी 2015 एक निर्णायक वर्ष साबित हुआ. जून में कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन रिपोर्ट ने भविष्यवाणी की 2015 में कंज्यूमर ड्रोन का अमेरिकी बाजार करीब 690 करोड़ रुपये का हो जाएगा. जो 2014 की तुलना में 50 फीसदी ज्यादा है. 

हालांकि, कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे अभी भी सुलझने बाकी हैं. पहला और आसान भी कि लोगों की नजरों में इसे स्वीकृति मिल जाए. निजी संपत्तियों के ऊपर ड्रोन उड़ने की खबरों पर पहले ही काफी प्रतिक्रियाएं आ चुकी हैं. 

इस पर भी बहस चल रही है कि  ड्रोन रेसिंग को बड़े इनडोर स्टेडियम में आयोजित किया जाए या फिर आउटडोर में. जहां आउटडोर में मौसमी बदलाव काफी प्रभाव डाल सकते हैं तो इनडोर में सीमित स्थान इसमें बाधा खड़ी कर सकता है. हालांकि, आउटडोर में दर्शकों के लिए ज्यादा स्वतंत्रता है. यानी वे खुद को खेल में एक अतिरिक्त खिलाड़ी के रूप जोड़कर चीयर कर सकते हैं. जबकि इनडोर में मौजूदा स्थितियों को देखते हुए दर्शकों को सुरक्षा के लिहाज से एक ग्लास की दीवार के पीछे बैठना होगा.

और जब तक खेल को पैसा नहीं मिलता तब तक एक सामान्य हकीकत यह है कि ड्रोन रेसिंग चाहे कितने भी दीवाने हों, यह एक शौक ही रहेगा. 

क्या ऑनलाइन हो सकता है ड्रोन रेसिंग का भविष्य

कुछ हद तक इसका जवाब हां में हो भी सकता है. कई ऐसे रेसर्स हैं जो आमतौर पर अपने ड्रोन की कलाबाजी को काफी ऊंचाई पर एक कैमरा लगाकर रिकॉर्ड करते हैं. इनमें रिकॉर्ड किए गए सबसे अच्छे शॉट्स को वो हाई रिजोल्यूशन वीडियो के रूप में म्यूजिक मिलाकर एडिट करने के बाद यूट्यूब समेत इंस्टाग्राम, फेसबुक, ट्विटर जैसे सोशल मीडिया पर पोस्ट कर देते हैं.

इसके डेमो को देखने वाले इसे पूरा देखने को मजबूर हो जाते हैं. इनमें कई ऐसे हैं जिन्हें यूट्यूब पर 50 करोड़ से भी ज्यादा यूजर्स देख चुके हैं. 

जब ड्रोन के जरिये हाई रिजोल्यूशन वीडियो रिकॉर्ड कर बिना किसी रुकावट के सीधे प्रसारित किया जा सकेगा, तब ड्रोन रेसिंग के उत्साही दर्शकों की संख्या में जबर्दस्त उछाल आ जाएगा. 

रोटरस्पोर्ट्स के रेस डायरेक्टर स्कॉट रेफ्सलैंड ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया, "हमें उम्मीद है कि यह पूरी तरह नासकार आयोजन के रूप में हाईडेफिनिशन पर दिखेगा." 

अब जो दृश्य हमें वर्ष 2015 ने दिखाया है वो हमारी सोच से काफी पहले हमें दिखने की संभावना है.

First published: 30 November 2015, 10:57 IST
 
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