Home » साइंस-टेक » ISRO Mars Mission: Mars Colour Camera on board Mars Orbiter Mission imaged Phobos, the closest and biggest moon of Mars
 

ISRO के मंगलयान ने भेजी मंगल ग्रह के सबसे बड़े चंद्रमा की तस्वीर, 7200 किमी दूर से ली फोटो

कैच ब्यूरो | Updated on: 4 July 2020, 9:12 IST

ISRO Mars Mission: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के मंगलयान (Mangalyan) ने अंतरिक्ष (Space) से मंगल ग्रह (Mars) के सबसे बड़े चंद्रमा 'फोबोस'(Phobos) की तस्वरी (Image) भेजी है. मंगलयान ने ये तस्वीर उसमें लगे मार्स कलर कैमरा (MCC) से उतारी है. बता दें कि फोबोस मंगल ग्रह का सबसे बड़ा चंद्रमा है जो उसकी परिक्रमा करता है. मंगलयान ने इस तस्वीर को 01 जुलाई को लिया तब लिया जब वह मंगल ग्रह से करीब 7200 किलोमीटर दूर था. उस दौरान फोबोस मंगलयान से करीब 4200 किली मीटर की दूर पर था. इसरो ने इस तस्वीर को शेयर करते हुे कहा कि 6 एमसीसी फ्रेम से ली गई यह एक समग्र तस्वीर है और यह स्पष्ट है.

इसरो का कहना है कि इस तस्वीर में अतीत में फोबोस से आकाशीय पिंडों के टकराने से बने विशाल गड्ढे भी यानी क्रेटर भी नजर आ रहे हैं. ये स्लोवास्की, रोश और ग्रिलड्रिग हैं. बता दें कि इसरो ने मंगलयान को सिर्फ छह महीने के लिए ही मंगल ग्रह की तमाम जानकारियां जुटाने के लिए भेजा था, लेकिन बाद में इस मिशन का समय बढ़ा दिया. क्योंकि इसरो के मुताबिक, मंगलयान में अगले कई सालों तक काम करने के लिए पर्याप्त ईंधन मौजूद है. 


गौरतलब है कि भारत की अंतरिक्ष एजेंसी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने मार्स ऑर्बिटर मिशन (MOM) को 24 सितंबर 2014 को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में लाल ग्रह यानी मंगल की कक्षा में स्थापित कर दिया था. इसरो ने ये उपलब्धि प्रथम प्रयास में ही हासिल कर ली गई और इस तरह देश वहां पहुंचने वाले एक एलिट समूह में शामिल हो गया.

Weather Update: दिल्ली-एनसीआर में आज भारी बारिश के आसार, इन राज्यों में भी होगी झमाझम बारिश

टिड्डियों से हुआ है नुकसान तो बिल्कुल न लें टेंशन, योगी सरकार किसानों को देने जा रही मुआवजा

इस मिशन को इसरो ने 05 नवंबर 2013 को आंध्र प्रदेश के श्री हरिकोटा से पीएसएलवी रॉकेट (PSLV Rocket) के जरिये इसका प्रक्षेपण किया था. इस मिशन में करीब 450 करोड़ रुपये की लागत आई थी. जो हॉलिवुड फिल्म ग्रेविटी से भी कहीं कम थी. इस मिशन का उद्देश्य मंगल की सतह और वहां खनिजों की संरचना का अध्ययन करना है. इसका उद्देश्य वहां के वायुमंडल में मिथेन की खोज भी करना है. बता दें कि मिथेन गैस ही मंगल पर जीवन का संकेतक है.

Coronavirus: इस शख्स ने खुद के लिए बनाया सोने का मास्क, कीमत 2.89 लाख, पढ़िए क्या किया दावा

First published: 4 July 2020, 9:12 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी