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इसरो ने नेविगेशन सैटेलाइट IRNSS-1 किया सफलतापूर्वक लॉन्च, अंतरिक्ष में एक और बड़ा कदम

कैच ब्यूरो | Updated on: 12 April 2018, 10:02 IST

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने गुरुवार को एक और एतिहासिक कामयाबी हासिल की. आंध्र प्रदेश के  श्रीहरिकोटा से पीएसएलवी-सी41/आईआरएनएसएस-1 आई मिशन को  सुबह चार बजकर चार मिनट पर सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया गया. गौरततलब है कि पीएसएलवी-सी41/आईआरएनएसएस-1 आई स्वदेशई तकनीक से निर्मित नौवहन उपग्रह है.

गौरतलब है कि आईआरएनएसएस-1 आई अब आईआरएनएसएस-1डी की जगह लेगा, जो सात नौवहन उपग्रहों में से पहला है और यह तीन रुबिडियम परमाणु घड़ियों के फेल होने के बाद निष्प्रभावी हो गया था. सातों उपग्रह नैवआईसी नौवहन उपग्रह पुंज का हिस्सा हैं. यह प्रक्षेपण प्रतिस्थापन उपग्रह भेजने का इसरो का दूसरा प्रयास है. यह लॉन्चिंग पीएसएलवी-सी41 रॉकेट के जरिये किया गया.

दरअसल आईआरएनएसएस-1आई मिशन प्रक्षेपण जीएसएलवी एमके-दो के जरिए जीसैट-6ए प्रक्षेपण के 14 दिन बाद हुआ है. इस रॉकेट ने जीसैट-6ए को कक्षा में प्रक्षेपित कर दिया था, लेकिन इसरो का इस उपग्रह से संपर्क टूट गया था. IRNSS-1I 'मेक इन इंडिया' प्रोजेक्ट के तहत स्वदेशी तकनीक से निर्मित नेविगेशन सैटेलाइट है.

आपको बता दें कि नाविक (NavIC)  के तहत भारत ने 8 सैटेलाइट लॉन्च किए हैं. इसमें IRNSS-1H को छोड़कर बाकी सभी सफल रहे. इस सैटेलाइट की मदद से नक्शा बनाने, समय के सटीक आंकलन, नेविगेशन और समुद्री नेविगेशन में मदद मिलेगी.

IRNSS-1I भारतीय सेना के लिए बहुत फायदेमंद साबित होगा. इससे सेना को नेविगेशन में मदद मिलेगी. IRNSS-1I का मुख्य उद्देश्य देश और उसकी सीमा से 1500 किलोमीटर की दूरी के हिस्से में इसकी उपयोगकर्ता को सही जानकारी देना है. ये स्वेदेशी निर्मित है.

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First published: 12 April 2018, 10:02 IST
 
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