Home » साइंस-टेक » Know How can you live after death
 

जानिए मौत के बाद भी कैसे जिंदा रह सकते हैं आप

अमित कुमार बाजपेयी | Updated on: 17 March 2016, 17:57 IST

जीवन की सबसे बड़ी सच्चाई मौत है और इसमें कोई दो राय भी नहीं. कई वैज्ञानिकों मौत से बचने और जीवन की अवधि बढ़ाने के तरीके खोजने में जुटे हुए हैं. हालांकि अब तक इसमें सफलता नहीं मिली है. आइए आज हम आपको बताते हैं कि कैसे आप मौत के बाद जिंदा रह सकते हैं.

यूं तो हर व्यक्ति की मौत होती है लेकिन उसका सटीक वक्त किसी को पता नहीं होता. मानव जीवन की शुरुआत महिला के गर्भधारण के साथ ही हो जाती है. भ्रूण से शिशु बनने में नौ माह के वक्त के बाद बच्चा दुनिया में आकर पहली सांस लेता है. यही से जीवन मृत्यु का सिलसिला शुरू हो जाता है. दिन प्रतिदिन यह नवजात शिशु शारीरिक विकास के साथ ही मृत्यु के करीब भी पहुंचता जाता है.

Life after death मौत के बाद भी क&#

हालांकि गर्भधारण की प्रक्रिया के दौरान भी कई बार भ्रूण से शिशु की मौत हो जाती है. लेकिन यहां हम उनके बारे में बात कर रहे हैं जो भ्रूण से वयस्क बनने के संघर्ष में सफलता पा लेते हैं. यही लोग जिनमें आप और मैं भी शामिल हूं मौत को टालने या ज्यादा वक्त तक जिंदा रहने की जद्दोजहद के लिए तमाम उपाय अपनाते हैं. स्वस्थ जीवन शैली, बेहतर खानपान, शारीरिक अभ्यास, नियमित दिनचर्या, बीमारियों से बचाव समेत तमाम कार्य करते हैं.

पढ़ेंः मधुमेह रोगियों को इंजेक्शन से मुक्ति दिलाएगा इंसुलिन पैच

खैर जन्म के साथ ही मृत्यु की दौड़ शुरू होने का मतलब है कि जीवन की सीमा के खत्म होने की घड़ी शुरू हो जाती है. मानव शरीर की कोशिकाओं के निर्माण और अंत की प्रक्रिया शुरू हो जाती है. नवजात शिशु शारीरिक विकास के साथ ही मौत के दरवाजे के करीब पहुंचता जाता है. शारीरिक विकास, बदलावों के बाद क्षय होता है और अंत में मौत. व्यक्ति और स्थान के हिसाब से आयु में अंतर जरूर हो सकता है. लेकिन देर सवेर इस हकीकत से सभी को रूबरू होना पड़ता है. 

लेकिन यह बहुत वाजिब और आम उत्सुकता का सवाल है कि कैसे एक व्यक्ति मौत के बाद भी जिंदा रह सकता है. जानिए कैसेः

मौत के वर्षों बाद तक देखें दुनिया

मानव नेत्र या आंखें जो दुनिया की हर खूबसूरती से रूबरू कराती हैं जन्म के साथ ही खुलती हैं और मौत के साथ ही बंद हो जाती हैं. आपकी आंखें आपकी मौत के बाद भी दुनिया देखें इसके लिए आप "नेत्रदान" कर सकते हैं. यानी जिस वक्त आपका शरीर मृत हो जाएगा आपकी आंखें किसी जरूरतमंद को दे दी जाएंगी और वो आपकी आंखों से दुनिया देख सकेगा. उसकी आंखों के रूप में आप भी मौत के बाद दुनिया और अपने चाहने वालों को देख सकेंगे. 

धड़कता रहेगा आपका दिल

एक सच्चाई यह भी है कि शरीर से जान के जाते ही दिल धड़कना बंद कर देता है. अब अगर आप चाहते हैं कि आपकी मौत के बाद भी आपके दिल की धड़कन जारी रहे तो आप अपना "हृदयदान" करें. इसके बाद आपका दिल आपका शरीर छोड़ने के बाद भी धड़केगा और यह किसी दूसरे को जिंदगी देने के साथ ही उनके चाहने वालों के दिल को भी धड़काएगा.

organ donation मौत के बाद भी क

जान जाने के बाद भी लेते रहेंगे सांस

अगर आप अपने फेफड़े दान कर देते हैं तो आपकी जान जाने के बाद भी आपके फेफड़े सांस लेना जारी रखेंगे. मौत के बाद आपके फेफड़े काम करना बंद कर देते हैं और उनका ऑक्सीजन-कार्बन डाइ ऑक्साइड से कोई वास्ता नहीं रहता. लेकिन फेफड़े दान देने के बाद यह केवल शरीर बदलेंगे लेकिन काम वहीं सांस लेने और छोड़ने का जारी रखेंगे.

50 शरीरों में जिंदा रहेंगे आप

यूं तो ढेर सारे अंगों के साथ पैदा होने के बाद आप केवल एक शरीर के जरिये ही जिंदा रहते हैं और आखिरी सांस के बाद आपका शरीर और सारे अंग समाप्त हो जाते हैं. लेकिन मानव शरीर के 25 अलग-अलग हिस्सों को दान किया जा सकता है. आंखें, हृदय, फेफड़े के अलावा भी बाकी 22 हिस्से इतने ही शरीरों में आपको जिंदा रखेंगे. इतना ही नहीं यह अंग-ऊतक 50 व्यक्तियों को नई जिंदगी भी देंगे.

OrganTissueTranplant  मौत के बाद भी 

दरअसल दो तरह के अंगदान होते हैं. पहला अंगदान जिसमें आंख, हृदय आदि शामिल होता है जबकि दूसरा टिश्यू या ऊतक दान होता है. आपकी मृत्यु के बाद आपका लिवर (यकृत), पैंक्रियाज (अग्नाशय), किडनी (गुर्दे) समेत छह अंग सीधे तौर पर दूसरे व्यक्ति को नई जिंदगी दे देते हैं.

पढ़ेंः जानिए क्या हैं दुनिया के 5 सबसे खतरनाक नशे

जबकि हड्डी, कार्टिलैज, कॉर्निया, फैस्किया, हार्ट वॉल्व, लिंगामेंट्स, पेरिकार्डियम, स्किन (त्वचा), टेंडंस, वेंस, बल्ड वेसल्स, बोन मैरो, कनेक्टिव टिश्यूज समेत अन्य ऊतक शामिल होते हैं.

कौन कर सकता है अंगदान

कोई भी इंसान अंगदान कर सकता है. इंसान की आयु का इससे कोई संबंध नहीं होता है. नवजात शिशु से लेकर 90 साल के बुजुर्गों तक के अंगदान कामयाब हो चुके हैं. हालांकि 18 साल से कम उम्र के व्यक्ति को अंगदान के लिए आवेदन करने से पूर्व अपने माता-पिता की अनुमति लेना जरूरी होता है. 

अंगदान से जुड़ी जरूरी बात

नेत्रदान के अलावा बाकी सभी अंगों का दान ब्रेनडेड (मस्तिष्क के मृत) होने पर ही किया जा सकता है. जिनकी ब्रेन डेथ हो जाती है चिकित्सक उन्हें वेंटिलेटर पर ले जाते हैं. चिकित्सकों का एक दल ब्रेन डेथ की पुष्टि करता है. इसके बाद परिजनों की मर्जी और कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद ब्रेन डेथ शरीर से अंगों को निकाल लिया जाता है. शरीर में केवल एक चीरा लगाकर अंगों को निकाल लिया जाता है. 

पढ़ेंः टेक ऑफ और लैंडिंग के दौरान क्यों खुली रखनी पड़ती है विमान की खिड़की?

पढ़ेंः खुदकुशी करने से यूजर्स को रोकेगा फेसबुक

First published: 17 March 2016, 17:57 IST
 
अमित कुमार बाजपेयी @amit_bajpai2000

पत्रकारिता में एक दशक से ज्यादा का अनुभव. ऑनलाइन और ऑफलाइन कारोबार, गैज़ेट वर्ल्ड, डिजिटल टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल, एजुकेशन पर पैनी नज़र रखते हैं. ग्रेटर नोएडा में हुई फार्मूला वन रेसिंग को लगातार दो साल कवर किया. एक्सपो मार्ट की शुरुआत से लेकर वहां होने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों-संगोष्ठियों की रिपोर्टिंग.

पिछली कहानी
अगली कहानी