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जानिए 'स्पोर्ट्स ब्रा' के पीछे छिपा विज्ञान

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 September 2016, 18:40 IST
(इंस्टाग्राम)

ब्रिटेन की महिलाओं के स्तन का आकार बढ़ता जा रहा है. सालाना सर्वे के मुताबिक ब्रिटेन की महिलाओं के स्तन की ब्रा का आकार 36C से बढ़कर 36DD हो गया है और यह वजन में 430 ग्राम ज्यादा बढ़ चुका है.

शोध बताती है कि ज्यादा बड़े स्तन होने से कई महिलाएं खेलों और एक्सरसाइज में शामिल नहीं हो पातीं और यहां तक की खेलों में उनकी क्षमता पर भी प्रदर्शन पड़ता है. 

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यूं तो कड़ी प्रतिस्पर्धा वाले खेलों में स्पोर्ट्स ब्रा बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं लेकिन यह उन महिलाओं के लिए भी बहुत लाभदायक हैं जो किसी भी तरह की एक्सरसाइज करती हैं. 

पहली स्पोर्ट्स ब्रा के साथ लिजा लिंदाह्ल और पॉली स्मिथ (अमेरिकनहिस्ट्री.एसआई.ईडीयू)

सामान्य ब्रा की तुलना में आजकल की स्पोर्ट्स ब्रा को वैज्ञानिक और तकनीकी शोध के निष्कर्षों से सामने आने वाला उत्पाद माना जाता है. 

बता दें कि 1977 में पहली बार एक सामान्य एक्सरसाइज ब्रा को विकसित किया गया था. इसे लिजा लिंदाह्ल और पॉली स्मिथ ने दो जॉकस्ट्रैप्स को एक दूसरे के साथ सिलकर बनाया था. 

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लेकिन उसके बाद से इसके निर्माण और डिजाइन में काफी सुधार आने के साथ तकनीकी का इस्तेमाल किया जाने लगा. हालिया तकनीकी विकास के बाद इन स्पोर्ट्स ब्रा में शरीर से रगड़ न खाने वाली सिलाई, बेहद छोटे सेंसर्स और इनमें लगे एक्चुएटर्स भी हैं जो जरूरत के हिसाब से स्तनों को सपोर्ट करते हैं.

यहां तक की आजकल नैनोस्ट्रक्चर्ड टेक्सटाइल सेंसर्स से लैस स्पोर्ट्स ब्रा भी आ चुकी हैं जो महिलाओं के स्मार्टफोन से कनेक्ट हो जाती हैं और उनके दिल की सेहत का ख्याल रखने के साथ ही ब्रेस्ट कैंसर होने की संभावना की जानकारी दे देती हैं.

बता दें कि एक्सरसाइज के दौरान महिलाओं के टॉर्सो कई दिशाओं में कई रफ्तार में मूव करते हैं. और चूंकि स्तनों में मांसपेशियां नहीं होतीं और इन्हें अंदर से काफी कम सहारा मिला होता है इसलिए मुलायम ऊतकों वाला यह हिस्सा स्वतंत्र रूप से हिलता-डुलता है. लेकिन इसकी दिशा को टॉर्सो की मूवमेंट तय करती हैं.

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खेलते या एक्सरसाइज करते वक्त ही यह स्पोर्ट्स ब्रा अपना कमाल दिखाती हैं. यह ऐसे वक्त स्तनों को स्वतंत्र रूप से इधर-उधर हिलने या फिर शरीर की तुलना में बेवजह ज्यादा मूवमेंट करने की दर को कम करती हैं. परिणामस्वरूप इससे होने वाली परेशानी या दर्द से छुटकारा मिलता है और खेलों में प्रदर्शन काफी सुधर जाता है. 

नतीजे बताते हैं कि 5 किलोमीटर की दूरी में सामान्य ब्रा की तुलना में स्पोर्ट्स ब्रा रनिंग टेक्निक को भी सुधारती है और ज्यादा वाजिब होती है. हां, यह सही है कि स्तनों के आकार बढ़ने के साथ ही स्पोर्ट्स ब्रा की मांग बढ़ती है, लेकिन यह भी सही है कि ज्यादा बड़े स्तन शरीर की जरूरतों को भी बढ़ा देते हैं. उदाहरण के रूप में बड़े स्तनों वाली कई महिलाएं पीठ और कंधों की सूजन-दर्द से प्रभावित होती हैं.

अब अगर बात करें स्पोर्ट्स ब्रा के पीछे की तकनीक और विज्ञान की तो यह काफी चौंकाने वाली बात लग सकती है. दरअसल महिलाओं के स्तनों के आकार की वजह से उनकी मूवमेंट पर फर्क पड़ता है. यानी जितने बड़े स्तन होंगे, शरीर के हिलने-डुलने पर वे उतना ही ज्यादा इधर-उधर होंगे.

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वैज्ञानिकों ने स्तनों के विभिन्न आकारों, उनकी गतिविधियों, विभिन्न खेलों के मुताबिक स्तनों की मूवमेंट आदि का अध्ययन किया और फिर कंप्यूटर की मदद से जाना कि कैसे खेलों के दौरान स्तनों को शरीर की मूवमेंट से तालमेल बनाने के साथ ही उनकी गतिविधियों को सीमित करने और शरीर का साथ देने लायक बनाया जा सकता है.

मसलन दौड़ते-फुटबॉल खेलते वक्त स्तन बाएं-दाएं मूवमेंट करते हैं, बास्केटबॉल-वॉलीवॉल खेलते वक्त यह ऊपर-नीचे की ओर ज्यादा तेजी से भागते हैं, लॉन टेनिस-बैडमिंटन जैसे खेलों में यह साइड में भागते हैं, बॉलिंग-बैटिंग-हॉकी में इनकी मल्टी मूवमेंट होती है. 

वैज्ञानिकों ने यह भी पता लगाया कि चूकिं खेलों में शरीर को क्षमता से ज्यादा आगे जूझना पड़ता है, अचानक रुकना-दौड़ना, बिल्कुल विपरीत मूवमेंट जैसा काम भी करना पड़ता है, ऐसे में शरीर के हिसाब से स्तनों की अतिरिक्त मूवमेंट और अचानक से इनके रुकने पर शरीर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने के साथ दर्द-सूजन और परेशानी से भी जूझना पड़ सकता है. 

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इसके लिए अलग-अलग खेलों के हिसाब से अलग-अलग स्पोर्ट्स ब्रा बनाई गईं. मतलब कि ब्रा में ऐसा सपोर्ट सिस्टम दिया गया जो स्तनों के दाएं-बाएं, ऊपर-नीचे के मूवमेंट को सीमित कर सकें. विभिन्न रिपोर्टों के मुताबिक इन तकनीकी ब्रा के जरिये स्तनों की मूवमेंट को 80 फीसदी तक कम कर दिया गया.

इन ब्रा को बनाने के लिए स्पेशल स्मूद हुक, पसीना सोखने लायक कपड़ा, हवा लगने लायक या ब्रीदेबल फैब्रिक, स्पेशल इलास्टिक आदि का इस्तेमाल किया जाता है. 

इतना ही नहीं यह ब्रा वैज्ञानिक तरीके से बनाई जाती हैं जो हर आकार और खेलों के लिए विशेषरूप से अलग-अलग बनाई जाती हैं. ब्रा बनाते वक्त यह भी ध्यान रखा जाता है कि यह स्तनों के साथ पीठ और स्पाइनल कॉर्ड को भी सपोर्ट करें.

First published: 10 September 2016, 18:40 IST
 
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