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यूरोप में गूगल पर संकटः जानिए क्या है पूरा मामला

अमित कुमार बाजपेयी | Updated on: 15 July 2016, 13:52 IST

व्यावसायिक प्रतिद्वंदिता के चलते कंपनियों द्वारा अपने मुनाफे वाली चीजों का प्रचार और घाटे वाली चीजों से किनारा काट लेना कोई नई बात नहीं है. लेकिन जब बात गूगल जैसी कंपनी की आए जिसके ऊपर एक वैश्विक पहुंच के साथ ही पारदर्शिता बरतने की जिम्मेदारी है, प्रतिद्वंदिता के चलते ऐसा करना शोभा नहीं देता. अब यूरोप में गूगल के सामने आया ताजा संकट कुछ ऐसा ही है. 

दरअसल चीन में पहले ही गूगल काफी परेशानियों का सामना कर चुका है. अब यूरोप में गूगल को फिर से एक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. हालांकि यह परेशानी गूगल द्वारा खुद से पैदा की गई है.

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यूरोपीय कमीशन द्वारा गूगल को सख्त हिदायत दी गई है कि वो ऑनलाइन शॉपिंग में अपने बेवजह के प्रभाव को तुरंत समाप्त कर दे. इसके पीछे की वजह बताते हुए कमीशन ने कहा कि गूगल अपने मुनाफे के लिए कुछ खास कंपनियों को ही सर्च रिजल्ट में प्रमुखता देता है और परिणामस्वरूप यह बाजार पर दुष्प्रभाव डालने वाला साबित हो रहा है.

क्या हैं आरोप

पूरी दुनिया को कुछ और पता हो या नहीं लेकिन इतना जरूर पता है कि गूगल एक सर्च इंजन है और इस पर कुछ भी खोजा जा सकता है. 

जाहिर है गूगल भी एक बिजनेस मॉडल है और अपने हितों-मुनाफे के लिए वो सर्च रिजल्ट में कुछ ऊपर-नीचे करता भी है. मसलन विज्ञापनों और विज्ञापनदाताओं की सामग्री को पहले परोसता है और बाकी जानकारियां बाद में देता है.

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यूरोपीय कमीशन ने भी जांच में यही पाया. उन्हें पता चला कि ऑनलाइन शॉपिंग के दौरान गूगल पर कुछ खोजने के बाद इसके परिणामों में कुछ खास कंपनियों की मौजूदगी बहुत ज्यादा दिखाई देती थी जबकि दूसरों की काफी कम. कमीशन ने इसे गलत बताया. 

कमीशन द्वारा गूगल पर यह भी आरोप लगाया गया कि वो अपने प्रतिद्वंदी सर्च इंजनों पर जानते-बूझते तकनीकी परेशानियां खड़ी कर रहा है. जबकि गूगल को अपने प्रतिद्वंदियों को रोकने का कोई अधिकार नहीं है.

दूसरों को आगे बढ़ने से रोकने का नहीं है गूगल को अधिकार

यूरोपीय कमीशन का मानना है कि निश्चित रूप से गूगल ने कई नए और बेहतरीन उत्पादों को जनता के सामने पेश किया है. यह मानव जीवन में काफी बदलाव लेकर आए हैं. लेकिन इसका यह मतलब नहीं हो जाता है कि गूगल के पास यह अधिकार आ गया कि वो दूसरी कंपनियों को भी कुछ नया करने या तरक्की करने से रोके.

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पहले से ही एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम द्वारा अपने प्रभाव का गलत इस्तेमाल करने के चलते गूगल के खिलाफ अदालत में मामला चल रहा है. गूगल पर आरोप लगाया गया कि उसने एंड्रॉयड इस्तेमाल करने वाली कंपनियों के समक्ष काफी भारी मांग रखी और प्रतिस्पर्धा को समाप्त करने का प्रयास किया.

क्या है गूगल की सफाई

यूरोपीय कमीशन द्वारा गूगल के खिलाफ सख्त रुख अपनाने के बाद गूगल के प्रवक्ता ने एक बयान जारी कर कहा कि कंपनी ने ऑनलाइन शॉपिंग की पूरी परिभाषा को ही बदल दिया है. इससे यूरोपीय लोगों की जीवनशैली में काफी बदलाव भी आया. जाहिर है इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ी है. एक जांच होने के बाद हम कमीशन द्वारा लगाए गए आरोपों का विस्तारपूर्वक जवाब देंगे.

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First published: 15 July 2016, 13:52 IST
 
अमित कुमार बाजपेयी @amit_bajpai2000

पत्रकारिता में एक दशक से ज्यादा का अनुभव. ऑनलाइन और ऑफलाइन कारोबार, गैज़ेट वर्ल्ड, डिजिटल टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल, एजुकेशन पर पैनी नज़र रखते हैं. ग्रेटर नोएडा में हुई फार्मूला वन रेसिंग को लगातार दो साल कवर किया. एक्सपो मार्ट की शुरुआत से लेकर वहां होने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों-संगोष्ठियों की रिपोर्टिंग.

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