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जानिए क्यों फटते हैं स्मार्टफोन?

अमित कुमार बाजपेयी | Updated on: 23 September 2016, 18:26 IST

इस साल सैमसंग का सबसे बड़ा फ्लैगशिप लॉन्च गैलेक्सी नोट 7 स्मार्टफोन था और यूजर्स के फोन फटने से यही कंपनी के लिए बड़े नुकसान और बदनामी की भी वजह बन गया. वहीं, दूसरी ओर नासा के वैज्ञानिकों ने इस साल को पिछले 130 सालों में सबसे गर्म वर्ष भी बताया. 

ताजा घटना में सिंगापुर से चेन्नई के लिए आ रहे इंडिगो विमान में सैमसंग नोट 2 फट गया. तो क्या इस वर्ष के मौसम का सबसे गर्म होना ही फोन फटने की वजह बना या कुछ और. ऐसे तमाम सवाल होंगे जो यूजर्स के दिमाग में कौंध रहे होंगे कि आखिरकार कोई स्मार्टफोन फटता क्यों है.

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यूं तो एक बात हर यूजर को पता होगी कि किसी भी फोन में सबसे खतरनाक हिस्सा उसकी बैटरी होती है. फोन की बैटरी ही फटती भी है. तो आखिर हर फोन की बैटरी क्यों नहीं फटती और किस फोन की फट सकती है, इसके लिए कई बातें जानना जरूरी है.

क्या किसी भी स्मार्टफोन की बैटरी फट सकती है?

आज स्मार्टफोन समेत अधिकांश इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसों में इस्तेमाल की जाने वाली बैटरियों में ज्वलनशील तत्व होते हैं. यह बैटरियां लीथियम (एलआई) की होती हैं, भले ही वो एलआई-आयन हों या फिर एलआई-पो. 

हर बैटरी में एक कैथोड और एक एनोड यानी पॉजिटिव और निगेटिव प्वाइंट होता है, यानी एक ऐसा तत्व जो घटता है और इलेक्ट्रॉन्स छोड़ता है जबकि दूसरी ऑक्सीकृत होकर इन इलेक्ट्रॉन्स को इकट्ठा करता है. इलेक्ट्रॉन्स का यही आदान-प्रदान स्मार्टफोन को ऊर्जा देता है.

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सभी बैटरियों में कैथोड और एनोड को एक मेंबरेन (पर्त) से अलग किया जाता है. अगर कैथोड और एनोड एक दूसरे के संपर्क में आते हैं या छू जाते हैं तो वे रासायानिक क्रिया शुरू कर देते हैं, और लीथियम बैटरियों के मामले में यह प्रक्रिया काफी तेज होती है. 

यह प्रक्रिया कोई विस्फोट नहीं करती लेकिन ज्वलन (कंबस्टन) जरूर करती है. यह किस्मत की ही बात मानें कि बैटरियों में भारी विस्फोट होने लायक उचित ईंधन नहीं होता वर्ना यह आधे मीटर की परिधि में आने वाली किसी भी चीज को नुकसान पहुंचा सकती हैं.

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इस तरह से बैटरी में कैथोड, मेंबरेन और एनोड नाम की तीन सतह होती हैं जिन्हें इस तरह से लगाया जाता है कि कैथोड-एनोड एक दूसरे को टच (संपर्क) न करें. 

अब परेशानी तब सामने आती है जब इन दोनों तत्वों को अलग करने वाली यह मेंबरेन खराब हो जाए या फिर और बुरा हो सकता है कि यह निर्माण होने वाली फैक्ट्री से ही खराब आए, जैसा सैमसंग नोट 7 के मामले में हुआ.

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इसके अलावा हर लीथियम बैटरी में एक तापमान नियंत्रक (टेंपरेचर कंट्रोल) सर्किट लगा होता है. अगर बैटरी एक निर्धारित तापमान से ज्यादा गर्म हो जाती है तो यह सर्किट इसे चार्जिंग से रोक देता है. ऊंचा तापमान इस मेंबरेन को नुकसान पहुंचाता है और जैसे ही यह मेंबरेन नष्ट होती है, कैथोड और एनोड एक दूसरे के संपर्क में आकर ज्वलन की प्रक्रिया शुरू कर देते हैं.

क्या कोई इसे जलने से रोक सकता है?

यूं तो हमारे स्मार्टफोन नुकसानरहित होते हैं लेकिन इनके अंदर गुप्त खतरा होता है. सामान्यता स्मार्टफोन के अंदर ज्वलन के मामले काफी कम होते हैं जिन्हें उंगलियों पर गिना जा सकता है, जबकि हर साल 1,40 करोड़ स्मार्टफोन की बिक्री होती है (2015 की स्मार्टफोन बिक्री). ऐसे में कोई स्मार्टफोन फटकर धुआं निकालेगा, की संभावना काफी कम होती है.

तो क्या यह माना जाए कि हम अपने हाथ में खतरनाक डिवाइस लेकर घूमते हैं? साफ तौर पर इसका जवाब नहीं है. यह सच है कि यह संभव है लेकिन सामान्यता स्मार्टफोन बनाने वाली फैक्ट्रियों में मौजूद क्वॉलिटी कंट्रोल टीम यह सुनिश्चित करती है कि बैटरियां सुरक्षित हों.

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अगर किसी स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनी को यह पता चलता है कि उनकी एक निर्धारित सिरीज की बैटरियों में उत्पादन के वक्त ही खामी आ गई थी, तो यह तुरंत ही उन डिवाइसों को वापस मंगा लेती है. 

जैसे सैमसंग ने अपने फोन की बिक्री और विपणन (डिस्ट्रीब्यूशन) रोकने के साथ ही खराब नोट 7 के मॉडलों को वापस मंगा लिया. 

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लेकिन कुछ भी हो अपने फोन की बैटरी पर ध्यान देना बहुत जरूरी है. हमेशा ध्यान रखें कि इनका तापमान 60 डिग्री से ऊपर न पहुंचे. अगर बैटरी फूल जाती है या फिर अपना आकार बदलती है तो इसे तुरंत बदलवाना चाहिए. और बैटरी को कभी भी किसी धारदार या नुकीली चीज से छेद नहीं करना चाहिए.

First published: 23 September 2016, 18:26 IST
 
अमित कुमार बाजपेयी @amit_bajpai2000

पत्रकारिता में एक दशक से ज्यादा का अनुभव. ऑनलाइन और ऑफलाइन कारोबार, गैज़ेट वर्ल्ड, डिजिटल टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल, एजुकेशन पर पैनी नज़र रखते हैं. ग्रेटर नोएडा में हुई फार्मूला वन रेसिंग को लगातार दो साल कवर किया. एक्सपो मार्ट की शुरुआत से लेकर वहां होने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों-संगोष्ठियों की रिपोर्टिंग.

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