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माइंड कंट्रोल से चलेंगी अब कारें

असद अली | Updated on: 10 February 2017, 1:46 IST

तियानजिन के नाक़ाई विश्वविद्यालय में चीनी शोधकर्ताओं ने दो साल का समय लगाने के बाद जबरदस्त तकनीक खोज निकाली है. अब आप अपने दिमाग के कंट्रोल से से कार चला सकेंगे. 

यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ़ कंप्यूटर एंड कंट्रोल इंजीनियरिंग के एसोसिएट प्रोफेसर डुआन फेंग के इस प्रोजेक्ट में मुख्य उपकरण में 16 सेंसर शामिल है. सेंसर ड्राइवर के दिमाग से ईईजी सिग्नल को कैप्चर करते हैं. जिनको कंप्यूटर तक भेजा जाता है. 

एक अन्य शोधकर्ता ग्वांगहाआे ने रायटर को बताया की कंप्यूटर लोगों की मंशा को पहचान कर संकेतों की प्रोसेसिंग करता है और फिर कंट्रोल कमांड्स को कार में ट्रांसफर कर देता है. 

Brain Controlled Car 2

ग्वांगहाआे कहते हैं की दिमाग से नियंत्रित ड्राइविंग तकनीक को विकसित करने के पीछे का मकसद "एक ऐसे ड्राइविंग मेथड को बनाना है जिससे विकलांगाें भी ड्राइविंग कर सके." इतना ही नहीं इससे स्वस्थ लोगों को भी लाभ मिलेगा.

सड़क पर सभी की निगाहें

पहली बार ही ऐसा प्रयास नहीं किया गया है. 2014 में बर्लिन की फ्री यूनिवर्सिटी में शोधकर्ताओं की एक टीम ने अपने प्रोजेक्ट ब्रेन ड्राइवर पर काम किया था. उनका भी उद्देश्य चीनी शोधकर्ताओं की तरह, दिमाग के सिग्नल को कमांड में तब्दील करना था जिससे 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से कार चलाई जा सके. मूल तकनीक में 16 सेंसर के साथ एक हेडसेट शामिल है जो इलेक्ट्रिक संकेतों पर नजर रखता है.

इसको प्रौद्योगिकी का विस्तार करने के लिए भी किया गया था. 

लेकिन उनकी सबसे बड़ी चुनौती यह थी की जो सिग्नल दिमाग से मिल रहे थे. वह वास्तव में कमजोर थे. रोबोसिस्ट अदाल्बेर्तो ललरेना ने बीबीसी को 2014 के एक लेख में बताया,  "यह इस तरह था की जैसे हमने एक तरफ एक छोटे से माइक्रोफोन को लगाया हुआ था और दूसरी तरफ से लाखों लोग चिल्ला रहे है और आप उन्हें सुनने की कोशिश कर रहे हैं."

Brain Controlled Car 3

इससे पहले भी 2011 में फ्री यूनिवर्सिटी के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ग्रुप के शोधकर्ताओं ने इसी तरह की तकनीक का प्रदर्शन किया था और इसमें उन्होंने न्यूरोहेडसेट का मॉडिफाइड वर्जन फोक्सवैगन पासा में यूज किया. 

वोल्वो ने इस साल 2017 के आरंभ से ड्राइविंग के लिए आम जनता को एसयूवी  देने की घोषणा की जिससे वह 50 किलोमीटर तक गोथेनबर्ग और स्वीडन के मार्ग पर स्वयं ड्राइविंग कर सकें. 

गोथेनबर्ग पायलट प्रोजेक्ट स्वीडिश सरकार के अधिकारियों, विधायकों, और नगर ​​नियोजक के साथ मिलकर  किया जा रहा है. साल की शुरूआत में जोसी एंसॉर ने टेलीग्राफ में अपने गूगल की उस कार के अनुभव के बारे में लिखा था जिसमें ड्राइवर नहीं था. यह तकनीक तेजी से फैल रही है. यहां तक ​​कि एक फॉर्मूला ई इवेंट भी अगले साल ड्राइवर के बिना चलने वाली कार के लिए होने वाला है. 

शायद यह वास्तव में अब आराम से बैठकर सवारी का आनंद लेने का समय है.

First published: 10 December 2015, 8:07 IST
 
असद अली

संवाददाता, कैच न्यूज़

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