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सपनों को करें कस्टमाइज, जैसे चाहेंगे वैसे सपने आएंगे

अमित कुमार बाजपेयी | Updated on: 8 October 2016, 18:32 IST
(फेसबुक)

हर व्यक्ति कभी न कभी सपने देखता है. कई बार अच्छे तो कई बार बुरे. कई बार ऐसे सपने भी आते हैं जो कई दिनों तक परेशान कर देते हैं. लेकिन अब बुरे सपनों से परेशान लोगों या अच्छे सपने देखने की ख्वाहिश रखने वालों के लिए एक खुशखबरी है. आईबैंड प्लस नाम की एक नई डिवाइस को बनाने वालों का दावा है कि इसे पहनने के बाद आप जैसे चाहेंगे, वैसे सपने आएंगे.

यूं तो आपको 2010 में हॉलीवुड के मशहूर कलाकार लियोनार्डो डि कैप्रियो की फिल्म 'इंसेप्शन' याद होगी जिसमें दिखाया गया है कि फिल्म का मुख्य किरदार कैसे किसी के नींद में आने वाले सपने के अंदर के सपने में जाकर उसकी याददाश्त को बदलने जैसा मुश्किल काम करता है. 

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सपने को लेकर अभी हाल ही में बॉलीवुड की फिल्म 'बार-बार देखो' भी आई जिसमें सिदार्थ मल्होत्रा और कैटरीना कैफ ने भूमिका निभाई है. इसमें भी दिखाया गया है कि कैसे अपने भविष्य को लेकर फिल्म का हीरो सपने के अंदर सपना देखते हुए जब जगता है तो सुधर जाता है.

लेकिन इन सभी फिल्मों को हकीकत में बदलने वाली एक हेडबैंड डिवाइस आईबैंड प्लस को एमस्टर्डम की एक कंपनी ने पेश किया है. फिलहाल कंपनी अपने व्यवसाय को बढ़ाने के लिए किसी निवेशक की तलाश में है. 

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इस डिवाइस के निर्माताओं ने इसे 'अ ट्रूली स्मार्ट वारयलेस ब्लूटूथ ईईजी हेडबैंड' यानी सिर पर पहना जा सकने वाला एक ऐसा स्मार्ट और वास्तविक वायरलेस ब्लूटूथ हेडबैंड बताया है जो 'इसे पहनने वाले के दिमाग की तरगों को प्रयोगशाला स्तर की सटीकता से पहचान' लेता  है.

इस बैंड में विशेष हेल्थ ट्रैकिंग सेंसर्स लगे हुए हैं जो यूजर्स की शारीरिक गतिविधि, हृदय गति और शारीरिक तापमान को जांचते रहते हैं. पूरी नींद के दौरान (स्लीप साइकिल) इन जानकारियों को जुटाने के साथ ही यह आईबैंड प्लस अच्छे सपने लाने के लिए 'ऑडियो-वीडियो सिग्नल जारी करने के साथ उसे बुद्धिमानी से नियंत्रित करता' है.

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यह पूरी प्रक्रिया हेडबैंड के लाइट इफेक्ट्स के कॉम्बिनेशन और इसमें लगे स्पीकर्स से निकलने वाली ध्वनि के जरिये पूरी होती है. बता दें कि स्लीप साइकिल में मुख्यता दो चरण होते हैं. इनमें पहला रैपिड आई मूवमेंट (आरईएम-रेम) और नॉन रैपिड ऑई मूवमेंट (एनआरईएम-एनरेम) स्लीप शामिल होती है.

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सामान्यता सजीव सपने रेम चरण में आते हैं जबकि एनरेम चरण में सपने देखने वालों को आसानी से जगाया जा सकता है. रेम स्लीप में हमारे हाथ-पैर की मासपेशियां अस्थायी रूप से पैरालाइज्ड हो जाती हैं, इसे न्यूरोलॉजिकल बैरियर माना जाता है जो सपनों में हमें गतिविधि करने से रोकता है. 

आईबैंड प्लस को इस तरह से डिजाइन किया गया कि व इस रेम स्लीप को सही से समझें और बिल्कुल सही वक्त पर ऑडियो-विजुअल संदेश भेजे. इनकी कीमत करीब 312 डॉलर (करीब 21 हजार रुपये) रखी जा सकती है. फिलहाल इनकी प्री-बुकिंग कराई जा रही है और कंपनी को अब तक हजारों की तादाद में बुकिंग मिल चुकी हैं.

First published: 8 October 2016, 18:32 IST
 
अमित कुमार बाजपेयी @amit_bajpai2000

पत्रकारिता में एक दशक से ज्यादा का अनुभव. ऑनलाइन और ऑफलाइन कारोबार, गैज़ेट वर्ल्ड, डिजिटल टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल, एजुकेशन पर पैनी नज़र रखते हैं. ग्रेटर नोएडा में हुई फार्मूला वन रेसिंग को लगातार दो साल कवर किया. एक्सपो मार्ट की शुरुआत से लेकर वहां होने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों-संगोष्ठियों की रिपोर्टिंग.

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