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वैज्ञानिकों ने लैब में बनाया शुक्राणु, लेकिन इस्तेमाल से अभी बहुत दूर है

रंजन क्रास्टा | Updated on: 4 November 2015, 12:23 IST
QUICK PILL
  • फ्रांसीसी वैज्ञानिकों ने दुनिया का पहला कृत्रिम शुक्राणु तैयार करने का दावा किया है.
  • प्रजनन अक्षमता का सामना करने वाले वाले दंपतियों को मिल सकता है इसका लाभ.

गूगल सर्च इंजन में जब आप शुक्राणु (स्पर्म) टाइप करेंगे तो आपको ज्यादातर परिणाम शुक्राणुओं की गिनती और शुक्राणु दान से जुड़े होंगे. गूगल की मानें तो लोग प्रजनन संबंधी दिक्कतों के बारे में ज्यादा सर्च करते हैं.

यह एक ऐसी समस्या है जिसके बारे में ज्यादातर लोग खुलकर बात नहीं करना चाहते. लेकिन गूगल सर्च के नतीजों से साफ है कि इन समस्याओं से परेशान लोगों की संख्या अच्छी खासी है.

अब वैज्ञानिक ऐसे लोगों के लिए नई ख़ुशखबरी लेकर आए हैं. जिससे ऐसे लोगों की जिंदगी में खुशियां वापस आ सकती हैं.

फ्रांसीसी वैज्ञानिकों की एक टीम ने मूल प्रजनन कोशिकाओं से 'दुनिया का पहला' लैब में विकसित मानव शुक्राणु तैयार किया है.

फ्रांस के लियोन स्थिति कैलिस्टेम बायोटेक के वैज्ञानिकों का दावा है कि उनकी खोज से पुरुषों में प्रजनन अक्षमता को दूर करने में मदद मिलेगी. इन वैज्ञानिकों ने इस प्रणाली का पेटेंट भी करा लिया है. वैज्ञानिकों के अनुसार इस शोध में सफलता पाने में उन्हें करीब 20 साल लगे.

पुरुषों के अंडकोष में पायी जाने वाली सेमीनिफेरस नलिकाओं में मौजूद तरल पदार्थ से शुक्राणुओं का निर्माण होता है. वैज्ञानिक पहले इस तरल पदार्थ को तैयार करते हैं. वैज्ञानिकों द्वारा तैयार कृत्रिम तरल से अविकसित कोशिकाएं (स्पर्ममैटोगोनिया) पूर्ण शुक्राणु कोशिका के रूप में विकसित होने में सफल रहीं.

वैज्ञानिकों ने प्रजनन में अक्षम पुरुषों से स्पर्ममैटोगोनिया लिया था. कंपनी की तरफ़ से जारी बयान के अनुसार उसने इस 2014 के शुरुआत में ही इस विधि से पूर्ण विकसित शुक्राणु विकसित कर लिए थे.

वैज्ञानिकों का दावा अगर सही साबित हुआ तो प्रजनन अक्षमता के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक सफलता होगी.

प्रजनन अक्षमता का सामना करने वाली दंपतियों में करीब चालीस 40 फीसदी मामलों में इसके लिए  पुरुष जिम्मेदार होते हैं. कैलिस्टैम की इस खोज के बाद प्रजनन में अक्षम पुरुष अपनी प्रजनन कोशिकाओं संरक्षित करवा सकते हैं और जब वो पिता बनना चाहें उनका प्रयोग कर सकते हैं.

अभी अपनी उम्मीदों को ज्यादा बढ़ावा ना दें

फ्रांसीसी कंपनी के दावे के बावजूद बेहतर यही होगा कि संतान की समस्या से परेशान दंपति अभी ज्यादा उत्साहित न हों.

कैलिस्टेम ने भले ही पेटेंट हासिल कर लिया है और इस खोज के बारे में सार्वजनिक दावे किए हों लेकिन कंपनी को पता नहीं है कि कृत्रिम शुक्राणु असलियत में कितना कारगर होंगे. कंपनी का दावा है कि कृत्रिम शुक्राणु की मार्फोलॉजी सामान्य है लेकिन ये सचमुच काम करता है या नहीं इसकी जांच अभी नहीं हुई है.

कृत्रिम शुक्राणु की तुलना वास्तविक प्रभावी शुक्राणुओं से करने के लिए वैज्ञानिक प्रयोग करना शुरू करेंगे. शोध टीम के दावे के अनुसार चूहे और बंदरों के कृत्रिम शुक्राणुओं का निर्माण किया गया था. अब चूहों पर प्रयोग करके देखा जाएगा कि क्या कृत्रिम शुक्राणु से प्रजनन में सफलता मिल सकती है.

मानव शुक्राणुों के निर्माण में अभी लंबा वक्त लगेगा क्योंकि इसके लिए न केवल वैज्ञानिक बल्कि नैतिक चुनौतियों का भी सामना करना होगा.दुनिया भर के वैज्ञानिक अभी फ्रांसीसी कंपनी के दावों पर शंका जाहिर कर रहे हैं. कंपनी के दावों पर इसलिए भी संदेह जताया जा रहा है कि उसने अपने शोध परिणामों को अब तक किसी पीयर-रिव्यू जर्नल में प्रकाशित नहीं करवाया है.

अगर यह प्रक्रिया काम करती है तब भी प्रजनन अक्षमता के उपचार में इसका प्रयोग करने में काफी वक्त लगेगा. अगर ये प्रयोग सफल हो भी जाता है तो इससे उन पुरुषों को कोई राहत नहीं मिलेगी जिनमें जैविक विसंगतियों को कारण शुक्राणु का निर्माण ही नहीं होता.

First published: 4 November 2015, 12:23 IST
 
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