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वैज्ञानिकों को चांद की सतह पर दिखाई दी दरार, अहम जानकारी जुटाने में लगा नासा

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 October 2020, 8:59 IST

Scientists discover strange crack expaning on Moon Surface: दुनियाभर के वैज्ञानिक (Scientist) बीते कई दशक से चंद्रमा (Moon) के रहस्य को जानने की कोशिश कर रहे हैं. इस दौरान वैज्ञानिकों को चंद्रमा के बारे में कई तरह के चौकाने वाले तथ्य मिले हैं. अब वैज्ञानिकों को चंद्रमा की सतह पर दराद दिखाई दी है. जिसे लेकर वैज्ञानिक हैरान हैं. बता दें कि सौर मंडल में पृथ्वी (Earth) का एक मात्र प्राकृतिक उपग्रह (Natural Satellite) चंद्रमा ही है. चंद्रमा की चमक अपनी खुद की नहीं है बल्कि ये सूरज के प्रकाश से चमकता है.

पिछले काफी समय से चांद को लेकर वैज्ञानिक अध्ययन कर रहे हैं. हाल ही में भारत समेत दुनिया के कई देशों ने चंद्रमा पर अपने अभियान भेजे हैं. चीन ने रोवर, तो भारत ने भी एक साल पहले अपना ऑर्बिटर चंद्रमा की सतह पर अध्ययन के लिए भेजा था. नासा भी चार साल के अंदर दो लोगों को चंद्रमा की सतह पर उतारने की योजना पर तेजी से काम कर रहा है. इसी बीच चांद पर मिली एक दरार ने वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है. चंद्रमा का गुरूत्व पृथ्वी के महासागरों पर ज्वार भाटा का प्रभाव देता है. वहीं आमौतर पर यह उपग्रह दिशासूचक की तरह भी काम करता है और कई देशों के कैलेंडर भी इसके चाल पर निर्भर हैं.


अगर चांद नहीं होता तो धरती पर दिन-रात 24 घंटे के बजाए सिर्फ छह से 12 घंटे का ही होता. एक साल में 365 दिन नहीं बल्कि 1000 से 1400 के आसपास दिन होते. इतना कुछ होने के बावजूद भी चंद्रमा के अनगिनत रहस्य अभी भी छिपे हुए हैं. वहीं वैज्ञानिक अभी भी चंद्रमा के बारे में अहम जानकारियां हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि चद्रमा के अध्ययन से हमें पृथ्वी और चंद्रमा दोनों की उत्पत्ति की जानकारी मिल सकती है. नासा के अपोलो अभियानों के जरिए चांद से लाए गए पत्थरों के अध्ययन बताते हैं कि चंद्रमा और पृथ्वी दोनों की ही उत्पत्ति लगभग एक साथ ही 4.6 अरब साल पहले हुई थी.

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चंद्रमा उपग्रह पर शोध के लिए कई रोबोटिक अंतरिक्षयान भेजे जा चुके हैं. इनसे मिली जानकारियों का वैज्ञानिक अध्ययन करते रहते हैं और नई-नई जानकारियों के बारे में बताते हैं. कुछ इसी तरह की एक अनोखी खोज ने शोधकर्ताओं को हैरान कर दिया है. उन्होंने चंद्रमा की सतह पर एक अजीब सी दरार देखी है. स्मिथसन इंस्टीट्यूट के इस अध्ययन में अपोलो 17 के दौरान लगाए गए सेंसर्स के माध्यम से शोधकर्ताओं ने मून के सरफेर पर मौजूद इस फॉल्ट के बारे में पता लगाया है.

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शोधकर्ताओं को आंकड़ों से यह बात पता चला है कि चांद की सतह पर यह रहस्यमय दरार एक शक्तिशाली झटके की वजह से आई है, जिसका रिक्टर स्केल पर मान 5.5 के करीब पाया गया है. वैसे यह भूकंप धरती पर इमारतों को नुकसान पहुंचाने के लिए काफी है. इस घटना के बाद किए गए अध्ययन से पता चलता है कि चांद पर भूकंपीय गतिविधि होती होंगी.

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First published: 5 October 2020, 8:59 IST
 
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