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स्कॉटलैंड: जिसे गड्ढा समझा वो डायनासोर के पैरों का निशान निकला

असद अली | Updated on: 7 December 2015, 19:36 IST
QUICK PILL
  • स्कॉटलैंड में मिले हैं सॉरोपोड डायनासोर के पैरों के नए\r\nनिशान. उनके पैरों\r\nका सबसे बड़ा निशान करीब 2.3\r\nफीट का है.
  • वैज्ञानिकों का अनुमान है कि सॉरोपोड धरती पर क़रीब 16 करोड़ साल पहले रहे होंगे. शाकाहारी होने के कारण इन्हें दोस्ताना स्वभाव वाला माना जाता है.

स्कॉटलैंड में सब कुछ है, स्कॉच व्हिस्की, किल्ट (पारंपरिक परिधान), मिथकीय पक्षी लॉख़ नेस मॉन्सटर और डायनासोर. डायनासोर काफ़ी पहले धरती से विलुप्त हो गये लेकिन इनमें से कम से कम दो चीजें आपको आज भी दिख जाएंगी.

स्कॉटलैंड के आइल ऑफ स्काई इलाके में शोधकर्ताओं को डायनासोर के पैरों के नए निशान मिले हैं. इस निशान को सॉरोपोड प्रजाति के डायनासोरों का माना जा रहा है. यह इलाका पहले ही से डायनासोर साइट के रूप में मशहूर है.

dinosaur

सॉरोपोड के बारे में एक शोध हाल में ही स्कॉटिश जर्नल में प्रकाशित हुआ है. यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग के जीवाश्म विज्ञानी स्टीव ब्रुसेट के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने समुद्र से बाहर चट्टान के एक खंड में इनके पैरों का निशान खोजा. ब्रुसेट की टीम स्काई के स्टैफ़िन म्यूजियम और नेशनल म्यूजियम के साथ मिलकर काम कर रही थी. संयोग से उन्हें सॉरोपोड के निशान मिल गए.

नेशनल ज्योग्राफिक चैनल को ब्रुसेट ने बताया, '' हमलोग द्वीप के उत्तर-पूर्वी सिरे के तट की ओर जा रहे थे. वहां कुछ समय बिताने के बाद मुझे और जीवाश्म विशेषज्ञ टॉम चलांड्स को गड्ढे दिखे.'' यह डायनासोर के पैरों के निशान निकले.

ब्रुसेट ने बताया कि पांव के अव्यवस्थित ट्रैक देखकर ऐसा लगता है जैसे कि वह कोई डांस फ्लोर रहा हो या डायनासोर का डिस्को

यह निशान 82 मीटर के दायरे में फैला हुआ है. पैरों के आकार के निशान से ब्रुसेट की टीम ने अनुमान लगाया है कि ये सॉरोपोड मध्य जुरासिक काल में रहे होंगे. टीम के अनुसार डायनासोर 16.1 करोड़ साल पहले रहे होंगे. पैरों का सबसे बड़ा निशान करीब 2.3 फीट का है.

ब्रुसेट ने लाइव साइंस को बताया कि ये जीव 49 फीट (15 मीटर) लंबे और 10 टन भारी रहे होंगे. सॉरोपोड पृथ्वी पर अब तक पाए गए सभी जीवों में सबसे बड़े थे. इनके अस्तित्व का निशान आगे किसी और भी जगह मिलने की संभावना है.

इसी साल चीन में मैमेनचाइसाउराइड्स प्रजाति (सॉरोपोड का एक प्रकार) के डायनासोर की खोज हुई है. इसे 'कीजियांग के ड्रैगन' नाम से पुकारा गया. चीन के जिस जगह में इसकी खोज हुई है उस क्षेत्र को डायनासोरों की धरती भी कहा जाता है.

इस खोज को वर्टब्रैट पेलीअन्टालजी जर्नल में प्रकाशित किया गया है. इसमें कहा गया है कि 'ड्रैगन' की लंबाई 15 मीटर हो सकती है.

इस साल जून में प्रोफेसर फिल मैनिंग ने ब्रिटेन के सबसे पुरान सॉरोपोड डायनासोर की खोज की है. जीवाश्म हड्डी की खोज की कहानी बहुत ही नाटकीय है

मैनिंग नार्थ यार्कशायर की तटरेखा के पास टहल रहे थे अचानक पत्थर का एक भारी हिस्सा पास के पहाड़ से गिरा. पत्थर जैसा दिखने वाला हिस्सा जीवाश्म रीढ़ निकला. मैनेचेस्टर विश्वविद्यालय के साथ मैनिंग और उनकी टीम ने इस पर अध्ययन किया. बाद में इसे ब्रिटेन का सबसे पुराना सॉरोपोड बताया. इसका नाम एलन रखा गया है.

मैनिंग ने बताया कि हमलोगों ने सॉरोपोड के अलग-अलग रूपों को देखा है. वे अविश्नसनीय हैं. चाहे इन डायनासोरों का आकार कितना भी बड़ा हो लेकिन शाकाहारी होने के कारण उन्हें दोस्ताना स्वभाव वाला माना जाता है. खतरनाक मांसाहारी टी-रैक्स की तुलना में इन्हें बहुत ज्यादा मित्रवत या दोस्ताना माना गया है.

1993 में डायनासोर पर आई फिल्म जुरासिक पार्क ने इन्हें व्यवहार और खानपान की आदतों के आधार दिखाने का चलन शुरू किया. जैसे सॉरोपोड को अच्छा, वेलोसाइरैप्टोरस को बुरा और टी-रैक्स को सबसे खतरनाक दिखाया गया. यह चलन हाल तक जारी था. डिज़्नी पिक्चर्स की नई फिल्म 'द गुड डायनासोर' के मुख्य किरदार सॉरोपोड को बेहद दोस्ताना दिखाया गया है. एनीमेशन के जरिए आर्लो (सॉरोपोड) को बच्चों का दोस्त बना दिया गया.

सॉरोपोड सिर्फ प्रकृति प्रेमी नहीं थे. उन्हें घूमना फिरना और मिलना जुलना भी पसंद था

जीवाश्म और डायनासोर की बात चली है तो मैरी एनिंग की याद आना स्वाभाविक है. आपको मशहूर टंगट्विस्टर "शी सेल्स सीशेल्स बाइ द सीशोर" शायद याद हो. 1908 में बना ये टंग ट्विस्टर इंग्लैंड में पैदा हुई मैरी एनिंग के जीवन पर आधारित है. एनिंग जानी मानी जीवाश्म विज्ञानी रही हैं. उन्होंने 1800 में इचथाइसोर जीवाश्म की खोज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. इसके अलावा उन्होंने कई डायनासोरों की खोज की थी. गरीब परिवार से आने वाली एनिंग पर्यटकों को शी-सेल्स को बेचकर अपना जीवन-यापन करती थीं.

First published: 7 December 2015, 19:36 IST
 
असद अली @asadali1989

Asad Ali is another cattle class journalist trying to cover Current affairs and Culture when he isn't busy not saving the world.

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