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शिवा अय्यादुरई बनाम गॉकरः किसने किया ईमेल का आविष्कार?

रंजन क्रास्टा | Updated on: 23 August 2016, 18:26 IST

एक सात साल का बच्चा और उसके माता-पिता, जो किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं, अपने सपनों को पूरा करने के लिए अमेरिका पहुंचते हैं. उसके केवल सात साल बाद वह बच्चा, जो कभी स्कूल छोड़ने की स्थिति में पहुंच गया था, एक मेंटर से मिलता है और ईमेल का आविष्कार करता है. उसके बाद वह नामी मेसाच्युसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी (एमआईटी) से चार डिग्रियां हासिल करता है और हॉलीवुड की एक एक्ट्रेस से शादी करता है.

उसकी उपलब्धियों की प्रशंसा वॉशिंगटन पोस्ट से लेकर टाइम पत्रिका तक होती है और वह अपना कोड स्मिथसोनियन इंस्टिट्यूट के सामने पेश भी करता है. कुछ ऐसी ही कहानियों पर फिल्में बनायी जाती हैं. लेकिन मैं किसी हॉलीवुड स्टूडियो के सामने किसी फिल्म की कहानी नहीं पेश कर रहा.

यह शिवा अय्यादुरई की कहानी है.

फिर भी अय्यादुरई की कहानी पर अब तक कोई फिल्म नहीं बनी है. इसके बजाय, उन्होंने अमेरिकी मीडिया हाउस गॉकर पर 3.5 करोड़ डॉलर का मुकदमा ठोंक दिया है. क्यों?

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उन्हें धोखेबाज कहने के लिए. दरअसल वॉशिंगटन पोस्ट में उनके बारे में लेख छपने के बाद गॉकर की सहयोगी गिज्मोडो ने साल 2012 में एक लेख छापा था, जिसने अय्यादुरई के मुताबिक, धीरे-धीरे करके उनके ईमेल का आविष्कार करने के दावे को नुकसान पहुंचाया.

वॉशिंगटन पोस्ट में जो आलेख छपा था, वह अब एक सुधार और एक स्पष्टीकरण के साथ फिर से पेश किया गया है. उस आलेख में छपा था कि अय्यादुरई इलेक्ट्रॉनिक मैसेजिंग के जन्मदाता थे. लेकिन अब दोनों ही बार उस आलेख में छपी इस बात को अस्वीकृत करने की कोशिश की गई है.

साथ ही अब इस दावे को भी नकारने का प्रयास किया गया है कि अय्यादुरई के कोड ने पहली बार सीसी, बीसीसी, टू और फ्रॉम जैसे तत्व शामिल किये, जो ईमेल के अनिवार्य तत्व हैं.

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हालांकि, इन सब कोशिशों से एक बात तय कर दी गई है कि ‘ईमेल’ नाम के कम्प्यूटर प्रोग्राम पर कॉपीराइट का अधिकार अय्यादुरई के ही पास है.

तो क्या गॉकर के खिलाफ उनका मामला बनता है?

अंकित फड़िया– हैकिंग के क्षेत्र में तथाकथित विलक्षण प्रतिभा- के इसी तरह के मामले और क्रेग राइट ने बिटक्वाइन का आविष्कार किया या नहीं, जैसे ताजे मामले के बाद अय्यादुरई को धूर्त कह कर खारिज करना आसान है. क्योंकि पिछले दिनों रेमंड टॉमलिंसन के मरने पर दुनिया भर के मीडिया हाउस ने यह बताते हुए उनके प्रशंसा गीत गाये थे कि ईमेल उन्होंने ही बनाया था.

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लेकिन टॉमलिंसन के बारे में इस दावे के खिलाफ अय्यादुरई अपनी लड़ाई आक्रामक तरीके से लड़ रहे हैं. दरअसल टॉमलिंसन की मृत्यु के थोड़े समय बाद अय्यादुरई ने इसके खिलाफ ट्वीट किया.

अपने ट्वीट में अय्यादुरई ने खुद को जातिवाद के शिकार के तौर पर पेश किया, टॉमलिंसन के तत्कालीन नियोक्ता को मौत का अग्रदूत कहा और अपने मृत साथी को कलंकित कर दिया. इसे एक अच्छा कदम तो कतई नहीं कहा जा सकता, लेकिन अगर आपसे इतनी बड़ी उपलब्धि छीन ली जाए, तो आपका गुस्सा होना तो स्वाभाविक ही है.

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इसके अलावा यह भी सच है कि आविष्कारों के इतिहास में श्रेय चुरा लेने के कई मामले आ चुके हैं. कई लोग तर्क देते हैं कि डीएनए की डबल-हेलिक्स संरचना की खोज का श्रेय रोजलैंड फ्रैंकलिन को दिया जाना चाहिए था. बिजली के बल्ब, मौलिक विचार के लिए हर कार्टून का सांकेतिक निरूपण, का श्रेय थॉमस एडिसन ने निकोला टेस्ला से चुराया था.

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तो क्या इस बात पर विश्वास करना इतना मुश्किल है कि इस पहली पीढ़ी के अमेरिकी, जो भारतीय मूल का है, ने वाकई ऐसा किया था? शायद नहीं.

फिर भी, यह देखते हुए कि ईमेल (साल 2015 में 26 करोड़ उपयोगकर्ता) पूरी दुनिया के लिए कितना अहम और अनिवार्य है, आपको लगता होगा कि इस मामले का निर्णय तो बहुत आसान होगा. हालांकि, सच थोड़ा अधिक संदिग्ध है.

अय्यादुरई का शिक्षा संस्थान उनके आविष्कार से 10 साल पहले से ही इलेक्ट्रॉनिक मैसेजिंग का इस्तेमाल कर रहा था

हालांकि हम इतना तो निश्चित तौर पर जानते हैं कि अय्यादुरई ने जो बनाया, वह इलेक्ट्रॉनिक मैसेजिंग की पहली घटना नहीं थी. यह तो उनके आविष्कार से बहुत पहले ही हो चुका था. साल 1978 में ही पेपर-बेस्ड ऑफिस कम्युनिकेशन सिस्टम का इलेक्ट्रॉनिक प्रतिरूप आ चुका था.

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दरअसल, जैसा कि जाने-माने कम्प्यूटर इतिहासकार थॉमस हेग बताते हैं, अय्यादुरई का शिक्षा संस्थान उनके आविष्कार से 10 साल पहले से ही इलेक्ट्रॉनिक मैसेजिंग का इस्तेमाल कर रहा था.

यहां तक कि आधुनिक ईमेल व्यवस्था की संकल्पना, जिसमें ‘टू’, ‘फ्रॉम’, ‘सीसी’, ‘बीसीसी’ आते हैं, अय्यादुरई से काफी पहले से ही एर्पोनेट कोडर्स द्वारा इस्तेमाल की जा रही थी. ध्यान रहे कि वॉशिंगटन पोस्ट ने गलती करते हुए इसे अय्यादुरई का मौलिक काम बता दिया था.

टॉमलिंसन से पहले यूजर्स एक ही नेटवर्क सिस्टम पर मैसेज भेज सकते थे. टॉमलिन्सन ने इस प्रोग्राम में सुधार किया. जो बात टॉमलिंसन को बाकी सब लोगों से ऊपर ला खड़ा करती है वह यह है कि उन्होंने एक ऐसी व्यवस्था तैयार की जिसके जरिये अलग नेटवर्क्स पर मौजूद लोगों के बीच मैसेज भेजे जा सकते थे. उन्होंने @ सिम्बल का प्रचलन आरंभ किया, जो आज ईमेल का समानार्थी माना जाता है.

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फिर भी ‘www.inventorofemail.com’ वेब डोमेन का मालिकाना हक टॉमलिन्सन के हाथ में नहीं है. यह अय्यादुरई के पास है. यही नहीं, अय्यादुरई के पास ही ‘ईमेल’ का कॉपीराइट भी है.

दूसरा बिन्दु अय्यादुरई के लिए काफी अहम है. अपने प्रोग्राम की व्याख्या करने के लिए उन्होंने ‘ईमेल’ शब्द का इस्तेमाल किया और मुझसे पहले अनगिनत लोग इस बात की ओर इशारा कर चुके हैं कि इसे और ईमेल के आविष्कार को एक नहीं माना जा सकता.

यही नहीं, अय्यादुरई के अलावा कोई भी ‘ईमेल के आविष्कारक’ की पदवी पर दावे करने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहा क्योंकि इसका मौजूदा रूप कई अलग-अलग लोगों के कामों की वजह से सामने आया है, और उनमें सबसे आगे हैं रेमंड टॉमलिंसन.

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उनके दावों के खिलाफ जितने भी सबूत हैं, उनको देखते हुए आप यह उम्मीद कर सकते हैं कि अय्यादुरई को सही संदेश मिल चुका होगा. लेकिन गॉकर को मुकदमेबाजी में खींचने वाले हल्क होगॉन को हाल में मिली कामयाबी ने अय्यादुरई को उत्साहित किया है और उन्होंने उस आलेख के प्रकाशन के पूरे चार साल के बाद इस मीडिया हाउस पर मुकदमा कर दिया है.

First published: 23 August 2016, 18:26 IST
 
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