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फेसबुक मैसेंजर से शॉपिंगः अमेजॉन-पेटीएम-फ्रीचार्ज जैसों को टक्कर देनी होगी

अमित कुमार बाजपेयी | Updated on: 13 September 2016, 13:38 IST

फेसबुक ने घोषणा की है कि जल्द ही मैसेंजर ऐप के जरिये यूजर्स खरीदारी कर सकेंगे और चैटबोट्स का इस्तेमाल कर सीधे भुगतान (पेमेंट) करेंगे. इसका मतलब कि अब बिना मैसेंजर ऐप से बाहर निकले ही यूजर्स शॉपिंग-पेमेंट कर  सकेंगे. लेकिन जब बाजार में पेटीएम-फ्रीचार्ज-मोबीक्विक समेत तमाम थर्ड पार्टी ऑनलाइन वॉलेट-पेमेंट ऐप मौजूद हैं, फेसबुक कैसे इन्हें पीछे करती है देखने वाली बात है. 

दरअसल टेकक्रंच डिसरप्ट 2016 आयोजन के दौरान फेसबुक मैसेंजर के प्रमुख डेविड मार्कस ने घोषणा की कि एफबी मैसेंजर में बोट्स पहले से सेव किए गए क्रेडिट-डेबिट कार्ड की डिटेल्स का इस्तेमाल करेंगे ताकि तुरंत भुगतान-खरीदारी हो सके.

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मार्कस ने यह भी खुलासा किया कि मैसेंजर के लेटेस्ट वर्जन वाले ऐप के जरिये यूजर को 30 हजार चैटबोट्स मिलेंगे, ताकि भुगतान पूरा होने की क्षमता बढ़ सके. यह फीचर्स ऐप के वर्जन 1.2 के जरिये मिलेंगे. इसे जल्द ही यूजर्स के लिए जारी कर दिया जाएगा.

फेसबुक द्वारा जारी एक बयान में कहा गया, "मैसेंजर के जरिये व्यापारी सीधे ग्राहकों को अपनी सेवाएं और उत्पाद बेच सकें इसके लिए मैसेजेज और पेमेंट्स की हम शुरुआत कर रहे हैं. ग्राहक बिना मैसेंजर ऐप छोड़े कुछ आसान क्लिक्स में इसे देख सकेंगे."

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मार्कस ने कहा, "फेसबुक मैसेंजर चैटबोट्स वीजा, मास्टरकार्ड, अमेरिकन एक्सप्रेस, स्ट्राइप, पेपल और ब्रेनट्री जैसी तमाम पेमेंट सर्विसेज और क्रेडिट कार्ड को सपोर्ट करेंगे. यूजर्स को चैट में ही 'बाई नाऊ' का विकल्प दिखेगा जिसे क्लिक करके पेमेंट प्रॉसेस शुरू हो जाएगा. 

इस पर क्लिक करने के बाद यूजर्स को जल्द ही पेमेंट कंफर्मेशन टैब दिखेगा और फेसबुक या मैसेंजर अकाउंट से जुड़ा डिफॉल्ट कार्ड वहां स्वतः भुगतान के लिए नजर आने लगेगा."

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फिलहाल यह फीचर बीटा वर्जन मेें डेवलपर्स तक ही सीमित है. व्यापारी और अन्य डेवलपर्स इसके इस्तेमाल और इसे आगे और विकसित करने के लिए आवेदन कर सकते हैं. 

क्यों पड़ी फेसबुक को इसकी जरूरत

दरअसल फेसबुक द्वारा की जा रही यह शुरुआत यूजर्स को ज्यादा से ज्यादा वक्त तक अपने ऐप से जोड़े रखने के लिए की जा रही है. जितना ज्यादा लोग मैसेंजर का इस्तेमाल करेंगे, फेसबुक के सक्रिय सदस्यों की संख्या बढ़ेगी और मुनाफा बढ़ेगा. एक ही ऐप के अंदर शॉपिंग-पेमेंट की सुविधा देने से यूजर्स को किसी अन्य ऐप पर स्विच नहीं करना पड़ेगा.

इसके साथ ही शॉपिंग-पेमेंट करने वाले यूजर्स के क्रेडिट कार्ड की डिटेल्स भी फेसबुक के पास पहुंच जाएगी. जबकि व्यापारी भी अपने उत्पाद बेचने के लिए इससे जुड़ेंगे जो फेसबुक यूजर्स की संख्या में ईजाफा करेगा. 

फेसबुुक के सामने चुनौतियां

फिलहाल बाजार में फेसबुक को एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और इंस्टैंट मैसेंजर के रूप में देखा जाता है. लेकिन शॉपिंग-पेमेंट के विकल्प जोड़ने से यह ई-कॉमर्स में अप्रत्यक्ष रूप सेे प्रवेश करने की शुरुआत कर रहा है.

बाजार में पहले से ही अमेजॉन, ईबे, फ्लिपकार्ट, अलीएक्सप्रेस, स्नैपडील समेत तमाम कंपनियां ई-कॉमर्स सेवाएं मुहैया करा रही हैं. इनमें उत्पादों के दाम को लेकर प्रतिस्पर्धा काफी तेज है. 

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वहीं, थर्ड पार्टी पेमेंट गैटवे जैसे पेटीएम-फ्रीचार्ज-मोबीक्विक आदि आजकल ऑनलाइन-ऑफलाइन खरीदारी करने पर ग्राहकों को प्वाइंट्स, कैशबैक, डिस्काउंट समेत कई मुफ्त ऑफर्स भी देते हैं.

ऐसे में फेसबुक पर सेलर-बायर के बीच सीधे सौदा होने से इन्हें फर्क पड़ेगा और यह थर्ड पार्टी पेमेंट गेटवे प्रतिस्पर्धा में और ज्यादा सुविधाएं-सेवाएं-छूट देंगी. जाहिर है फेसबुक के मैसेंजर प्लेटफॉर्म पर अन्य ई-कॉमर्स साइटों से कंपैरिजन (तुलना) करने की सुविधा नहीं होगी और ग्राहकों को सीधे ही खरीदारी करनी होगी, इसलिए ग्राहकों के पास बेस्ट डील के काफी कम विकल्प ही होंगे.

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वन टू वन शॉपिंग का फंडा

फेसबुक, मैसेंजर के जरिये यूजर्स की पसंद के आधार पर चैटबोट्स के सहारे उन्हें संबंधित उत्पाद-सेवाएं दिखाएगा. जिसे लेने के लिए यूजर्स को पेमेंट करना होगा. वन टू वन शॉपिंग का यह फंडा यूजर्स को कितना पसदं आता है आने वाला वक्त ही बताएगा. लेकिन इतना तो तय है कि मैसेंजर के जरिये शॉपिंग प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराना अलग बात है और ग्राहकों को शॉपिंग करवाना अलग.

First published: 13 September 2016, 13:38 IST
 
अमित कुमार बाजपेयी @amit_bajpai2000

पत्रकारिता में एक दशक से ज्यादा का अनुभव. ऑनलाइन और ऑफलाइन कारोबार, गैज़ेट वर्ल्ड, डिजिटल टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल, एजुकेशन पर पैनी नज़र रखते हैं. ग्रेटर नोएडा में हुई फार्मूला वन रेसिंग को लगातार दो साल कवर किया. एक्सपो मार्ट की शुरुआत से लेकर वहां होने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों-संगोष्ठियों की रिपोर्टिंग.

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