Home » साइंस-टेक » Smartphone can be used with movement of your eyes soon
 

अब आंखों के इशारे पर चलेगा आपका स्मार्टफोन

अमित कुमार बाजपेयी | Updated on: 10 February 2017, 1:49 IST
QUICK PILL

अब जल्द ही आपका स्मार्टफोन आपकी उंगलियों के नहीं बल्कि आपकी आंखों के इशारे पर काम करेगा. भारतीय मूल के एक छात्र समेत अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं का एक दल एक ऐसा सॉफ्टवेयर विकसित कर रहा है जिससे स्मार्टफोन में गेमिंग, ऐप्स से जुड़ी गतिविधियां आंखों की मूवमेंट के हिसाब से पूरी हो जाएंगी.

अमेरिका के प्रतिष्ठित मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी), यूनिवर्सिटी ऑफ जॉर्जिया और जर्मनी के मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट फॉर इंफॉर्मैटिक्स का एक दल इसमें जुटा हुआ है. इस दल ने अब तक सॉफ्टवेयर को इतना प्रशिक्षित करने में सफलता प्राप्त कर ली है कि पता चल सके कि आपकी आंखें कहां देख रही हैं. 

अभी स्मार्टफोन नहीं बनाना चाहती है गूगल

मोबाइल फोन के एक सेंटीमीटर और टैबलेट के 1.7 सेंटीमीटर क्षेत्र में आंखें कहां देख रही हैं, यह सॉफ्टवेयर बिल्कुल सटीक पकड़ लेता है. इस शोध में शामिल एमआईटी के छात्र आदित्य खोसला के मुताबिक और ज्यादा डाटा के साथ इस सिस्टम की एक्युरेसी (सटीक) और ज्यादा बढ़ जाएगी.

इसके लिए शोधकर्ताओं ने गेजकैप्चर नामक एक ऐप बनाया और इससे यह डाटा एकत्रित किया कि लोग अलग-अलग स्थानों पर अपने मोबाइल में कहां देखते हैं.

मानें या नहीं: गूगल अगर चाहे तो एक मिनट में आपका कच्चा-चिट्ठा सामने रख देगा

यूजर्स की निगाहों की मूवमेंट देखने के लिए यह ऐप फोन के फ्रंट कैमरा का इस्तेमाल करता था और इसकी रिकॉर्डिंग कर लेता था. इसके लिए फोन की स्क्रीन पर तमाम डॉट्स दिखाए जाते थे. स्क्रीन पर दिखने वाले डॉट्स को यूजर्स बिल्कुल सही ढंग से देखें इसके लिए उन्हें बाद में डॉट्स के अंदर 'एल' या 'आर' लिखा दिखाया जाता था, जिसके बाद यूजर्स को प्रतिक्रिया स्वरूप मोबाइल स्क्रीन के बाएं या दाएं ओर टैप करना होता था.

गेजकैप्चर से मिली जानकारी का इस्तेमाल आईट्रैकर नामक सॉफ्टवेयर को प्रशिक्षित करने में किया गया. यह दोनों ही आईफोन पर चलने योग्य हैं. हैंडसेट का कैमरा यूजर के चेहरे को कैप्चर करता है और इसका सॉफ्टवेयर कई कारकों को देखता है जिसमें सिर की दिशा, स्थिति और आंखों का स्क्रीन में कहां पर फोकस है, आदि शामिल हैं.

अब हर जगह की तस्वीर नहीं खींच पाएगा आपका मोबाइल कैमरा

खोसला के मुताबिक अब तक 1,500 लोगों ने गेजकैप्चर को इस्तेमाल किया है और जब शोधकर्ता करीब 10 हजार लोगों का डाटा इकट्ठा कर लेंगे तब हम आईट्रैकर के एरर रेट को आधे सेंटीमीटर तक कम कर लेंगे. इससे आंख आधारित ऐप्स को इस्तेमाल करने की रेंज काफी बेहतर हो जाएगी.

इस शोध के नतीजे कंप्यूटर विजन एंड पैटर्न रिकगनिशन की वाशिंगटन के सिएटल स्थित आईईईई कॉन्फ्रेंस में पेश किए गए. 

First published: 3 July 2016, 3:40 IST
 
अमित कुमार बाजपेयी @amit_bajpai2000

पत्रकारिता में एक दशक से ज्यादा का अनुभव. ऑनलाइन और ऑफलाइन कारोबार, गैज़ेट वर्ल्ड, डिजिटल टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल, एजुकेशन पर पैनी नज़र रखते हैं. ग्रेटर नोएडा में हुई फार्मूला वन रेसिंग को लगातार दो साल कवर किया. एक्सपो मार्ट की शुरुआत से लेकर वहां होने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियोंं-संगोष्ठियों की रिपोर्टिंग.

पिछली कहानी
अगली कहानी