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Solar eclipse 2020 : वैज्ञानिकों के लिए उत्सव क्यों है सूर्य ग्रहण और क्या है ऋषि-मुनियों का कथन

कैच ब्यूरो | Updated on: 20 June 2020, 15:10 IST

Solar eclipse 2020 : : 21 जून 2020 दुनियाभर में सूर्यग्रहण का नजारा दिखाई देगा. दुनियाभर में अलग-अलग तरीकों के इसे देखने की व्यवस्था की गई है. आइये जानते हैं खगोल विज्ञान और हमारी धार्मिक मान्यताओं में सूर्य ग्रहण को किस रूप में देखा जाता है. खगोल शास्त्रियों नें गणित से निश्चित किया है कि 18 वर्ष 18 दिन की समयावधि में 41 सूर्य ग्रहण और 29 चन्द्रग्रहण होते हैं. उन्होंने बताया था कि एक वर्ष में 5 सूर्यग्रहण तथा 2 चन्द्रग्रहण तक आ सकते हैं.

अक्सर कहा जाता है कि सूर्यग्रहण की अपेक्षा चन्द्रग्रहण अधिक देखे जाते हैं लेकिन हकीकत में चन्द्र ग्रहण से अधिक सूर्यग्रहण होते हैं. 3 चन्द्रग्रहण पर 4 सूर्यग्रहण का अनुपात आता है. चन्द्रग्रहण अधिक देखे जाते हैं क्योंकि वे पृ्थ्वी के आधे से अधिक भाग में दिखाई देते हैं. जबकि इसके विपरीत सूर्यग्रहण पृ्थ्वी के बहुत बड़े भाग में सौ मील से कम चौडे और दो से तीन हजार मील लम्बे भूभाग में दिखलाई पडते हैं.


सूर्य ग्रहण विज्ञान के लिए किसी उत्सव से कम नहीं है. सूर्या ग्रहण ही वह समय होता है जब ब्राह्मंड में अनेकों विलक्षण एवं अद्भुत घटनाएं घटित होतीं हैं जिससे वैज्ञानिकों को नये तथ्यों को समझने का अवसर मिलता है.उदाहरण के लिए 1968 में वैज्ञानिक लार्कयर नें सूर्य ग्रहण पर वर्ण मंडल में हीलियम गैस की उपस्थिति का पता लगाया. आईन्स्टीन की गुरुत्वाकर्षण खोज में सूर्य ग्रहण का खास योगदान था. सूर्यग्रहण अधिकतम 10 हजार किलोमीटर लम्बे और 250 किलोमीटर चौडे क्षेत्र में ही देखा जाता है. सम्पूर्ण सूर्यग्रहण की वास्तविक अवधि ज्यादा से ज्यादा 11 मिनट ही हो सकती है.

माना जाता है कि सूर्य ग्रहण चन्द्र ग्रहण तथा उनकी पुनरावृत्ति की जानकारी ईसा से चार हजार पूर्व ही मौजूद थी. ऋग्वेद के अनुसार अत्रिमुनि के के पास यह ज्ञान था. कहा जाता है कि ऐसा भी माना जाता है कि मनीषियों को अत्यन्त प्राचीन समय से इन घटनाओं की जानकारी थी.

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कहा गया है कि ऋषि-मुनियों ने सूर्य ग्रहण के दौरान भोजन करने से मना किया था. उनकी मान्यता के अनुसार ग्रहण के समय में कीटाणु बहुलता से फैलते हैं और खाद्य वस्तु, जल आदि में सूक्ष्म जीवाणु एकत्रित होकर उसे दूषित करते हैं. ग्रहण के बाद स्नान करने का विधान इसलिए बनाया गया ताकि स्नान के दौरान शरीर के अंदर ऊष्मा का प्रवाह बढ़े और भीतर-बाहर के कीटाणु नष्ट हो जाएं.

तीन प्रकार के ग्रहण

सूर्य ग्रहण तीन प्रकार के होते हैं. पूर्ण सूर्य ग्रहण, उस समय होता है जब चन्द्रमा पृथ्वी के बेहद पास रहते हुए पृथ्वी और सूर्य के बीच में आती है. आंशिक सूर्य ग्रहण में चन्द्रमा सूर्य व पृथ्वी के बीच में इस तरह आते हैं कि सूर्य का कुछ ही भाग पृथ्वी से दिखाई नहीं देता है अर्थात चन्दमा, सूर्य के केवल कुछ भाग को ही अपनी छाया में ले पाता है. वलयाकार सूर्य ग्रहण में चन्द्रमा पृथ्वी के बहुत दूर रहते हुए पृथ्वी और सूर्य के बीच में आ जाता है अर्थात चन्द्र सूर्य को इस प्रकार से ढकता है, कि सूर्य का केवल मध्य भाग ही छाया क्षेत्र में आता है.

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First published: 20 June 2020, 15:05 IST
 
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