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एलियन ढूंढ़ने के इतिहास में अकेले नहीं स्टीफन हॉकिंग

रंजन क्रास्टा | Updated on: 3 November 2015, 14:34 IST
QUICK PILL
  • रूसी\r\nअरबपति यूरी मिलनर ने एलियन\r\nको खोजने के लिए दस करोड़ डॉलर\r\nकी परियोजना शुरू की है.
  • एलियन\r\nखोजने के लिए शुरू की गयी\r\n\'ब्रेकथू\r\nलिसेन\' नामक\r\nपरियोजना से मशहूर वैज्ञानिक\r\nस्टीफन हॉकिंग भी जुड़े हैं.

एलियन को लेकर आदमी हमेशा से ही जिज्ञासु रहा है. अगर ऐसी कोई सूची बनायी जाए कि आदमी को किन दस चीजों के बारे में जानने में सबसे ज्यादा रुचि रही है तो उसमें एलियन का नाम जरूर शामिल होगा.

किसी को लग सकता है कि जब दुनिया भूखमरी, गरीबी, बेरोजगारी, नई नई बीमारियों, कई इलाकों में चल रहे सैन्य संघर्षों में उलझी हुई तो एलियन की फिक्र करने वाले कम हो गए होंगे. लेकिन ऐसा ही नहीं. एलयिन को खोजने के लिए इंसान पहले से भी ज्यादा सक्रिय हो गया है.

अभी हाल ही में एलियन और उसकी खोज फिर चर्चा में आये जब रुसी अरबपति युरी मिलनर एलियन को ढूंढने के लिए दस करोड़ डॉलर की निजी संपत्ति दांव पर लगायी. उनकी इस परियोजना में उनका साथ दे रहे हैं मशहूर भौतिकीविद स्टीफेन हॉकिंग.

कमाल है न? बहुत नहीं थोड़ा ही सही, ये चौंकाने वाली बात है.

एक सनक

ब्रिटेन में हाल ही में हुए एक सर्वेक्षण में पता चला कि एलियन में यकीन रखने वालों की तादाद भगवान में यकीन रखने वालों से ज्यादा है. आम आदमी के जहन में एलियन की छवि फिल्में देखकर बनी है.

फिल्मों की मेहरबानी है कि अजीब कपड़े, टोपी, हाथ-पैरे-चेहरे-हाथ-आवाज वाले किसी असमान्य जीव को देखकर आपको ये लग जाये कि कहीं ये एलियन तो नहीं तो बड़ी बात नहीं होगी.

लेकिन आपको इसकी ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है क्योंकि एलियन कौन है और दिखता कैसा ये दुनिया के सबसे तेजदिमाग माने जाने वाले लोगों को भी नहीं पता. वो सुराग खोजने में बस लग हुए हैं.

नासा के वरिष्ठ अधिकारियों की मानें तो साल 2025 तक धरती की परिधि से बाहर कोई जीवन ढूंढ लिया जाएगा. यही नहीं स्टीफेन हॉकिंग ने भी यूरी मिलनर की 'ब्रेकथू लिसेन' परियोजना के उद्घाटन के मौके पर कहा था, "अनंत ब्रह्माण्ड में कहीं और भी जीवन जरूर होना चाहिए. "

यूरी मिलनर की परियोजना शुरू होने के दशकों पहले से ही सेटी (सर्च फॉर एक्सट्राटेरेस्ट्रियल इंटेलिजेंस) एलियन से संपर्क करने की कोशिश कर रहा है.

सेटी एलियन से संपर्क के लिए 1960 से ही रेडियो टेलिस्कोप का इस्तेमाल कर रहा है. थोड़ी देर के लिए ये मान भी लिया जाये कि एलियन का अस्तित्व है तो सेटी के अब तक प्रयासों के नतीजे से ये साफ है कि एलियन मनुष्यों से बात नहीं करना चाहते.

क्योंकि 1960 से अब तक भेजे गये सिग्नलों के जवाब में सेटी को अंतरिक्ष के किसी हिस्से से 72 सेकेंड का एक सिग्नल (जिसे WOW! सिग्नल कहा जाता है) मिला है. ये सिग्नल किसी तारे या ग्रह से नहीं आया. सेटी को अब तक इसके अलावा कुछ नहीं सुनाई दिया है लेकिन एकतरफा प्यार में पागल प्रेमी की तरह वो एलियन के पीछे पड़ा है.

अगर सेटी का काम बस रेडियो सिग्नल भेजना और किसी तरह के जवाब का इंतजार करना भर होता तो शायद हम उनका जिक्र नहीं कर रहे होते. सेटी एलियन से संपर्क करने को लेकर काफी गंभीर है और वो इसके लिए बहुत सक्रियता से प्रयासरत भी है. अपने 'सेटी एक्टिव प्रोग्राम' के जरिए वो जीवन की संभावना वाले सभी ग्रहों पर एनकोडेड रेडियो सिग्नल भेजना चाहता है.

दरअसल, सेटी के निदेशक सेथ शोस्तक इंटरनेट पर मौजूद सारी सामग्री को ही एनकोडेड रेडियो संदेश के रूप में अंतरिक्ष में भेजना चाहते हैं. जरा सोचिए, अगर उनकी सोच को अमलीजामा पहना दिया जाए तो अंतरिक्ष में धरती से क्या संदेश जाएगा...यही न कि धरती पर सबसे ज्यादा लोकप्रिय पोर्न है क्योंकि इंटरनेट का सबसे बड़ा हिस्सा उन्हीं के तरह-तरह के पोर्न के कब्जे में ही है.

आपको लग सकता है कि अगर इंसानों ने ऐसी हरकत की और अंतरिक्ष में कोई इंटेलिजेंट जीव हुआ तो उसे ये हैरत बहुत नागवार गुजरेगी जैसे आप अपने ईमेल में आने वाले अनचाहे अश्लील स्पैम मेल से खीझ जाते हैं.

अगर आप ऐसा सोचते हैं तो आप अकेले नहीं है. स्टीफेन हॉकिंग भी कुछ ऐसा ही मानते हैं. उन्हें लगता है कि मनुष्यों की ऐसी हरकतों से ऐसा संकेत जा सकता है कि मनुष्य एलियन का शत्रु है.

कोशिशों का अंत नहीं

रूसी वैज्ञानिकों ने 1999 में अंतरिक्ष में भेजे थे. जिसमें कोई सफलता नहीं मिली.

2008 में नासा ने अंतरिक्ष में मशहूर बैंड बीटल्स के गाने भेजे. उन्हें उम्मीद रही होगी कि इंसानों की तरह एलियन भी संगीत के दिवाने होंगे और बीटल्स को सुनने के लिए धरती तक खिंचे चले आएंगे.

इसके बाद अंतरिक्ष में भेजे जाने वाले संदेशों का डिजिटल चोला पहनाते हुए जिस तरफ से वॉव सिग्नल मिला था उसी दिशा में एक डिजिटल संदेश भेजा गया जिसमें कई वीडियो और दस हजार ट्विट्स शामिल थे.

अंतरिक्ष के ग्रहों की धरत से दूरी देखते हुए ऐसा लगता नहीं कि इनमें से किसी भी संदेश का जवाब हमारे जीवनकाल में वापस भी आ सकेगा. लेकिन अगली हमारी अगली पीढ़ी को कोई जवाब मिले तो भी शायद उसमें यही पूछा जाए कि "धरती वाले करीब 100 साल से अंतरिक्ष में अंडबंड स्पैम मैसेज क्यों भेजते रहे हैं? ”

हासिल क्या होगा?

एलियन खोजने के जुनून के बीच एक बार ठहरकर ये सोचने की भी जरूरत है कि मान लीजिए हमें एलियन मिल भी जाये तो क्या? और अगर वो मनुष्यों की तरह बुद्धिमान न हुआ तो?

अभी तक आदमी को जो भी पता चल सका है उसके आधार पर कहा जा सकता है कि इस बात की बहुत ज्यादा संभावना है. जहाँ जीवन की सर्वाधिक संभावनाएं मिली हैं वह भी फिल्मों में दिखायी जाने वाली चीजों से कोसों दूर है.

धरती से 27 किलोमीटर ऊपर वायुमंडल में एक कार्बनिक जीव मिला तो उसे 'ड्रैगन पार्टिकल' नाम दिया गया. इसका आकार महज दस माइक्रॉन्स है यानी नंगी आंखो से उसे देखना असंभव है.

तो क्या उसे एलियन कहा जाए, इस बात पर काफी विवाद है. इतने छोटे जीव के लिए धरती से इतने ऊपर जाना संभव नहीं लगता. लेकिन वो जहां था वहां आया कहां से ये भी नहीं पता.

रूसी अंतरिक्ष यात्रियों ने भी हाल ही दावा किया था कि उन्हें अंतरिक्ष में एक प्लैंकटोन मिला जो अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के बाहर भी जीवित रहा. हो सकता है कि अंतरिक्ष के तारों और ग्रहों के वायुमंडल में ऐसे बेहद छोटे जीवों के लिए जीवन संभव हो. तो अगर ऐसा कोई जीव अंतरिक्ष में मिल भी जाये तो क्या है...इतनी हाय-तौबा इतने खर्चे के बाद आदमी के हाथ बस सिफर आएगा.

First published: 3 November 2015, 14:34 IST
 
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