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इंटरनेट पर खुद को सुरक्षित रखना चाहतें हैं तो कभी मत करें यह 7 काम

कैच ब्यूरो | Updated on: 29 October 2016, 19:26 IST

कहीं पर मौजूद ओपेन वाई-फाई नेटवर्क आपको जोखिम में डाल सकता है. इसलिए साइबर क्रिमिनल्स द्वारा यूजर्स को मुफ्त का लालच देने वाले बहुत लुभावने नाम जैसे 'मैकडोनाल्ड ओपेन वाई-फाई',  'मेट्रो फी वाई-फाई' या 'पब्लिक फ्री वाई-फाई' दे दिए जाते हैं. यूजर्स इनके झांसे में आकर इनसे अपने फोन-लैपटॉप को कनेक्ट करके जोखिम में डाल देते हैं.

इसके अलावा यह भी ध्यान में रखने वाली बात है कि जिस वाई-फाई नेटवर्क  की सुरक्षा को लेकर आप आश्वस्त भी हैं, उससे भी जुड़ने से पहले पड़ताल जरूरी है. 

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इतना ही नहीं अगर कभी ऐसे नेटवर्क से खुद को जोड़ भी लें तो हमेशा याद रखें कि ऐसे वक्त में किसी भी साइट पर लॉगिन न करें और न ही ऑनलाइन शॉपिंग, बैंकिंग जैसे वित्तीय लेन-देन करें.

यूं तो यह सभी को पता होता है लेकिन फिर भी हर वक्त यह ध्यान में रखना जरूरी होता है कि अपने सिस्टम, फोन, कनेक्शन, ऑनलाइन लॉगिन में पासवर्ड के लिए अपना निकनेम, जन्मतिथि, परिवार का नाम, गाड़ी का नंबर जैसी जानकारियां न भरें. हालांकि पासवर्ड इतना भी कठिन न बना दें कि हर बार आप इसे भूल जाएं.

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ऐसे में बेहतर रहेगा कि अल्फाबेट्स के साथ पहले, बीच में या फिर आखिर में स्पेशल कैरेक्टर्स, अपर केस, नंबर को इस्तेमाल करते हुए पासवर्ड चुनें.

कई बार ऐसा होता है कि आपको मजबूरन नया पासवर्ड चुनना पड़ता है. आप कुछ नया चुनते हैं और फिर भूल जाते हैं. और इसके बाद आप फिर से अपना पुराना पासवर्ड इस्तेमाल कर लेते हैं. 

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इसका मतलब यह हुआ कि आपने फिर से अपने अकाउंट को हैक करने की छूट हैकर्स को दे दी. इसलिए जब भी नया पासवर्ड बनाएं इसे कुछ यूं रखें कि आप भूलते-भूलते इसे याद कर लें और फिर भूल जाएं.

एक नियम बना लें कि किसी भी ईमेल पर आने वाले लिंक पर क्लिक न करें. इस नियम को केवल उस वक्त ही तोड़ें जब आप इसे भेजने वाले के नाम-ईमेल पते से पूरी तरह वाकिफ हों. यानी जब भी ईमेल का लिंक खोलना मजबूरी हो पहले सेंडर के नाम-पते की पूरी जांच-पड़ताल करने की आदत डाल लें.

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क्योंकि ऐसा न करने से हैकर्स आपको लुभावनी जानकारी-ऑफर्स देते हुए ऐसे लिंक पर क्लिक करवा लेते हैं जिनमें मैलवेयर, वायरस होता है या फिर आपको ऐसी वेबसाइट पर ले जाते हैं जिनमें आपको फॉर्म भरने का लालच दिया जाता है.

हमेशा इस बात पर यकीन रखें कि आपकी जानकारी तब ही गुप्त है जब तक आपको पता है. जैसे ही आप अपनी कोई भी जानकारी किसी के साथ भी शेयर करते हैं, तो आप खुद ही इसे गुप्त से सार्वजनिक कर देते हैं. 

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यही नियम आपके लॉगिन आईडी और पासवर्ड से जुड़ा है. जैसे ही आप अपना पासवर्ड बताते हैं यह जानकारी सार्वजनिक होने की संभावना उतनी ही बढ़ जाती है.

सोशल मीडिया पर खुद की रीयल टाइम तस्वीरें शेयर करना किसी नहीं अच्छा लगता. लेकिन अगर आप छुट्टियां मनाते हुए बाहर गए हैं या बाहर जा रहे हैं तो इसकी जानकारी का स्टेटस अपडेट न हीं करें तो बेहतर. 

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ऐसा इसलिए क्योंकि सोशल मीडिया पर आपका छुट्टियों से संबंधित पोस्ट शेयर होते ही एक ओर तो आपके शुभचिंतक आपको बधाई देते हैं तो आपके दुश्मन भी आपको शुभकामनाएं देते हैं कि आपने उन्हें इसकी जानकारी दे दी. आपके छुट्टियों में जाने के बाद खाली घर को सोशल मीडिया पर बैठे चोर भी निशाना बना सकते हैं. इसलिए छुट्टियों की खुशी सभी को बताएं जरूर, लेकिन मनाने के बाद.

सभी सोशल मीडिया नेटवर्क आपको खुद को सुरक्षित बनाए रखने के ढेरों विकल्प देते हैं. लेकिन इसके लिए आपको स्वयं इन्हें चुनना और टिक करना पड़ता है. ऐसे में किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साइन अप और लॉगिन के बाद अपने प्राइवेसी सेटिंग्स को अपने मुताबिक तय करें. 

यह ध्यान रखें कि आपकी किस पोस्ट को कहां तक जाना है. साथ ही आपकी सोशल मीडिया पर शेयर कौन सी जानकारी आपको असुरक्षित कर सकती है उसे भी छिपाना या न बताना ही अच्छा होता है.

First published: 29 October 2016, 19:26 IST
 
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