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दुनिया जल्द किसी महिला यात्री को चंद्रमा की सतह पर चलते देखेगी

सुनील रावत | Updated on: 22 July 2019, 16:20 IST

ISRO ने श्रीहरिकोटा से चंद्रयान-2 की सफल लॉन्चिंग कर दी है. इसे भारत की एक बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है. यह 48 दिन के सफर के बाद चन्द्रमा पर उतरेगा. इसरो ने अपने बयान में कहा कि चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग उम्मीद से ज्यादा शानदार रही है. वहीं अमेरिकी अंतरिक्ष अनुसंधान नासा का कहना है कि वह साल 2024 तक चन्द्रमा पर पहली महिला यात्री को भेज देगा.

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा महत्वाकांक्षी आर्टेमिस मिशन के साथ अपनी अगली छलांग लगाने को तैयार है. आर्टेमिस का नाम अपोलो की जुड़वां बहन के नाम पर रखा गया है. नासा ने कहा आर्टेमिस कार्यक्रम के माध्यम से हम पहली महिला को चंद्रमा की सतह पर चलते हुए देखेंगे. इस मिशन के साथ नासा चंद्रमा के उन क्षेत्रों का भी पता लगाएगा. जिनके बारे में पहले पता नहीं था.

50 साल पहले 24 जुलाई 1969 को अमेरिका का अपोलो 11 मिशन चंद्रमा से लौटा था. तीन अंतरिक्ष यात्री पायलट माइकल कोलिन्स और एडविन एल्ड्रिन और कमांडर नील आर्मस्ट्रांग ने फ्लोरिडा से उड़ान भरी और चांद पर जाने और वापस आने में आठ दिन का समय लिया. 22 जुलाई को भारत चांद पर अपना पहला अंतरिक्ष यान भेज दिया. चंद्रमा पर उतरने में इसे लगभग सात सप्ताह या अधिक समय लगेगा. अमेरिका, रूस और चीन के बाद भारत चांद पर पहुंचने वाला चौथा राष्ट्र बन जाएगा.

 

चंद्रमा का अध्ययन करने का कारण यह है कि यह हमारे पूरे सौर मंडल के विकास को समझने में हमारी मदद कर सकता है. चंद्रमा 3.5 अरब वर्ष पुराना है. यह अपोलो मिशनों के बाद ही था जब हमें पता चला कि चांद पृथ्वी पर टकराने के बाद बना.

अमेरिका ने खुद 1969 के महान क्षण के बाद अपनी अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं को आगे नहीं बढ़ाया है. आर्मस्ट्रांग और एल्ड्रिन के बाद 10 अमेरिकी चंद्रमा पर चले गए उसका आखिरी मिशन 1972 में था. 1980 के दशक में राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन के तहत, अमेरिका ने अंतरिक्ष शटल कार्यक्रम विकसित किया, जो यह 2011 में समाप्त हो गया. भारतीय मूल के अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला की 2003 में दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी.

जब अंतरिक्ष शटल, कोलंबिया, वायुमंडल को फिर से विकसित करते समय विघटित हो गया था. अंतरिक्ष यान को शामिल करने वाली यह दूसरी आपदा थी. 1980 के दशक में पहली बार दो घटनाओ में 14 लोगों की जान चली गई. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में कहा कि वह नासा की महत्वाकांक्षाओं को पुनर्जीवित करेंगे और यह कि अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री 2024 तक चंद्रमा पर लौट आएंगे.

एलन मस्क और जेफ बेजोस की कंपनियां भी कर रही काम

आज अमेरिका की कई कंपनियां अंतरिक्ष पर काम कर रही हैं. जिसमे में एलन मस्क की स्पेसएक्स भी शामिल है. स्पेसएक्स ऐसे काम कर सकता है जो नासा भी नहीं कर सकता है, जैसे रॉकेट चरणों को ठीक करना और उनका पुन: उपयोग करना आदि. अमेज़ॅन के मालिक जेफ बेजोस द्वारा संचालित ब्लू होरिजन नामक एक अन्य निजी अंतरिक्ष फर्म ने भी इस क्षमता को विकसित किया है. जब मस्क ने 2002 के आसपास अपनी कंपनी शुरू की तो उन्हें पता चला कि रॉकेट तकनीक 50 वर्षों से आगे नहीं बढ़ी है और सरकारें 1960 के दशक से समान प्रणालियों का उपयोग कर रही थीं.

श्रीहरिकोटा से चंद्रयान- 2 हुआ लॉन्च, 48 दिन बाद पहुंचेगा चंद्रमा की सतह पर

First published: 22 July 2019, 16:11 IST
 
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