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स्टार्टअप का दावा- 15 मिनट में कर देंगे बैटरी फुल, इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए है ये संजीवनी

कैच ब्यूरो | Updated on: 23 December 2018, 16:38 IST

एक स्टार्ट-अप ने एक नावेल बैटरी विकसित की है जो यह दावा करती है कि इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को 15 मिनट के भीतर चार्ज कर सकती है, जिससे उपयोगकर्ताओं को अधिक आसानी होगी. मुंबई स्थित स्टार्ट-अप Gegadyne Energy के सह-संस्थापक और सीईओ जुबिन वर्गीज ने कहा अंतरराष्ट्रीय पेटेंट लंबित प्रौद्योगिकी स्केलेबल है, और वर्तमान लिथियम-आयन (ली) आधारित बैटरियों की तुलना में अधिक कुशल है. बैटरियों पर आज इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की कुल लागत का 40 प्रतिशत तक खर्च होता है.

सरकार इस बात का दावा करती है कि 2030 तक भारत में 100 प्रतिशत इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री हासिल कर सकता है. ”वर्गीज ने कहा ''EV की खरीद मूल्य का एक बड़ा हिस्सा आज बैटरी है. इसलिए भारत संभावित रूप से बैटरी निर्माण उद्योग में शीर्ष पर पहुंच सकता है. न केवल यह आर्थिक रूप से व्यवहार्य है, बल्कि टिकाऊ भी है''. वर्तमान में लिथियम आयन (ली) ईवी को पावर प्रदान करने का प्रमुख स्रोत है.

 

हालांकि इन बैटरियों को चार्ज होने में अधिक समय लगता है और इसलिए, ईवी को चार्ज करने के लिए संभव नहीं है. नई तकनीक पारंपरिक बैटरी की उच्च ऊर्जा घनत्व के साथ सुपरकैपेसिटर की त्वरित चार्जिंग क्षमता को जोड़ती है. वर्गीज ने कहा, यह इलेक्ट्रोस्टैटिक चार्ज स्टोरेज और तेजी से गतिज फैराडे प्रतिक्रिया की अवधारणा का उपयोग करता है.

उन्होंने कहा कि लक्ष्य 2020 तक बैटरी का पहला वाणिज्यिक पुनरावृत्ति होना है. गीगाडाइने एनर्जी के चीफ टेक्निकल ऑफिसर (सीटीओ) अमेय गदवान ने कहा कि बैटरियों का इस्तेमाल मौजूदा मामलों में सीधे प्रतिस्थापन के लिए किया जाएगा और यह सिलिंड्रिकल, थैली और प्रिज्मीय रूप में उपलब्ध होगा. लिथियम-आयन बैटरी में ऊर्जा को एक विद्युत रासायनिक तरीके से संग्रहित किया जाता है जो बैटरी की धीमी गति और समग्र बैटरी चक्र जीवन को धीमा कर देता है.

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इसकी तुलना में शोधकर्ताओं की एक टीम द्वारा डिज़ाइन की गई नई बैटरियों में इलेक्ट्रोस्टैटिक और इलेक्ट्रोकेमिकल प्रक्रिया के संयोजन में ऊर्जा संग्रहीत की जाती है जो पारंपरिक बैटरी की तुलना में लंबे समय तक बैटरी चक्र को जीवन देती है. गडवान ने कहा, "हमारे पास अभी के लिए प्रोटोटाइप और बैटरी पैक हैं जो तीसरे पक्ष द्वारा सत्यापित हैं और अगले 12 महीनों के भीतर भारत में बैटरी सेल का पायलट उत्पादन शुरू कर देंगे."

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First published: 23 December 2018, 15:07 IST
 
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