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तो चीन और रूस के इन खतरनाक प्रयोगों से तबाह हो जाएगी मानव सभ्यता !

कैच ब्यूरो | Updated on: 18 December 2018, 11:42 IST
(प्रतीकात्मक फोटो)

हमारी पृथ्वी की सतहों में तमाम ऐसे रहस्य छिपे हुए हैं जिनका आजतक पता नहीं लगाया जा सका, लेकिन वैज्ञानिक इन तमाम रहस्यों का पता लगाने के लिए आए दिन प्रयोग करते रहते हैं. जो कई बार मानव सभ्यता के लिए भी खतरा बन जाते हैं. अब चीन और रूस मिलकर एक ऐसी योजना पर काम कर रहे हैं. जो अब विवादों में है. इस योजना तो चीन और रूप ने वायुमंडल के तापमान को नियंत्रित करने का नाम दिया है.

दरअसल, रूस और चीन इन दिनों जिस प्रयोग पर काम कर रहे हैं, वो मानव सभ्यता के लिए कितना खतरनाक साबित हो सकती है इसके बारे में कोई नहीं जानता. खबरों की मानें तो चीन और रूस मिलकर पृथ्वी के वायुमंडल को गर्म करने और बदलने की विवादास्पद योजनाओं के साथ आगे बढ़ रहे हैं. विशेषज्ञों का दावा है कि इस परियोजना में संभावित सैन्य अनुप्रयोग हैं, क्योंकि यह उपग्रह संचार को बाधित कर सकता है. ऐसे में युद्ध की स्थिति या जासूसी के लिए इसका इस्‍तेमाल किया जा सकता है. इन परिस्थितियों में ये प्रयोग काफी कारगर साबित हो सकता है.

बता दें कि आयनों के रूप में जाना जाने वाला चार्ज कण, भूमि के एक विशिष्ट क्षेत्र पर एक प्रतिबिंबित परत बनाता है और उपग्रह संचार ब्लैकआउट का कारण बनता है. दो महाशक्तियों ने कई संयुक्त प्रयोग किए हैं जो यूरोप और चीन के ऊपर हवा की रासायनिक संरचना को बदलकर प्रौद्योगिकी के उपयोग को विस्तारित करने की योजना बना रहे हैं. दक्षिण चीन मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्रयोग में पूर्वी यूरोप के ऊपर 310 मील यानि 500 किमीसे अधिक ब्रिटेन 126,000 वर्ग किलोमीटर/49, 000 वर्ग मील के आधे आकार का क्षेत्र शामिल है.

प्रतीकात्मक फोटो

बता दें कि रूस के एक छोटे से शहर वासिलसस्क में बिजली के एक स्पाइक का अनुभव किया है. जिसमें आसपास के क्षेत्रों की तुलना में दस गुना अधिक नकारात्मक चार्ज किया गया सूक्ष्माणु था. रिपोर्ट के अनुसार, आगे के प्रयोगों में 100 डिग्री सेल्सियस यानि 212 डिग्री फ़ारेनहाइट से अधिक वातावरण में आयनित गैस के तापमान में वृद्धि शामिल है.

वासिलसस्क में एक विशेष सुविधा द्वारा इलेक्ट्रॉनों को आकाश में भेजा गया था, जो शीत युद्ध के दौरान बनाया गया. इसने 260 मेगावाट पर माइक्रोवेव का उत्पादन किया, यह एक छोटे से शहर को प्रकाश देने के लिए पर्याप्त है. पृथ्वी के वायुमंडल की प्रतिक्रिया पर डेटा तब एक चीनी विद्युत चुम्बकीय निगरानी उपग्रह झांगेंग-1 द्वारा एकत्र किया गया था.

प्रतीकात्मक फोटो

वहीं चीन की एक पत्रिका में इस रिसर्च को प्रकाशित किया गया था. जिसमें इसके बारे में संतोषजनक जताया गया था. हालांकि एक्‍सपर्ट्स का इस बारे में कहना है कि ये प्रयोग हमारे लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकते है. ये पूरी मानव जाति के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं. हालांकि चीन और रूस की ओर से इस बारे में अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है. लेकिन बारे में अन्य देशों को गंभीरता से सोचने की जरूरत है.

बता दें कि इंसानों की तरक्की ने कई बार पृथ्वी पर इस तरह की आपदाएं आई हैं जो हमें इस ओर देखने को मजबूर करती है कि इंसानी सभ्यता को ऐसे तमाम प्रयोगों से खतरा हो सकता है. औद्योगिकीकरण के वजह से जहां प्रदूषण बढ़ा है तो वहीं पृथ्वी के औसत तापमान में भी वृद्धि हुई है.

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First published: 18 December 2018, 11:12 IST
 
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