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'उपवास रखने से बढ़ती है शरीर की प्रतिरोधक क्षमता'

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 February 2017, 1:50 IST

प्राचीन काल से चला आ रहा उपवास या व्रत रखना आपके शरीर की रोगों से लड़ने की शक्ति को बढ़ाने के साथ ही आंतों की सूजन-जलन से राहत दिला सकता है. एक नई शोध में इसे सैद्धांतिक रूप शरीर के लिए बेहतर बताया गया है.

इस शोध में हिस्सा लेने वाले हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के नूरुद्दीन खान ने कहा, "व्रत के रूप में कैलोरी नियंत्रण (कैलोरिक रेस्ट्रिक्शन या सीआर) को काफी वक्त से इस्तेमाल किया जाता रहा है. विभिन्न रोगों के इलाज में इस्तेमाल होने वाले होम्योपैथ, नेचुरोपैथ और आयुर्वेद जैसी पारंपरिक चिकित्सा पद्धति में भी इसका इस्तेमाल किया जाता था. हालांकि सीआर से हमारे शरीर को होने वाले पूरे फायदों के बारे में अभी तक जानकारी नहीं थी."

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अमेरिका स्थित एमोरी यूनिवर्सिटी अटलांटा में शोधकर्ताओं के दल का नेतृत्व करने वाले बाली पुलेंद्रन ने पोषक तत्वों की कमी में शारीरिक अनुकूलता स्थापित करने की एक कार्यप्रणाली को पाया. वो कहते हैं, "ऐसा लगता है कि पोषक तत्वों को सीमित करना टीके से होने वाली प्रतिरोधकता को बढ़ाने के साथ ही आंतों की सूजन के लिए सुरक्षित होगा."

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इस शोध के लेखकों ने एक जीन की पहचान की. मुख्य प्रतिरोधी कोशिका में इस जीन को सक्रिय करना शारीरिक मजबूती और सुरक्षात्मक प्रतिरोधी प्रतिक्रिया की निशानी है. इस जीन की पहचान उस दौरान हुई जब पीत ज्वर (यलो फीवर) वैक्सीन लगने पर प्रतिरोधकता की प्रतिक्रिया का अध्ययन किया जा रहा था.

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उन्होंने कहा, "इस जीन की पहचान जीसीएन2 के रूप में की गई थी. जो एक ज्ञात मेटाबोलिक सेंसर है और यह अमीनो एसिड स्टार्वेशन की सेंसिंग में लगा रहता है. इसे ऑटोफैगी प्रक्रिया को नियंत्रित करने में पाया जाता है जो उपवास या कोशिकाओं में होने वाले तनाव की प्रतिक्रिया होती है." शोध के नतीजे "साइंस" जर्नल में प्रकाशित किए जा चुके हैं.

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First published: 3 April 2016, 3:26 IST
 
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