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युवाओं में तेजी से बढ़ते दर्द-ए-दिल से माशूका ही नहीं चिकित्सक भी चिंतित

कैच ब्यूरो | Updated on: 29 September 2016, 19:09 IST

भारत की युवा जनसंख्या को दिल का रोग तेजी से लग रहा है. यानी देश में हृदय रोग कम आयु के लोगों को तेजी से अपना शिकार बना रहे हैं. 29 सितंबर को मनाए जाने वाले विश्व हृदय दिवस पर भारत के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञों ने यह चिंता जताई.

दरअसल बिगड़ती जीवन शैली और बढ़ते तनाव ने युवाओं को अपना शिकार बनाया है. परिणामस्वरूप युवा तेजी से हृदय रोगों के शिकार होते जा रहे हैं. 

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विशेषज्ञों का मानना है कि 30 साल की उम्र पूरी करने के बाद से ही युवाओं में हृदय रोगों की संभावना बढ़ी जा रही है. अब वक्त आ चुका है कि अपने दिल को दुरुस्त रखने के लिए युवा अपनी अनियमित दिनचर्या में तुरंत सुधार करें.

समाचार एजेंसी आईएएनएस को गुड़गांव स्थित मेदांता- द मेडिसिटी के चेयरमैन नरेश त्रेहान ने बताया, "हृदय रोग के मामले में भारत के शहरी युवाओं में 10.50 फीसदी जबकि ग्रामीण युवाओं में छह फीसदी की बढ़त देखने को मिली है. वहीं, पश्चिमी देशों में यह वृद्धि तीन से चार फीसदी ही है."

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हृदय रोग विशेषज्ञों के मुताबिक मेट्रो शहरों के 25 से 40 आयुवर्ग के मरीजों में 7 फीसदी कोरोनरी हार्ट डिजीज (सीएडी) से जूझ रहे हैं. नई दिल्ली स्थित सर गंगाराम अस्पताल के कॉर्डियोलॉजी के वरिष्ठ सलाहाकार अश्विनी मेहता कहते हैं, "सीएडी में कोरोनरी आर्टरीज (हृदय धमनियों) में रुकावट (ब्लॉकेज) हो जाती है. यह धमनियां (आर्टरी) हृदय में रक्त की आपूर्ति करती हैं. देश का सर्वाधिक युवा हृदय रोग की इस आम बीमारी से जूझ रहा है."

सीएडी को धमनियों का मोटा होना (सिकुड़ना) भी माना जाता है. इस स्थिति में दिल में पहुंचने वाले रक्त की मात्रा में कमी हो जाती है जिससे ऑक्सीजन कम पहुंच पाता है. धमनियों की दीवारें मोटी होने पर इनके अंदर जमा प्लॉक फट सकता है, जिससे हार्ट अटैक या फिर अचानक मौत भी हो सकती है.

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धमनियों के इसके सामान्य लक्षणों में छाती में दर्द या सांस लेने में दिक्कत होती है. कोरोनरी आर्टरीज के सिकुड़ने से दिल को जब सर्वाधिक जरूरत होती है, उस वक्त उचित मात्रा में रक्त नहीं मिल पाता. 

नोएडा स्थित जेपी अस्पताल के निदेशक (इंटरवेंशनल कॉर्डियोलॉजी) के निदेशक गुंजन कपूर ने कहा, "वैश्विक रूप में अन्य मूल के लोगों की तुलना में भारतीयों में सीएडी की संभावना 50-400 फीसदी ज्यादा है."

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चिकित्सकों का यह भी मानना है कि युवाओं को तेजी से अपना शिकार बनाती इस बीमारी को फैलने से रोका भी जा सकता है. डॉ त्रेहान का कहना है कि अगर लोग दिन भर बैठे रहने वाली अपनी दिनचर्या को बदलें, तंबाकू-मदिरा सेवन बंद करें, ज्यादा नमक वाले भोजन से परहेज करें तो सीएडी को रोका जा सकता है.

यह सभी चीजें हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज और वजन बढ़ाती हैं जो हृदय रोगों का प्रमुख कारण है. इसके अलावा जिनके परिवार में किसी को हृदय रोग, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर रहा है ऐसे लोगों को 25 साल की जबकि बाकी को 30 साल की उम्र में अपना पहली शारीरिक जांच करवानी चाहिए. जितनी जल्दी इन परेशानियों की जानकारी होगी, उतनी जल्दी ही इनसे छुटकारा पाया जा सकता है.

First published: 29 September 2016, 19:09 IST
 
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