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मानें या नहीं: गूगल अगर चाहे तो एक मिनट में आपका कच्चा-चिट्ठा सामने रख देगा

अमित कुमार बाजपेयी | Updated on: 3 June 2016, 13:55 IST
QUICK PILL
  • आज दुनिया गोल से गूगल हो गई है और गूगल की सेवाओं पर लोगों की निर्भरता बढ़ती ही जा रही है. गूगल अपने व्यावसायिक हितों के लिए यूजर्स की समस्त जानकारियों का डेेटाबेस सहेजे रहता है.
  • गूगल के पास आपकी पूरी हिस्ट्री एक अनजाने खतरे की तरह है. अगर आपको तनिक भी शक है या आप इन सूचनाओं को सहेजना नहीं चाहते तो इन्हें डिलीट कर सकते हैं. जानिए कैसे.

एंड्रॉयड मोबाइल, गूगल, जीमेल, यूट्यूब जैसी सेवाओं का इस्तेमाल करने वाले लोग अब छिप नहीं सकते है. गूगल के पास इससे जुड़े हर व्यक्ति की कुंडली मौजूद है. यानी गूगल आपकी आवाज, लोकेशन, दोस्त, ऑनलाइन सर्फिंग-ब्राउजिंग समेत न जाने किन-किन बातों का इतिहास समेटे हुए है.

दुनिया की दिग्गज अल्फाबेट इंक यानी गूगल लाने वाली कंपनी ने इंटरनेट के जरिये दुनिया के अधिकांश हिस्सों में अपनी पहुंच बना ली है. जब भी आप गूगल के उत्पादों मसलन गूगल सर्च, क्रोम ब्राउजर, मैप्स, यूट्यूब, पिकासा, एंड्रॉयड, कैमरा, कैलेंडर, प्लस, हैंग आउट्स, बुक्स, हेल्थ, टॉक, अलर्ट, ब्लॉग, एडसेंस, डॉक का इस्तेमाल करते हैं तो प्राइवेसी पॉलिसी (निजता नीति) के तहत इनसे जुड़ी अपनी हर जानकारी गूगल को बता देते हैं.

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गूगल अब तक हर यूजर द्वारा इस्तेमाल किए गए अलग-अलग एंड्रॉयड मोबाइल फोन के मॉडल्स की जानकारी अपने पास रखे हुए है. यानी अब तक आपने अपने स्मार्टफोन में भी जो भी सर्च किया, ऐप डाउनलोड किया, कॉन्टैक्ट्स संजोए, कहां गए, किन स्थानों पर रहे इन सबकी जानकारी मौजूद है.

आपके एंड्रॉयड मोबाइल से की गई वॉयस रिकॉर्डिंग भी है गूगल के पास

जबकि डेस्कटॉप-लैपटॉप पर गूगल क्रोम या ब्राउजर के जरिये यह आपके द्वारा सर्च की गई हर जानकारी और खोले गए हर वेबपेज के साथ ब्राउजिंग हिस्ट्री सहेजे हुए है. 

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इतना ही नहीं गूगल वॉयस यानी कुछ भी गूगल करने के लिए इसकी वॉयस सर्विस के जरिये आपने जो भी कुछ खोजा या फिर आपके स्मार्टफोन के आसपास जो भी बातचीत हुईं वो भी गूगल के पास मौजूद है.

क्या डरने की जरूरत है?

अब जब गूगल आपके कंप्यूटर, मोबाइल, ऑनलाइन समेत हर दुनिया की जानकारी जुटा रहा है तो क्या वाकई इसमें डरने वाली कोई बात है. यूं तो इसका सीधा सा जवाब नहीं में है लेकिन वो केवल तब जब तक आप कुछ भी गलत नहीं कर रहे हैं. 

आप कोई आपराधिक षडयंत्र, देशद्रोह, आतंकी गतिविधि, घोटाले आदि में शामिल नहीं रहे हैं. पर अगर आप रहे हैं तो आपको वैसे भी डरना ही चाहिए. 

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हालांकि गूगल यह सभी जानकारी अपने पास सुरक्षित रखता है और किसी निजी एजेंसी या सुरक्षा एजेंसियों के साथ साझा नहीं करता. वह इसका इस्तेमाल केवल विज्ञापनदाताओं और आपकी रुचि वाली चीजें आप तक पहुंचाकर पैसे कमाने के लिए करता है. 

लेकिन यह सुरक्षा भी तब तक ही है जब तक गूगल सुरक्षित है. 

क्या गूगल पर भी है खतरा?

इसे यूं समझते हैं कि गूगल एक अतिसुरक्षित बैंक की तरह है जिसमें आपने निशुल्क लॉकर खोल रखा है. बैंक की सुरक्षा के लिए गूगल ने बेहद ताकतवर, अत्याधुनिक सुरक्षा इंतजामात किए हैं. लेकिन गूगल एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है और दुनिया में तकरीबन रोज एक नया हैकर पैदा होता है.

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ऐसे में गूगल की सुरक्षा की गारंटी तब तक ही पुख्ता है जब तक कोई इसे भेद नहीं देता. अगर गूगल की सुरक्षा दीवार भेद कर कोई सारी जानकारी (जो न जाने कितने करोड़ जीगाबाइट में होगी) जुटा लेता है, तो ही कुछ संभावना होती है कि वो इसका सही-गलत इस्तेमाल करे. 

क्या कर सकते हैं आप

खुद को सुरक्षित रखने और गूगल के पास मौजूद अपनी कुंडली मिटाने के लिए आप के पास भी एक रास्ता है. 

गूगल के किसी भी उत्पाद के जरिये संजोया गया आपका इतिहास आप खुद मिटा सकते हैं. इसमें आपकी वॉयस फाइलें, ब्राउजिंग-सर्फिंग हिस्ट्री, कीवर्ड्स, लोकेशन, कॉन्टैक्ट्स, पेमेंट डिटेल्स, डिवाइसेज आदि की जानकारी शामिल है.

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यूजर्स के पास है मौका कि गलत हाथों में पड़ने से पहले डिलीट कर सकते हैं सारी जानकारी

इतना ही नहीं आपकी निजी जानकारी मसलन नाम, फोन नंबर, जन्मतिथि जैसी जरूरी जानकारी तो आप जाने-अनजाने गूगल को दे ही देते हैं.

तो इन जानकारियों को हटाने के लिए पहले तो आप इन्हें देखने के लिए यहां क्लिक करेंः गूगल हिस्ट्री 

यहां पर आपको वेब एंड ऐप एक्टिविटी की लिस्ट और इसकी जानकारी दिखाई देगी. साथ ही ब्राउजर विंडों पर बिल्कुल बाईं ओर ऊपर बनी तीन सफेद लकीरों पर क्लिक करके अन्य जानकारियों की सूची भी देख सकेंगे. 

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इनमें वेब एंड ऐप एक्टिविटी, वॉयस एंड ऑडियो एक्टिविटी, डिवाइस इंफॉर्मेशन, लोकेशन हिस्ट्री, यूट्यूब वॉच हिस्ट्री, यूट्यूब सर्च हिस्ट्री शामिल होगी. इन अलग-अलग लिंक पर क्लिक करके यूजर अपनी हिस्ट्री देखकर उसे डिलीट भी कर सकते हैं. 

जबकि सबसे नीचे एक्टिविटी कंट्रोल्स लिखा होगा. जिसे क्लिक करने के बाद यूजर अपने अकाउंट में साइन इन एंड सिक्योरिटी, पर्सनल इंफो एंड प्राइवेसी, अकाउंट प्रेफरेंस जैसे टैब्स में जाकर उन्हें भी एडिट कर सकते हैं. साथ ही अपने सेव्ड पासवर्ड को भी देख सकते हैं.

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यूजर गूगल को इस संबंध में भी इस एक्टिविटी कंट्रोल विंडो के जरिये निर्देश दे सकता है कि वो किन चीजों को सहेजे और किन्हें नहीं.

First published: 3 June 2016, 13:55 IST
 
अमित कुमार बाजपेयी @amit_bajpai2000

पत्रकारिता में एक दशक से ज्यादा का अनुभव. ऑनलाइन और ऑफलाइन कारोबार, गैज़ेट वर्ल्ड, डिजिटल टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल, एजुकेशन पर पैनी नज़र रखते हैं. ग्रेटर नोएडा में हुई फार्मूला वन रेसिंग को लगातार दो साल कवर किया. एक्सपो मार्ट की शुरुआत से लेकर वहां होने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों-संगोष्ठियों की रिपोर्टिंग.

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