Home » खेल » 2000 cricket match-fixing scandal: Bookie Sanjeev Chawla extradited to Delhi from UK
 

क्रिकेट मैच फिक्सिंग कांड- 2000 : मुख्य आरोपी संजीव चावला भारत प्रत्यर्पित, अब माल्या और नीरव मोदी की बारी

कैच ब्यूरो | Updated on: 13 February 2020, 16:15 IST

साल 2000 के क्रिकेट मैच फिक्सिंग कांड के आरोपी सट्टेबाज संजीव चावला को लंदन से भारत प्रत्यर्पित करने में सफलता मिली है. चावला 2000 में दक्षिण अफ्रीका के भारत दौरे के दौरान मैच फिक्सिंग के आरोपों का सामना कर रहा है. 1992 में यूनाइटेड किंगडम के साथ एक संधि पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद से यह भारत का पहला सफल प्रत्यर्पण है.

2016 में समीरभाई विनुभाई पटेल, जो 2002 के गुजरात दंगों से संबंधित एक मामले में वांटेड था, ने स्वेच्छा से प्रत्यर्पण करने के लिए सहमति व्यक्त की थी. चावला पर आरोप है कि उसने फरवरी-मार्च सन 2000 में दक्षिण अफ्रीका के भारत दौरे के दौरान मैच फिक्स करने में दक्षिण अफ्रीका क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान हैंसी क्रोनिए के साथ साजिश रचने में मुख्य भूमिका निभाई थी.

आरोप है कि चावला ने क्रोन्ये को कथित तौर पर सुझाव दिया था कि वह मैच हारते हैं तो बहुत पैसे कमा सकते हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक चावला और क्रोन्ये दोनों का नाम दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच द्वारा दायर 70-पेज की चार्जशीट में रखा गया था. चावला पर अगस्त 1999 में इंग्लैंड के दो खिलाड़ियों को रिश्वत देने की कोशिश करने का भी आरोप है

भारत ने की थी प्रत्यर्पण की मांग 

अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार भारत ने जनवरी और मार्च 2000 मैच फिक्सिंग मामले में चावला के प्रत्यर्पण की मांग की थी. भारत ने 1 फरवरी, 2016 को भी प्रत्यर्पण का अनुरोध किया. इस मामले की शुरुआत में वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट और बाद में यूके हाई कोर्ट ने सुनवाई की. चावला ने यूरोपीय मानवाधिकार न्यायालय में भी अपील की थी, जिसने पिछले सप्ताह एक अंतरिम उपाय के लिए उनकी याचिका को खारिज कर दिया. भारत में चावला को दिल्ली की तिहाड़ जेल में रखा जाएगा. 16 जनवरी को एक सुनवाई के दौरान, भारत सरकार ने यूके उच्च न्यायालय को आश्वासन दिया कि चावला को सुरक्षा के साथ अलग सेल में रखा जायगा.

कौन है चावला 

चावला ने यूके उच्च न्यायालय में दायर किए गए अदालती दस्तावेजों में खुद को दिल्ली का एक व्यापारी बताया है.  वह 1996 में एक व्यापार वीजा पर यूके चला गया था. 2000 में उसका भारतीय पासपोर्ट निरस्त कर दिया गया था. 2005 में उसे ब्रिटेन का पासपोर्ट मिला और तब से वह ब्रिटिश नागरिक हैं. भारतीय अधिकारियों का मानना है कि चावला के प्रत्यर्पण से भगोड़े व्यापारियों विजय माल्या और नीरव मोदी को ब्रिटेन से वापस लाने के उनके प्रयासों में को मजबूती मिलेगी.

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First published: 13 February 2020, 16:04 IST
 
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