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आमिर की 'दंगल' के फोगट जैसी है इस कॉमनवेल्थ गोल्ड मेडलिस्ट की कहानी

पत्रिका ब्यूरो | Updated on: 23 October 2016, 17:46 IST

आमिर खान की आने वाली फिल्म दंगल ने ट्रेलर रिलीज होने के बाद से काफी प्रसिद्धि हासिल कर ली है. यह फिल्म हरियाणा के मशहूर पहलवान महावीर सिंह फोगट और उनकी दोनों बेटियों गीता फोगट और बबीता फोगट पर आधारित है.

लेकिन असल जिंदगी से प्रेरित दंगल फिल्म की कहानी अलका तोमर से काफी कुछ मिलती जुलती है. देश को कॉमनवेल्थ गेम्स में पहली बार महिला कुश्ती में गोल्ड मेडल दिलाने वाली अलका तोमर ने केवल अपने पिता की मेहनत को ही साकार नहीं किया बल्कि देश का नाम भी सुनहरे अक्षरों में लिखवा दिया. अलका की कहानी फोगट परिवार से कम नहीं है. जब अलका से इस बारे में बात की गई तो कई चौंकानें वाली बातें सामने आईं.

अलका का कहना है, "मेरे पिता को कुश्ती का काफी शौक था. उन्होंने कुश्ती में मेडल का सपना अपने बेटे में ही देखा था. मेरे भाई ने कुश्ती भी की लेकिन जहां तक पहुंचना चाहिए था वहां तक नहीं पहुंच सका. लेकिन मेरे पिता ने हिम्मत नहीं हारी. उन्होंने मुझे कुश्ती में डाला. जब मैं 10 साल की थी तभी से पिता नैन सिंह तोमर ने मुझे कुश्ती के लिए तैयार करना शुरू कर दिया था. उन्होंने मुझे भी उसी माहौल में पाला जिस माहौल में मेरे दोनों भाई थे. उन्होंने मुझमें और दोनों भाइयों में कोई फर्क नहीं रखा. कुश्ती के लिए उन्होंने मेरे बाल ब्वॉयकट करा दिए थे. उसके बाद मेरी जर्नी शुरू हुई." 

भाई ने साथ जाने से कर दिया था इनकार 

अलका बताती हैं, "कुश्ती प्रैक्टिस के लिए मुझे अपने गुरुजी के पास जाना पड़ता था. मेरे साथ मेरे परिवार का कोई न कोई जरूर होता था. लेकिन मेेरे भाई ने मेरे साथ जाने से मना कर दिया था. उसे अजीब लगता था मेरी बहन कुश्ती के लिए जा रही थी. सभी लोग बड़े ही अजीब तरीके से देखते थे. भाई के मना करने के बाद मेरे पिता ही सामने आए और वो भी मुझे गुरुजी के पास लेकर जाने लगेे. मेरे पिता स्कूल में हर तरह के खेलों में भाग लेने को कहते थे. मैंने स्कूल में कई ट्रॉफी भी जीतीं. मेरे पिता रोज मुझे दौड़ाया करते थे. उन्होंने मेरे साथ काफी मेहनत की." 

गांव में गुजरते ही मिलते थे ताने 

अलका की मानें तो जब वो कुश्ती के लिए घर से निकलती थीं तो आसपास के लोग कहते थे कि ये लडक़ी क्या पहलवानी करेगी? पहलवानी लडक़ों के लिए होती है. अजीब-अजीब बातें होती थी. पिताजी ने दिल और दिमाग में कुश्ती में नाम कमाने का ऐसा जज्बा भर दिया था कि उसके अलावा कुछ और सूझता ही नहीं था. सुबह छह बजे चले जाना और शाम को आना. सिर्फ कुश्ती पर फोकस रहता था. 

मेरे पिता और मेरा एक मकसद बन गया था कि कुश्ती में नाम कमाना है. उसके अलावा हम दोनों को न तो कुछ सुनाई देता था और ना ही कुछ दिखाई देता था. इसलिए कुछ समय के बाद सब सामान्य सा लगने लगा. आज वो ही लोग मेरा और मेरे परिवार का नाम गर्व से लेते हैं. उन्हीं लोगों को अब लगता है कि वो अपनी बेटियों खेलों में आगे बढ़ाएं.

देखा है दंगल का ट्रेलर 

महिला पहलवानी और एक पिता की अपनी बेटियों को पहलवान बनाने की कहानी दंगल के ट्रेलर के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मैंने दंगल का ट्रेलर देखा है. काफी शानदार है. ट्रेलर को देखकर साफ लग रहा है कि वो एक पिता की कहानी है जो अपनी बेटियों को एक ऐसा खिलाड़ी बनाता है जिसने देश में महिला खेलों की दशा और दिशा बदल दी. बबीता और गीता फोगट जी ने काफी मेहनत की है. उन्होंने वो कर दिखाया जो आज तक कोई नहीं कर सका. 

First published: 23 October 2016, 17:46 IST
 
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