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Asian Games 2018: देश को गोल्ड दिलाने वाली इस बेटी के गांव में आई विकास की बहार, रातों-रात बनी पक्की सड़क

कैच ब्यूरो | Updated on: 3 September 2018, 16:10 IST

पश्चिम बंगाल के एक छोटे से शहर की रहने वाली स्वप्ना बर्मन ने जकार्ता में खेले गए 18वें एशियाई खेलों में ऐथलेटिक्स में देश को गोल्ड दिलाया. स्वप्ना एक मध्यम परिवार की बेटी हैं, जिनके पिता एक रिक्शा चालक हैं. लेकिन दांत दर्द के बाद भी स्वप्ना बर्मन ने एशियाई खेलों की हेप्टाथलन में गोल्ड पदक जीतकर नया इतिहास रचा दिया था. अब वह अपने गांव वापस आ रही हैं, गांव वाले बी उनका इंतजार कर रहे हैं.

उनके गांव आने से पहले ही इस गांव में वीआईपी और वीवीआईपी की लाइन लगी हुईं हैं. इसी क्रम में अब जिला प्रशासन तेजी से सड़क को पक्का करने में लगा हुआ है, बता दें कि जलपाईगुड़ी के बाहरी इलाके में स्थित स्वप्ना बर्मन के आवास तक जाने के लिए पगडंडी जैसी कच्ची सड़क ही थी.

 

अब वह सड़क पक्की होने लगी है,स्वपना ने धान के खेतों के बीच से गुजरने वाली बजरी की पतली सड़क को अपने करियर का पहला 'ट्रैक'बनकार अपनी जिंदगी की पहली दौड़ लगाई थी. वहीं, गांव वालों को लगता कि स्वप्ना की वजह से अब गांव में पानी की समस्या भी सुलझ जाएगी.

स्वप्ना की मां बासोना बर्मन ने कहा, ''उसके फाइनल से पहले मैं दिन भर पूजा करती रही. हर कोई मुझसे कह रहा था कि मैं कुछ खा लूं, लेकिन मैंने अपनी बेटी की सफलता के लिए व्रत रखा था. बचपन में तो वह नंगे पांव ही दौड़ती थी. हम उसके लिए खाने का इंतजाम तो कर नहीं पा रहे थे, जूते खरीदने के लिए पैसे कहां से लाते? लेकिन सिंथेटिक ट्रैक पर कोई नंगे पैर कैसे दौड़ सकता है?"

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First published: 3 September 2018, 16:10 IST
 
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